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बरहरवा में फुलो-झानो पुस्तकालय सह अध्ययन केंद्र का शुभारंभ, शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल

Jharkhand news: बरहरवा प्रखंड क्षेत्र के मयूरकोला पंचायत अंतर्गत ढाटापाड़ा गांव में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की शुरुआत की गई। 1855-56 के महान हूल क्रांति की वीर आदिवासी बहनों फुलो-झानो मुर्मू की स्मृति में फुलो-झानो पुस्तकालय सह अध्ययन केंद्र का उद्घाटन किया गया। यह पुस्तकालय ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों, युवाओं और विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का नया केंद्र बनेगा। कार्यक्रम का उद्देश्य गांव के विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराना और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं तथा उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना है। पुस्तकालय का उद्घाटन बरहरवा के प्रखंड विकास पदाधिकारी सन्नी कुमार, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक सरोज कुमार सोरेन, पंचायत समिति सदस्य फूलकुमारी उरांव और झारखंड के लाइब्रेरी मेंटर के रूप में प्रसिद्ध संजय कच्छप ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।

फुलो-झानो के नाम पर स्थापित पुस्तकालय से बढ़ेगा शिक्षा का दायरा

उद्घाटन समारोह के दौरान धरती आबा बिरसा मुंडा, फुलो-झानो मुर्मू, तिलका मांझी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, वीर बुधु भगत और बाबा कार्तिक उरांव के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीडीओ सन्नी कुमार ने कहा कि शिक्षा समाज के विकास का सबसे बड़ा माध्यम है। स्कूल, कॉलेज और पुस्तकालय विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन पुस्तकालय में आकर अध्ययन करने, इंटरनेट का सकारात्मक उपयोग करने और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही युवा अपने जीवन में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

फुलो-झानो पुस्तकालय को ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। यहां विद्यार्थियों को दैनिक समाचार पत्र, मासिक पत्रिकाएं, इंटरनेट सुविधा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। लाइब्रेरी मेंटर संजय कच्छप ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन कई बार संसाधनों के अभाव में विद्यार्थी पीछे रह जाते हैं। ऐसे पुस्तकालय बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे से दूर रहकर शिक्षा को अपने जीवन का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि हर गांव में एक पुस्तकालय और हर बच्चे के हाथ में किताब का सपना पूरा करने के लिए सामुदायिक सहयोग जरूरी है।

सामुदायिक सहयोग से संचालित होगा अध्ययन केंद्र

कार्यक्रम में बताया गया कि यह पुस्तकालय पूरी तरह सामुदायिक सहयोग से संचालित किया जाएगा। ग्रामीणों ने भी इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बताया।पुस्तकालय में विद्यार्थियों के लिए शांतिपूर्ण अध्ययन वातावरण तैयार किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं यहां बैठकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे और अपने ज्ञान का विस्तार कर पाएंगे। आयोजकों ने बताया कि आने वाले समय में पुस्तकालय में और अधिक किताबें, शैक्षणिक सामग्री तथा डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की रही सक्रिय भागीदारी

उद्घाटन समारोह में कई सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक और ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शिवा उरांव, राजकुमार पन्ना, बंधु कुजूर, कार्तिक उरांव, इंजीनियर राकेश सोरेन, रामबाबू हांसदा, मुन्ना सरोज, राकेश कुजूर सहित कई लोगों ने भाग लिया। इसके अलावा यूथ क्लब ढाटापाड़ा के सदस्य संजय टोप्पो, रोहित कुमार मिर्ज, प्रशांत मिर्ज, दुलाल कुजूर, मनोज टोप्पो, रूपक टोप्पो, सुभाष मिर्ज, जयदेव कुजूर सहित बड़ी संख्या में युवा मौजूद थे। महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की भी कार्यक्रम में अच्छी भागीदारी रही। सभी ने पुस्तकालय स्थापना को क्षेत्र के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

ग्रामीणों ने कहा कि फुलो-झानो पुस्तकालय सह अध्ययन केंद्र की स्थापना से क्षेत्र में शिक्षा का वातावरण मजबूत होगा। यह केंद्र केवल किताब पढ़ने की जगह नहीं बल्कि युवाओं के सपनों को पूरा करने का माध्यम बनेगा। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह की पहल से गांव के बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे प्रतियोगी परीक्षाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल कर सकेंगे। बिरसा मुंडा शहादत दिवस पर शुरू की गई यह पहल आदिवासी समाज की महान परंपरा, शिक्षा के प्रति जागरूकता और सामाजिक विकास का प्रतीक बनकर सामने आई है। आने वाले समय में यह पुस्तकालय क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का केंद्र साबित हो सकता है।

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