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मानगो में भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि दी, युवाओं को जल-जंगल-जमीन व स्वाभिमान की रक्षा का संदेश

Jamshedpur News: अमर शहीद भगवान बिरसा मुंडा के 126वें शहादत दिवस के अवसर पर को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) मानगो नगर समिति की ओर से एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मानगो के जवाहरनगर रोड नंबर-12 स्थित सबीना मस्जिद के समीप पार्टी कार्यालय में नगर अध्यक्ष फतेहचंद टुडू की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सभा की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के तस्वीर पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर महान जननायक को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में केंद्रीय सदस्य शेख बदरुद्दीन, प्रभात सिंह, मोहम्मद मुस्ताक, शेख अजहरुद्दीन, साबिर खान, गौरव मल्लिक, अमित साव, आसिफ आलम, डेनियल कांडिर, मोहम्मद शहाबुद्दीन, परवेज अख्तर, शेख सरफुद्दीन सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।


बिरसा मुंडा: आदिवासी स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक


सभा को संबोधित करते हुए नगर अध्यक्ष फतेहचंद टुडू ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संघर्ष, स्वाभिमान और जनजागरण की जीवंत मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि उन्नीसवीं सदी के अंतिम दौर में जब अंग्रेजी शासन और सामंती व्यवस्था आदिवासी समाज के अधिकारों का हनन कर रही थी, तब बिरसा मुंडा ने लोगों को संगठित कर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। फतेहचंद टुडू ने कहा कि बहुत कम उम्र में बिरसा मुंडा ने यह समझ लिया था कि अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए समाज को जागरूक और संगठित होना होगा। यही कारण था कि उन्होंने लोगों के बीच आत्मसम्मान और स्वावलंबन का संदेश फैलाया। उन्होंने कहा कि आज भी बिरसा मुंडा का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, क्योंकि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

उलगुलान आंदोलन ने बदली इतिहास की दिशा


कार्यक्रम में वक्ताओं ने बिरसा मुंडा के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक "उलगुलान" आंदोलन का भी उल्लेख किया। बताया गया कि यह आंदोलन केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह नहीं था, बल्कि आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन की रक्षा का एक व्यापक जनआंदोलन था। बिरसा मुंडा ने अपने अनुयायियों को संगठित कर शोषण, अन्याय और दमन के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। उनके आंदोलन ने अंग्रेजी प्रशासन को झकझोर दिया और आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिकारों को लेकर नई सोच विकसित हुई। वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा का संघर्ष हमें यह सिखाता है कि जब समाज एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए खड़ा होता है, तब बड़े से बड़ा अन्याय भी अधिक समय तक टिक नहीं पाता।

आज की पीढ़ी के लिए बिरसा मुंडा का संदेश


श्रद्धांजलि सभा में फतेहचंद टुडू ने कहा कि आधुनिक समय में बिरसा मुंडा के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने युवाओं से शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने समाज को जागरूकता, एकता और आत्मविश्वास का रास्ता दिखाया था। आज जरूरत है कि युवा उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब लोग अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं का सम्मान करते हुए विकास की राह पर आगे बढ़ें। बिरसा मुंडा का जीवन इसी संतुलन का सबसे बड़ा उदाहरण है।

शहादत से मिली सीख: अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता जरूरी


सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलकर समाज में एकता, भाईचारा और न्याय की भावना को मजबूत करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा की शहादत केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए एक संदेश है। उनकी कहानी बताती है कि अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं चाहिए और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा सजग रहना चाहिए। कार्यक्रम का समापन "धरती आबा बिरसा मुंडा अमर रहें" के नारों के साथ हुआ। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद सभी लोगों ने उनके संघर्ष, बलिदान और आदर्शों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा समाज के उत्थान और जनहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

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