Jamshedpur news : परसुडीह थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बारीगोड़ा-डुंगरीटोला में रविवार को एक घटनाक्रम देखने को मिला। इलाके में वर्षों से रह रहे एक आदिवासी रैयती परिवार की जमीन को जबरन और उस पर अवैध रूप से चहारदीवारी करने की कोशिश को ग्रामीणों ने पूरी तरह से नाकाम कर दिया। बारीगोड़ा-डुंगरीटोला ग्रामसभा के नेतृत्व में एकजुट हुए ग्रामीणों ने पारंपरिक तेवर अपनाते हुए असामाजिक तत्वों द्वारा की गई दीवार को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में ग्रामसभा की ताकत और सामाजिक एकजुटता के आगे भू-माफियाओं और असामाजिक तत्वों की एक नहीं चलती।


असामाजिक तत्वों द्वारा रैयती जमीन की घेराबंदी का मामला

यह पूरा विवाद बारीगोड़ा-डुंगरीटोला की एक मूल्यवान रैयती जमीन से हुआ है। कुछ समय से इलाके के सक्रिय असामाजिक तत्व और भू-माफिया इस ताक में थे कि किसी तरह इस कीमती जमीन पर कब्जा जमाया जा सके। इसके तहत रणनीति बनाकर रातों-रात जमीन के चारों ओर ईंट और सीमेंट की पक्की चहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) करने का काम शुरू कर दिया गया। जब परिवार और स्थानीय ग्रामीणों को इस बात की भनक लगी, तो पूरे गांव में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों का साफ कहना था कि बाहरी और असामाजिक तत्वों को गांव की शांति भंग करने और किसी गरीब की जमीन पर अवैध कब्जा करने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जा सकती।


ग्रामसभा ने बुलायी आपात बैठक, दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

अवैध निर्माण की बात सामने आते ही शनिवार की सुबह बारीगोड़ा-डुंगरीटोला में एक आपात ग्रामसभा बुलाई गई। इस बैठक में गांव के बुजुर्ग, युवा और महिलाएं संख्या में शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में इस बात की निंदा की कि बिना किसी कानूनी अधिकार के रैयती भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। काफी सोच-विचार के बाद ग्रामसभा ने एक सर्वसम्मत फैसला लिया। इस फैसले के तहत निर्माण कार्य कराने वाले असामाजिक तत्वों को साफ तौर पर 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया। उन्हें चेतावनी दी गई कि वे स्वयं 24 घंटे के भीतर चहारदीवारी में इस्तेमाल किए गए ईंट, बालू, सीमेंट और अन्य सामानों को वहां से हटा लें, अन्यथा ग्रामसभा अपने स्तर पर कार्रवाई करेगी।

खत्म होते ही ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

शनिवार को अल्टीमेटम दिए जाने के बाद ग्रामसभा को उम्मीद थी कि कानून व्यवस्था और सामाजिक दबाव को देखते हुए अवैध निर्माण करने वाले लोग अपना सामान हटा लेंगे। लेकिन रविवार की सुबह तक जब 24 घंटे की दी गई पूरी तरह समाप्त हो गई और निर्माण स्थल पर कोई बदलाव नहीं दिखा, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। तय योजना के अनुसार, गांव के पुरुष, महिलाएं और नौजवान एकजुट होने शुरू हो गए। सभी के चेहरों पर अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प साफ दिखाई दे रहा था। बीतने के बाद ग्रामीणों ने सीधे निर्माण स्थल की ओर कूच कर दिया।

कुदाल, व सब्बल लेकर मैदान में उतरीं महिलाएं व युवा

ग्रामीणों का यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से पारंपरिक और संगठित था। गांव के हर घर से लोग इस मुहिम का हिस्सा बनने के लिए बाहर निकले थे। खास बात यह थी कि पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और युवा भी इस अभियान में सबसे आगे नजर आए। लोग अपने हाथों में कुदाल, फावड़ा, सबल और अन्य पारंपरिक औजार लेकर आए थे। जैसे ही सभी लोग विवादित स्थल पर पहुंचे, वहां का माहौल पूरी तरह से ग्रामीणों के नियंत्रण में आ गया। ग्रामीणों के इस भारी हुजूम और उनके तेवरों को अवैध निर्माण कराने वाले असामाजिक तत्वों की तरफ से बीच-बचाव करने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई और वे मौके से दूर ही रहे।

माझी बाबा रमेश मुर्मू के आदेश देते ही मिनटों में ढही दीवार

जैसे ही सभी ग्रामीण औजारों के साथ बाउंड्री वॉल के पास जमा हुए, बारीगोड़ा-डुंगरीटोला के माझी बाबा रमेश मुर्मू ने स्थिति का जायजा लिया। माझी बाबा का आदेश मिलते ही ग्रामीणों ने एक साथ चहारदीवारी पर प्रहार करना शुरू कर दिया। सबल और की चोट से नवनिर्मित पक्की दीवार ताश के पत्तों की तरह ढहने लगी। महिलाओं और युवाओं ने मिलकर कुछ ही मिनटों के भीतर समूची दीवार को पूरी तरह जमीन पर मिला दिया। देखते ही देखते वह अवैध निर्माण मलबे के ढेर में तब्दील हो गया, जिसे असामाजिक तत्वों ने आदिवासियों को बेदखल करने के लिए किया था।


ग्रामसभा ने जमीन को भूमिज का बताया

माझी बाबा रमेश मुर्मू ने चहारदीवारी जाने के बाद पूरे मामले की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह जमीन पूरी तरह से वैध है और इसके मूल रैयत भूमिज हैं। माझी बाबा ने सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए जमीन का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया, जिसके तहत इस विवादित भूमि का खाता नंबर-179 है और प्लॉट संख्या-4 व 5 है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कागज और कानून के अनुसार यह जमीन पूरी तरह से आदिवासी परिवार की है, लेकिन कुछ बाहरी असामाजिक तत्व जबरन इस पर घेराबंदी कर इस गरीब परिवार को उनकी पैतृक जमीन से हमेशा के लिए बेदखल करने की साजिश रच रहे थे, जिसे ग्रामसभा ने कभी कामयाब नहीं होने दिया।

परसुडीह थाना पुलिस को पहले ही दी गई थी सूचना

ग्रामसभा ने इस पूरी कार्रवाई को कानून के दायरे में और पूरी पारदर्शिता के साथ अंजाम दिया। माझी बाबा ने बताया कि शनिवार को जब ग्रामसभा की बैठक में अल्टीमेटम देने का निर्णय लिया गया था, उसी दिन (शनिवार को ही) स्थानीय परसुडीह थाना को इस पूरे मामले की लिखित सूचना दे दी गई थी। पुलिस को अवगत करा दिया गया था कि यदि तय के भीतर चहारदीवारी को नहीं हटाया गया, तो ग्रामसभा अपने निर्णय के अनुसार काम करेगी। पुलिस को पहले ही सूचित किए जाने के कारण इस पूरी कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न नहीं हुई और ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण तरीके से लेकिन बेहद अंदाज में अवैध ढांचे को ध्वस्त कर दिया।


डराने-धमकाने की गंदी संस्कृति गांव में नहीं ग्रामसभा

कार्रवाई के समापन के बाद माझी बाबा रमेश मुर्मू और ग्रामसभा के सदस्यों ने असामाजिक तत्वों को शब्दों में चेतावनी जारी की है। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि ग्रामसभा किसी भी परिस्थिति में अपने किसी भी रैयती परिवार के साथ अन्याय या गलत नहीं होने देगी। असामाजिक तत्वों को अपनी इन हरकतों से तुरंत बाज आ जाना चाहिए, अन्यथा भविष्य में उनके खिलाफ ग्रामसभा और अधिक और दंडात्मक कदम उठाने को मजबूर होगी। उन्होंने साफ कहा कि गांव में केवल और केवल पारंपरिक ग्रामीण परिवेश और भाईचारे के नियमों का ही अनुपालन करना होगा। शहर से आकर गांव के भोले-भाले लोगों को डराने, धमकाने या चमकाने वाली गंदी और हिंसक संस्कृति को की धरती पर किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।