सुंदरगढ़ के पाटुली गांव में 250 से अधिक लोगों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
VAN MAHOTSAV: सुंदरगढ़ जिले के कोइड़ा प्रखंड अंतर्गत पतामुंडा ग्राम पंचायत के पाटुली गांव स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय परिसर में नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (NINL) की लौह अयस्क खदान की ओर से 77वां वन महोत्सव उत्साह और जनभागीदारी के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ अभियान के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाना और लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, ग्रामीणों, वन विभाग के अधिकारियों तथा NINL के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। पूरे आयोजन के दौरान प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का संदेश प्रमुखता से दिया गया।
जागरूकता रैली और पर्यावरण संरक्षण की शपथ बनी कार्यक्रम की खास पहचान
वन महोत्सव के अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने गांव में एक भव्य जागरूकता रैली निकाली। रैली के दौरान बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और हरियाली बढ़ाने से जुड़े नारों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया। विद्यार्थियों ने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान यह संदेश दिया गया कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना और बड़ा होने तक उनकी देखभाल करना भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। इस पहल से बच्चों और ग्रामीणों में पर्यावरण के प्रति नई जागरूकता देखने को मिली।
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DFO जशबंत सेठी ने पौधारोपण कर दिया संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बोनाई वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) जशबंत सेठी ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर वन महोत्सव का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पृथ्वी को सुरक्षित और आने वाली पीढ़ियों के लिए रहने योग्य बनाने में वृक्षों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक सतत जिम्मेदारी है। यदि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल नहीं की जाएगी तो वृक्षारोपण अभियान अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएगा। उन्होंने सभी ग्रामीणों और विद्यार्थियों से अपील की कि वे हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाएं और उसे पेड़ बनने तक संरक्षित रखें। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जनआंदोलन बनाने का भी आह्वान किया।
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ACF दुर्योधन जेराई ने युवाओं और विद्यार्थियों को किया प्रेरित
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सहायक वन संरक्षक (ACF) दुर्योधन जेराई ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें और अपने परिवार तथा गांव में भी अधिक से अधिक वृक्ष लगाने के लिए लोगों को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की चुनौती का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में नियमित रूप से पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।
पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं और वन संरक्षकों का हुआ सम्मान
वन महोत्सव को केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे पर्यावरण शिक्षा और जनभागीदारी से भी जोड़ा गया। विद्यालय में पहले आयोजित पोस्टर मेकिंग और चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इन प्रतियोगिताओं का विषय पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्रकृति बचाओ था। इसके साथ ही उन स्थानीय ग्रामीणों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने वर्षों से वन संरक्षण, पौधों की देखभाल और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस सम्मान समारोह का उद्देश्य समाज में पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना तथा अन्य लोगों को भी इस दिशा में प्रेरित करना था।
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250 से अधिक लोगों की भागीदारी से मजबूत हुआ हरित भविष्य का संकल्प
इस कार्यक्रम में 250 से अधिक स्थानीय ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें पतामुंडा ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच अभिनाश सुमन बागे, वार्ड सदस्य, स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य, NINL के हेड (माइनिंग) पंकज कुमार, शिक्षक, विद्यार्थी, ग्रामीण तथा विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल रहे। सभी ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ केवल एक अभियान नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का राष्ट्रीय संकल्प है। NINL द्वारा आयोजित यह वन महोत्सव पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जिसने लोगों को हरियाली बढ़ाने और प्रकृति की रक्षा के लिए प्रेरित किया।
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