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कोवाली थाना प्रभारी पर बुजुर्ग से मारपीट का आरोप: एमजीएम अस्पताल पहुंचे विधायक संजीव सरदार, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत कोवाली थाना क्षेत्र के हेंसड़ा गांव में एक बुजुर्ग के साथ कथित पुलिस प्रताड़ना का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। हेंसड़ा गांव निवासी करण बेरा ने कोवाली थाना प्रभारी मुकेश कुमार साव पर अपने पिता श्यामा प्रसाद बेरा के साथ मारपीट करने, झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने तथा रुपये मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद से स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस द्वारा की गई कथित कार्रवाई के कारण श्यामा प्रसाद बेरा की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। पहले उन्हें पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, लेकिन स्वास्थ्य स्थिति में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर रेफर कर दिया। वर्तमान में उनका इलाज एमजीएम अस्पताल में चल रहा है। घटना सामने आने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

एमजीएम अस्पताल पहुंचे विधायक संजीव सरदार


घटना की जानकारी मिलने के बाद पोटका विधायक संजीव सरदार मंगलवार को सीधे एमजीएम अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती श्यामा प्रसाद बेरा से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और परिजनों से पूरे मामले की जानकारी प्राप्त की। विधायक ने बताया कि वह राज्यसभा चुनाव से संबंधित कार्यों के कारण रांची में थे। जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली, वे जमशेदपुर लौटे और सीधे अस्पताल जाकर पीड़ित परिवार से मिले। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक के साथ कानून के दायरे से बाहर जाकर अमानवीय व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। संजीव सरदार ने अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों से भी पीड़ित की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए वे हर स्तर पर प्रयास करेंगे। विधायक ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस की भूमिका जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होती है। यदि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय होता है तो उसे न्याय दिलाना सरकार और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।

जनता में भय नहीं, विश्वास पैदा करना पुलिस की जिम्मेदारी


पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक संजीव सरदार ने कहा कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि लोग पुलिस से सुरक्षा के बजाय भय महसूस करने लगें तो यह स्थिति किसी भी समाज के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ पहले कभी कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ और जिसकी कोई नकारात्मक पृष्ठभूमि नहीं रही, उसके साथ कथित रूप से इस तरह की बर्बरता होना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि पुलिस को कानून के अनुसार कार्य करना चाहिए, लेकिन यदि किसी अधिकारी द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग किया जाता है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। संजीव सरदार ने कहा कि पुलिस प्रशासन का उद्देश्य लोगों में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता और पुलिस के बीच बेहतर संबंध ही कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और लोगों का भरोसा बना रहे।

उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग


विधायक ने कहा कि यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पुलिस व्यवस्था को शर्मसार करने वाली घटना होगी। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी दोनों स्तरों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। संजीव सरदार ने बताया कि उन्होंने इस मामले की जानकारी वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को दे दी है। इसके अलावा वे पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष भी मामला उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देंगे और न्याय सुनिश्चित करने की मांग करेंगे।विधायक का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए केवल जांच ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार लोगों पर प्रभावी कार्रवाई भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि किसी ने अपने पद का दुरुपयोग किया है तो उसके खिलाफ उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई होनी चाहिए।

पीड़ित की हालत गंभीर, शरीर पर चोट के निशान


परिजनों के अनुसार श्यामा प्रसाद बेरा पहले से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्हें मधुमेह (शुगर), उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और सांस संबंधी बीमारी की शिकायत है। ऐसे में कथित मारपीट और प्रताड़ना ने उनकी शारीरिक स्थिति को और अधिक खराब कर दिया। परिवार का आरोप है कि उनके दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। पैरों की चमड़ी फट गई, जिसके कारण चिकित्सकों को टांके लगाने पड़े। इसके अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी सूजन और चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें पहले पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद चिकित्सक लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि बुजुर्ग की उम्र और पहले से मौजूद बीमारियों को देखते हुए उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। परिजनों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाए।

न्याय की मांग तेज, प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें


इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। लोगों का कहना है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो इससे कानून के शासन पर लोगों का विश्वास मजबूत होगा। पीड़ित परिवार ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें किसी प्रकार की विशेष सुविधा नहीं चाहिए, बल्कि केवल निष्पक्ष जांच और न्याय चाहिए। परिवार का आरोप है कि पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के बाद श्यामा प्रसाद बेरा की हालत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। वहीं विधायक संजीव सरदार ने भी भरोसा दिलाया है कि वे इस मामले को प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर उठाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय होने पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि उसे न्याय दिलाया जाए। अब सभी की निगाहें पुलिस विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है और पूरे क्षेत्र में इस मामले को लेकर चर्चा जारी है।

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