साकची स्थित बिरसा मुंडा पार्क में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा
Jamshedpur News: धरती आबा वीर शहीद बिरसा मुंडा के शहादत दिवस के अवसर पर मंगलवार को जमशेदपुर के साकची स्थित बिरसा मुंडा पार्क में श्रद्धांजलि सभा एवं संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहीद स्मारक समिति के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक, मानवाधिकार, झारखंड आंदोलन और जनसरोकार से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने धरती आबा बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा इंकलाबी सलाम और हुल जोहार के साथ उनके संघर्षों को याद किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि अर्पित करना नहीं था, बल्कि बिरसा मुंडा के विचारों और उनके संघर्षों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना भी था। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनके आदर्शों पर चलकर ही सामाजिक न्याय एवं समानता आधारित व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।
झारखंड आंदोलनकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया नेतृत्व
श्रद्धांजलि सभा का नेतृत्व झारखंड आंदोलनकारी एवं ‘हो’ समाज के वरिष्ठ नेता श्री डेमका सोय, डॉ. आंबेडकर एससी/एसटी/ओबीसी माइनॉरिटी वेलफेयर समिति के संयोजक श्री शंभू मुखी डुंगरी तथा झारखंड कौमी एकता मंच की संयोजिका मैडम प्रेरणा कड़ूलना ने संयुक्त रूप से किया। नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा ने समाज के वंचित वर्गों, आदिवासियों और मूलवासियों को संगठित कर उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया था। उनका आंदोलन केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्वाभिमान से भी जुड़ा हुआ था। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में बिरसा मुंडा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है, ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास और संघर्ष की विरासत को समझ सके।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा का प्रतीक है बिरसा मुंडा का संघर्ष
सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा का संघर्ष अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक ऐतिहासिक विद्रोह था, लेकिन इसका मूल उद्देश्य जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना था। उन्होंने आदिवासी समाज के अस्तित्व, संस्कृति और अधिकारों को बचाने के लिए उलगुलान का नेतृत्व किया, जिसने पूरे देश को प्रभावित किया। वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा ने शोषण, अन्याय और दमन के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। उनके संघर्ष ने आदिवासी समाज में आत्मविश्वास और स्वाभिमान की नई चेतना पैदा की। आज भी जब प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण और समुदायों के अधिकारों पर विभिन्न प्रकार के दबाव बढ़ रहे हैं, तब बिरसा मुंडा के विचार और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज को न्याय और समानता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
वर्तमान चुनौतियों पर जताई चिंता, एकजुट संघर्ष का आह्वान
कार्यक्रम में वक्ताओं ने किसानों, मजदूरों, आदिवासियों, दलितों और अन्य वंचित समुदायों के अधिकारों पर बढ़ते संकट को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दे आज भी समाज के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे समय में बिरसा मुंडा के विचारों और संघर्षों को समझना तथा उन्हें जन-जन तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, सांप्रदायिक सद्भाव और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने झारखंड और देश के लोगों से अपील की कि वे बिरसा मुंडा के आदर्शों को अपनाकर समाज में समानता, भाईचारा और न्याय की भावना को मजबूत करें। साथ ही उनके सपनों के झारखंड के निर्माण के लिए संगठित होकर कार्य करें।
शोषणमुक्त और समतामूलक समाज निर्माण का लिया गया संकल्प
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार कार्यकर्ता, झारखंड आंदोलनकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्रीमती सोनका सरदार, धतकीडीह-बिष्टुपुर की समाजसेवी मैडम नईमा हुसैन, मैडम मीरा कुमारी पांडे, श्रीमती अनिमा बोस, झारखंड आंदोलनकारी श्री अजीत तिर्की, डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क संचालन समिति के संयोजक श्री राजकुमार दास, मानवाधिकार कार्यकर्ता श्री रजनीकांत मिश्रा, श्री राहुल शर्मा, श्री रोहित शर्मा, श्री गौतम बोस तथा श्री दीपक सोरेन सहित अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे धरती आबा बिरसा मुंडा के सपनों के अनुरूप शोषणमुक्त, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए कार्य करेंगे। साथ ही जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्षरत रहने का भी संकल्प लिया गया। श्रद्धांजलि सभा का समापन बिरसा मुंडा के विचारों को आगे बढ़ाने और समाज में सामाजिक न्याय एवं मानवीय मूल्यों को मजबूत करने के संदेश के साथ हुआ।
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