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सिदो-कान्हू हूल दिवस पर छोटा तालसा गांव में आयोजित होगा रक्तदान शिविर, समाज के लोगों से बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील

 Jamshedpur News : सुंदरनगर क्षेत्र स्थित छोटा तालसा गांव में इस वर्ष का 'सिदो-कान्हू हूल दिवस' बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रहा है। आगामी 30 जून को वीर शहीदों की स्मृति में एक विशाल एक दिवसीय रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविर छोटा तालसा के स्थानीय क्लब भवन में सुबह 9:00 बजे से लेकर अपराह्न 4:00 बजे तक चलेगा। इस पुनीत कार्य का उद्देश्य वीर स्वतंत्रता सेनानियों सिदो-कान्हू को अपनी अनूठी श्रद्धांजलि अर्पित करना और रक्त की कमी से जूझ रहे जरूरतमंद मरीजों की जान बचाना है। इस भव्य आयोजन की रूपरेखा तय करने के लिए गांव में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी, जिसकी जानकारी माझी बाबा उपेंद्र मुर्मू और क्षेत्र के विख्यात 'ट्राइबल ब्लड मैन' राजेश मार्डी ने संयुक्त रूप से दी। इस बैठक में आयोजन को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार की गई, जिसमें कुंवर बास्के, धनु मुर्मू, विजय मार्डी, राम बास्के, विक्रम टुडू, धर्मेंद्र मुर्मू, बबलू हांसदा, रुपेन बास्के और बाबूलाल मुर्मू समेत कई सक्रिय ग्रामीण और युवा उपस्थित थे।




दो संस्थाओं के सहयोग से हो रहा शिविर का आयोजन

इस रक्तदान शिविर का आयोजन दो प्रमुख सामाजिक संस्थाओं-'नई जिंदगी परिवार' और 'सिदो कान्हू सोपोहोद सांवता' के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। ये दोनों संस्थाएं लंबे समय से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक चेतना जगाने का काम कर रही हैं। हूल दिवस केवल पारंपरिक रूप से उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का भी दिन है। सिदो-कान्हू ने समाज की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी, और आज उनके पदचिह्नों पर चलते हुए ग्रामीण अपने रक्त की बूंदों से दूसरों को 'नई जिंदगी' देने का संकल्प ले रहे हैं।

हूल दिवस पर वीर शहीदों को दी जायेगी अनोखी श्रद्धांजलि

30 जून का दिन भारतीय इतिहास और विशेषकर आदिवासी समाज के लिए शौर्य और स्वाभिमान का प्रतीक है। सन 1855 में इसी दिन सिदो, कान्हू, चांद और भैरव के नेतृत्व में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ 'हूल क्रांति' का शंखनाद हुआ था। छोटा तालसा की 'सोपोहोद सांवता' संस्था ने इस ऐतिहासिक दिन को और अधिक सार्थक बनाने के लिए इस बार रक्तदान शिविर को माध्यम चुना है। संस्था के सदस्यों का कहना है कि शहीदों को नमन करने का इससे बेहतर तरीका नहीं हो सकता कि हम उनके बलिदान दिवस पर मानवता की रक्षा के लिए आगे आएं। यह शिविर क्षेत्र के युवाओं को अपनी माटी और समाज से जोड़ने का एक बेहतरीन जरिया बनेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ल रही रहे जागरूकता व सोच

एक दौर था जब सुदूर ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में रक्तदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और डर का माहौल था। लोग रक्तदान करने से कतराते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि इससे शरीर में कमजोरी आ जाएगी। लेकिन हाल के वर्षों में सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं के निरंतर प्रयास से इस सोच में बड़ा बदलाव आया है। आज छोटा तालसा और आसपास के सुदूर देहाती क्षेत्रों के ग्रामीण न केवल रक्तदान के महत्व को समझ रहे हैं, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर इस महादान का हिस्सा बन रहे हैं। युवाओं के साथ-साथ महिलाओं में भी इसे लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है, जो ग्रामीण भारत की एक बेहद खूबसूरत और बदलती हुई तस्वीर पेश करता है।

रक्तदान ही सच्ची मानव सेवा है:माझी बाबा

बैठक के दौरान ग्रामीणों और युवाओं को संबोधित करते हुए माझी बाबा उपेंद्र मुर्मू ने बेहद प्रेरक विचार रखे। उन्होंने कहा कि 30 जून को वीर शहीदों सिदो-कान्हू का बलिदान दिवस है, जिन्होंने हमारी जल-जंगल-जमीन और अस्मिता की रक्षा के लिए अपना खून बहाया था। आज देश गुलाम नहीं है, लेकिन हमारा समाज कई बीमारियों और संकटों से जूझ रहा है। अस्पतालों में हमारे कई भाई-बहन सिर्फ इसलिए दम तोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें समय पर रक्त नहीं मिल पाता। माझी बाबा होने के नाते, मैं आप सभी से यह अपील करता हूं कि हर स्वस्थ व्यक्ति को आवश्यक रूप से इस शिविर में आकर रक्तदान करना चाहिए। ईश्वर ने हमारे शरीर में रक्त की ऐसी व्यवस्था की है जो दान करने के बाद दोबारा स्वतः बन जाता है। हमारा दिया हुआ यही रक्त किसी मरते हुए इंसान को नया जीवन दे सकता है।

आदिवासी समाज ने समझी महादान की महत्ता: राजेश मार्डी

ट्राइबल ब्लड मैन राजेश मार्डी ने अपने संबोधन में कहा कि आज उसे यह देखकर बेहद गर्व हो रहा है कि हमारे सुदूर गांव-देहात के लोग भी अब स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकारों के प्रति इतने सजग हो गए हैं। पिछले कुछ सालों में उसने देखा है कि उनके आदिवासी समाज के भीतर रक्तदान को लेकर जो डर और झिझक थी, वह अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। अब लोग समझ गए हैं कि रक्तदान करने से कोई कमजोरी नहीं आती, बल्कि इससे दिल की सेहत अच्छी रहती है और शरीर में नया खून बनता है।


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