Jamshedpur News : परसुडीह क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पूर्वी कालीमाटी पंचायत के सलगाझरी गांव में हाल ही में एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तहत आदिवासी हो समाज को उनके सामाजिक और धार्मिक कार्यों को सुगम बनाने के लिए बर्तन और क्षेत्र की सुरक्षा व सुव्यवस्था के लिए स्ट्रीट लाइटें प्रदान की गईं। यह पूरी पहल जिला परिषद उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा द्वारा अपने निजी खर्च पर की गई, जिसने स्थानीय ग्रामीणों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के कई लोग उपस्थित थे. इसमें मुख्य रूप से मुखिया प्रभुराम मुंडा, आमेंलदा कुजूर, संतोष चौबे, बडुंग सोय, बहादुर कालुंडिया, सेलाई पूर्ति और सलुका जोंको शामिल थे।
आदिवासी हो समाज की मांग और त्वरित पहल
सलगाझरी गांव में लंबे समय से आदिवासी हो समाज को शादी-विवाह, श्राद्ध कर्म और अन्य सामूहिक त्योहारों के आयोजन में बर्तनों की कमी के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा, गांव की गलियों में पर्याप्त रोशनी न होने के कारण शाम ढलते ही अंधेरा पसर जाता था, जिससे महिलाओं और बच्चों को आवागमन में परेशानी होती थी। विगत दिनों आदिवासी हो समाज के प्रतिनिधियों ने जिला परिषद उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा से मुलाकात कर अपनी इन बुनियादी समस्याओं को साझा किया था और उनसे बर्तन व स्ट्रीट लाइट उपलब्ध कराने की मांग की थी। पंकज सिन्हा ने मामले की गंभीरता और समाज की जरूरत को देखते हुए बिना किसी सरकारी प्रक्रिया का इंतजार किए, तुरंत अपने निजी कोष से इन सामग्रियों को उपलब्ध कराने का फैसला किया.
बुनियादी सुविधाओं व प्रकाश व्यवस्था का विस्तार
इस पहल के तहत गांव के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों और मुख्य गलियों में लगाने के लिए कई स्ट्रीट लाइटें सौंपी गईं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शाम और रात के समय गांव के गली-मोहल्लों में पर्याप्त रोशनी रहे। स्ट्रीट लाइटें लगने से न सिर्फ गांव की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि असामाजिक तत्वों पर भी लगाम कसी जा सकेगी। इसके साथ ही, बड़े पैमाने पर दिए गए बर्तनों से अब गांव के लोगों को किसी भी सामूहिक या पारिवारिक आयोजन के लिए बाहर से महंगे किराये पर बर्तन लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
लोगों को सहयोग करना मेरी पहली प्राथमिकता: पंकज सिन्हा
कार्यक्रम में जिला परिषद उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि समाज के लोगों को सहयोग करना उनकी पहली प्राथमिकता है. जनप्रतिनिधि होने के नाते उनक यह पद केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा का एक माध्यम है। जब पिछले दिनों हो समाज के प्रबुद्ध जनों ने उनसे मिलकर गांव की इन समस्याओं से अवगत कराया था, तभी उसने यह ठान लिया था कि इसमें तनिक भी देरी नहीं होनी चाहिए। शादी-विवाह और हमारे पारंपरिक सामाजिक कार्य समाज की रीढ़ होते हैं। ऐसे आयोजनों में बर्तनों की कमी के कारण हमारे भाइयों को परेशान होना पड़े, यह उसे स्वीकार नहीं था। रही बात स्ट्रीट लाइटों की, तो रोशनी पर हर नागरिक का अधिकार है। अंधेरे के कारण हमारी माताओं-बहनों को शाम को बाहर निकलने में डर लगे, ऐसा माहौल हम नहीं रहने देंगे। यह जो भी सामग्री आज मैंने आप सबको सौंपी है, वह किसी सरकारी फंड से नहीं बल्कि मेरे अपने निजी खर्च से है, क्योंकि मैं आप सबको अपना परिवार मानता हूं। भविष्य में भी सलगाझरी और पूरे परसुडीह क्षेत्र के विकास के लिए मैं हर संभव प्रयास करता रहूंगा। आपकी खुशहाली ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।
स्ट्रीट लाइटों के लग जाने से गांव की गलियां जगमगा उठेंगी: प्रभुराम मुंडा
पूर्वी कालीमाटी पंचायत के मुखिया प्रभुराम मुंडा ने कहा कि हम अक्सर देखते हैं कि छोटी से छोटी मांग के लिए भी सरकारी फाइलों और प्रक्रियाओं में महीनों का समय लग जाता है। लेकिन जिला परिषद उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा ने जिस तत्परता से हमारी मांग को सुना और अपने निजी खर्च पर इसे पूरा किया, वह सचमुच अनुकरणीय है। यह एक सच्ची लीडरशिप की पहचान है। आदिवासी हो समाज अपनी परंपराओं और संस्कृति को बहुत सहेज कर रखता है। हमारे सामूहिक भोज और शादियों में अब इन बर्तनों से बहुत बड़ी मदद मिलेगी। साथ ही, इन स्ट्रीट लाइटों के लग जाने से गांव की गलियां जगमगा उठेंगी, जिससे रात के समय होने वाली दुर्घटनाओं और दिक्कतों से हमारे ग्रामीणों को मुक्ति मिलेगी।
एकजुटता व जनभागीदारी से ही बदलेगी गांव की तस्वीर: संतोष चौबे
कार्यक्रम संतोष चौबे ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने समाज में एकजुटता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज जो नजारा हम सलगाझरी गांव में देख रहे हैं, वह इस बात का सबूत है कि अगर समाज और नेतृत्व के बीच सही तालमेल हो, तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं होती। पंकज सिन्हा जी ने आज जो दरियादिली दिखाई है, उसने राजनीति से ऊपर उठकर मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक नई मिसाल पेश की है। एक सजग समाज वही है जो अपनी जरूरतों को पहचाने और सही मंच पर अपनी बात रखे। अब जिम्मेदारी हम ग्रामीणों की है। जो स्ट्रीट लाइटें और बर्तन हमें मिले हैं, हमें इनका सही रखरखाव करना होगा। यह संपत्ति अब पूरे गांव की है। हमें आपस में मिलजुल कर और पूरी पारदर्शिता के साथ इनका उपयोग करना चाहिए ताकि लंबे समय तक इसका लाभ सबको मिल सके। जब हम सब मिलकर अपने गांव के विकास की चिंता करेंगे, तभी हमारा क्षेत्र आगे बढ़ेगा।
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