करनडीह दिशोम जाहेर प्रांगण में आयोजित हुआ साहित्य सम्मेलन
Jamshedpur News: जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेर प्रांगण में रविवार को संताल समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोकगीतों और धार्मिक परंपराओं को केंद्र में रखकर एक दिवसीय साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन Sahitya Akademi और जाहेरथान कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में कोल्हान क्षेत्र के साहित्यकार, शोधकर्ता, संस्कृति प्रेमी और समाज के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य संताल समाज की पारंपरिक ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उसकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना था।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ सम्मेलन का शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जाहेरथान कमेटी के ट्रस्टी C R Majhi और साहित्य अकादमी संताली के संयोजक Chaitanya Prasad Majhi ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने संताल साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। अपने संबोधन में चैतन्य प्रसाद माझी ने कहा कि साहित्य अकादमी लगातार ऐसे विषयों पर चर्चा आयोजित कर रही है, जिससे युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को समझ सके। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में लोक परंपराओं को सहेजना समाज की बड़ी जिम्मेदारी है। इस अवसर पर साहित्य अकादमी के प्रतिनिधि Shantanu Ghosh भी मौजूद रहे।
प्रथम सत्र में विवाह गीत और धार्मिक अनुष्ठानों पर हुई चर्चा
सम्मेलन का पहला सत्र साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता और कला-संस्कृति विशेषज्ञ Kalicharan Hembrom की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। इस सत्र में संताल समाज की धार्मिक और सामाजिक परंपराओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ता Gajendra Kisku ने जोम सिम बिंती से जुड़ी परंपराओं पर अपने विचार रखे और बताया कि इन अनुष्ठानों का सामाजिक जीवन में कितना महत्व है। वहीं प्रोफेसर Lakhai Baskey ने विवाह के दौरान गाये जाने वाले पारंपरिक गीतों और बिंती की सांस्कृतिक विशेषताओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि विवाह गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक स्मृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके साथ ही संताल समाज के धार्मिक ग्रंथ हितल में वर्णित भांडान बिंती यानी श्राद्ध कर्म से जुड़ी परंपराओं पर भी गंभीर विमर्श किया गया। वक्ताओं ने बताया कि इन विधियों में प्रकृति, पूर्वजों और सामाजिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था झलकती है।
दूसरे सत्र में नवजात संस्कार और श्राद्धकर्म पर हुआ विमर्श
सम्मेलन के दूसरे सत्र की अध्यक्षता अखिल भारतीय संताली लेखक संघ के अध्यक्ष Lakshman Kisku ने की। इस सत्र में संताल समाज के विभिन्न संस्कारों और पारंपरिक रीति-रिवाजों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ता Narendra Nath Soren ने नवजात शिशु के छठ्ठी अनुष्ठान से जुड़े गीतों और उनके सामाजिक महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि संताल समाज में जन्म से जुड़े संस्कार केवल पारिवारिक आयोजन नहीं होते, बल्कि पूरे समुदाय की सहभागिता का प्रतीक होते हैं। वहीं Pradhan Murmu ने श्राद्धकर्म की पारंपरिक पद्धतियों और उनके धार्मिक महत्व की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि संताल समाज में पूर्वजों के प्रति सम्मान और स्मरण की परंपरा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बाहा पर्व के लोकगीत और पूजा पद्धति पर हुआ विशेष मंथन
सम्मेलन का अंतिम सत्र संताल समाज के प्रसिद्ध बाहा पर्व और उससे जुड़े लोकगीतों पर केंद्रित रहा। इस सत्र की अध्यक्षता साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता Joba Murmu ने की। सिदगोड़ा माझी बाबा Kushal Hansda ने बाहा पर्व के पहले दिन देवी-देवताओं के स्नान की पारंपरिक विधि और उसकी धार्मिक महत्ता को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बाहा पर्व प्रकृति पूजा और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। वहीं Ledem Mardi ने बाहा पर्व से जुड़े लोकगीतों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाकर और लोकगीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मनोरंजन भी किया। इस प्रस्तुति ने सम्मेलन को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।
युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का मिला संदेश
सम्मेलन के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज की पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंतिम वक्ता Nibai Soren ने बाहा पर्व से जुड़े विभिन्न विधि-विधानों को विस्तार से समझाते हुए कहा कि संताल संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को संरक्षित रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कार्यक्रम में शामिल साहित्यकारों और समाज के बुद्धिजीवियों ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिकता के प्रभाव के बीच पारंपरिक लोकगीत, अनुष्ठान और सांस्कृतिक धरोहर को बचाना बेहद जरूरी है। सम्मेलन ने युवा पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का मजबूत संदेश दिया।
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