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जादूगोड़ा परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालय में गरीब व विस्थापित परिवारों के बच्चों के लिए खुला नामांकन, अभिभावकों में खुशी

Jamshedpur News: जादूगोड़ा क्षेत्र में शिक्षा को लेकर लंबे समय से चल रहा संघर्ष आखिरकार रंग लाया। झामुमो के पूर्व मुख्य संयोजक एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य बाघराय मार्डी के आंदोलन के बाद यूसिल (यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) प्रबंधन ने बड़ा फैसला लेते हुए गैर-यूसिल कर्मियों, विस्थापित, प्रभावित और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालयों में नामांकन का रास्ता खोल दिया है। अब बाल वाटिका वन से लेकर स्टैंडर्ड वन तक क्षेत्र के योग्य बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इस फैसले के बाद क्षेत्र के अभिभावकों में उत्साह और खुशी का माहौल है।

पहले केवल यूसिल कर्मियों के बच्चों को मिलता था प्रवेश


जानकारी के अनुसार, अब तक यूसिल के संरक्षण एवं परमाणु ऊर्जा शिक्षा सोसायटी मुंबई के अधीन संचालित केंद्रीय विद्यालयों में बाल वाटिका और प्रारंभिक कक्षाओं में केवल यूसिल कर्मचारियों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती थी। इससे आसपास के विस्थापित एवं गरीब परिवारों के बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते थे। इस व्यवस्था का विरोध मार्च माह से लगातार किया जा रहा था। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना था कि जिस भूमि से खनिज संसाधन निकाले जा रहे हैं, उसी क्षेत्र के लोगों के बच्चों को शिक्षा से दूर रखना उचित नहीं है। लगातार जनदबाव और आंदोलन के बाद प्रबंधन ने नियमों में बदलाव करते हुए गैर-यूसिल परिवारों के बच्चों को भी अवसर देने का निर्णय लिया।


जादूगोड़ा, नरवा पहाड़ और तुरामडीह यूनिटों में मिलेगा लाभ


नए निर्णय के तहत जादूगोड़ा, नरवा पहाड़ और तुरामडीह यूरेनियम परियोजना क्षेत्र के अंतर्गत संचालित परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालयों में तीन वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चों का नामांकन संभव होगा। इस योजना के अंतर्गत चयनित बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर और विस्थापित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। यूसिल प्रबंधन ने इस संबंध में पत्र जारी कर झामुमो नेता बाघराय मार्डी को भी जानकारी दी है, जिसके बाद क्षेत्र में इसे आंदोलन की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

शिक्षा के बाद रोजगार की भी लड़ाई जारी रहेगी:बाघराय मार्डी


झामुमो नेता बाघराय मार्डी ने इस फैसले को सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यूसिल जिस क्षेत्र की जमीन और संसाधनों का उपयोग कर रही है, वहां के लोगों को शिक्षा से वंचित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि अब बच्चे नर्सरी से लेकर बारहवीं तक शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे, लेकिन संघर्ष यहीं समाप्त नहीं होगा। आगे उनकी मांग होगी कि बारहवीं के बाद उच्च शिक्षा में प्रवेश और आर्थिक सहयोग की जिम्मेदारी भी कंपनी उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराया जाए ताकि विस्थापित परिवार आत्मनिर्भर बन सकें।


अभिभावक संघ ने बताया आंदोलन की बड़ी उपलब्धि


अभिभावक संघ और आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस फैसले को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। बाघराय मार्डी के अनुसार, वर्तमान में लगभग 400 बच्चों को पहली से बारहवीं तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध हो रही है। उन्होंने दावा किया कि यूसिल इस योजना पर प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ रुपये खर्च करती है, जिसमें बच्चों की फीस, किताबें, छात्रवृत्ति और ड्रेस शामिल हैं। यह पूरा खर्च कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना के तहत उठाया जाता है। अभिभावकों का कहना है कि यह शिक्षा के अधिकार और सामाजिक भागीदारी की दिशा में सकारात्मक बदलाव है।


फैसले के बाद हुआ भव्य स्वागत, मिठाइयां बांटकर जताई खुशी


बाल वाटिका में नामांकन की अनुमति मिलने के बाद तुरामडीह माइंस से सटे आहारघुटू क्षेत्र में अभिभावक संघ की ओर से स्वागत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में झामुमो नेता बाघराय मार्डी सहित कई सामाजिक और जनप्रतिनिधियों का पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों से सम्मान किया गया। कार्यक्रम में पत्ता मुकुट और पट्टा पहनाकर अतिथियों का स्वागत किया गया तथा मिठाइयां बांटी गईं। इस दौरान पूर्व जिला परिषद सदस्य पिंटू दत्त, केरूवा डुंगरी के मुखिया कान्हू मुर्मू, माया हेंब्रम, चंपा मुर्मू, प्रियंका गुड़िया समेत कई लोगों ने संबोधित करते हुए कहा कि अब अगला लक्ष्य बच्चों के लिए उच्च शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए।

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