Jamshedpur News: जमशेदपुर के निकट स्थित सालगाझुरी रेलवे स्टेशन एक समय क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों, मजदूरों, छात्रों और दैनिक यात्रियों के लिए आवागमन का प्रमुख केंद्र माना जाता था। टाटानगर–कोलकाता रेल मार्ग पर स्थित यह स्टेशन वर्षों से स्थानीय लोगों की यात्रा का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा, व्यापार और अन्य कार्यों के लिए टाटानगर, घाटशिला, खड़गपुर और कोलकाता की ओर सफर करते थे। संयुक्त ग्राम समन्वय समिति, जमशेदपुर के अध्यक्ष राम सिंह मुंडा ने कहा कि रेलवे लाइन निर्माण के शुरुआती समय से ही इस स्टेशन पर विभिन्न लोकल ट्रेनों का नियमित ठहराव होता रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को कम खर्च में बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध होती थी। लेकिन अक्टूबर 2025 में थर्ड लाइन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद रेलवे प्रशासन द्वारा अचानक सभी लोकल ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया गया। ट्रेनों के ठहराव बंद होने से सबसे अधिक प्रभावित गरीब मजदूर, छात्र-छात्राएं, छोटे व्यापारी और दैनिक यात्री हुए हैं। अब लोगों को दूसरे स्टेशनों तक जाने के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। कई यात्रियों को सड़क मार्ग से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे प्रशासन का यह निर्णय जनभावनाओं के विपरीत है और इससे आम लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
लोकल ट्रेनों का ठहराव बंद होने से बढ़ी आम लोगों की मुश्किलें
सालगाझुरी रेलवे स्टेशन पर लोकल ट्रेनों का ठहराव बंद होने के बाद क्षेत्र के लोगों की दैनिक जिंदगी प्रभावित हो गई है। पहले जहां लोग आसानी से ट्रेन पकड़कर अपने कार्यस्थलों तक पहुंच जाते थे, वहीं अब उन्हें लंबी दूरी तय कर टाटानगर या अन्य स्टेशनों पर जाना पड़ रहा है। इससे दैनिक यात्रियों का अतिरिक्त समय और पैसा दोनों खर्च हो रहा है। क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई करने वाले छात्र अब समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई छात्र-छात्राओं ने बताया कि ट्रेन सुविधा बंद होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर मजदूर वर्ग के लोगों को रोजाना रोजगार के लिए शहर तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों के लिए यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। सार्वजनिक परिवहन की सीमित सुविधा के कारण उन्हें निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो आर्थिक रूप से काफी महंगा साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे प्रशासन को जनहित को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द लोकल ट्रेनों का ठहराव पुनः शुरू करना चाहिए। स्थानीय लोगों के अनुसार यदि स्टेशन पर ट्रेनें नहीं रुकेंगी तो सरकार द्वारा स्टेशन विकास पर खर्च की गई करोड़ों की राशि का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। लोगों का कहना है कि रेलवे को यात्रियों की जरूरतों को समझते हुए व्यवहारिक निर्णय लेना चाहिए।
रेलवे प्रशासन को कई बार सौंपा गया ज्ञापन
संयुक्त ग्राम समन्वय समिति ने इस मुद्दे को लेकर लगातार रेलवे प्रशासन और केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। समिति के नेतृत्व में क्षेत्रीय प्रबंधक टाटानगर, मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) चक्रधरपुर, जोनल रेलवे प्रबंधक कोलकाता, रेल मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय तक कई बार ज्ञापन भेजे गए हैं। राम सिंह मुंडा ने कहा कि ज्ञापनों के माध्यम से रेलवे अधिकारियों को यह बताया गया कि सालगाझुरी रेलवे स्टेशन क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा के समान है। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे स्थानीय लोगों में निराशा और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं। समिति का आरोप है कि रेलवे प्रशासन जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। जबकि लगातार जनप्रतिनिधियों और स्थानीय संगठनों द्वारा इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। समिति के सदस्यों ने यह भी कहा कि रेलवे को केवल तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर नहीं बल्कि सामाजिक और मानवीय जरूरतों पर भी ध्यान देना चाहिए। लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए स्टेशन का उपयोग तभी सार्थक होगा जब वहां आम यात्रियों के लिए पर्याप्त ट्रेन सेवाएं उपलब्ध होंगी।
सांसद और विधायक ने भी उठाई ट्रेनों के ठहराव की मांग
सालगाझुरी रेलवे स्टेशन पर लोकल ट्रेनों का ठहराव शुरू कराने की मांग केवल ग्रामीणों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। स्थानीय सांसद विद्युत वरण महतो तथा विधायक पूर्णिमा साहू ने रेलवे प्रशासन को पत्र लिखकर स्टेशन पर पुनः सभी लोकल ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित करने की मांग की है। जनप्रतिनिधियों ने अपने पत्र में कहा है कि सालगाझुरी रेलवे स्टेशन आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां ट्रेनें नहीं रुकने से हजारों लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन द्वारा अभी तक सकारात्मक कार्रवाई नहीं करना चिंताजनक है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सांसद और विधायक तक इस मुद्दे को उठा चुके हैं, तब रेलवे प्रशासन को इस पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते इस मांग पर विचार नहीं किया गया तो जनता का विश्वास रेलवे प्रशासन से उठ सकता है। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय जनभावनाओं का सम्मान करते हुए जल्द समाधान निकालेगा। लोगों का मानना है कि ट्रेन ठहराव शुरू होने से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति मिलेगी।
करोड़ों की लागत से बना आधुनिक स्टेशन, फिर भी नहीं रुक रहीं ट्रेनें
सालगाझुरी रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए लगभग 4.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। स्टेशन पर नया भवन, टिकट बुकिंग काउंटर, प्रतीक्षालय और अन्य यात्री सुविधाओं का निर्माण कराया गया। इस स्टेशन का ऑनलाइन उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था, जिससे लोगों को उम्मीद जगी थी कि यहां यात्री सुविधाएं और बेहतर होंगी। लेकिन विडंबना यह है कि करोड़ों रुपये खर्च कर स्टेशन का विकास करने के बावजूद यहां लोकल ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्टेशन पर ट्रेनें ही नहीं रुकेंगी तो आधुनिक भवन और सुविधाओं का कोई लाभ यात्रियों को नहीं मिल पाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार विकास योजनाओं के माध्यम से गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने की बात करती है, लेकिन रेलवे प्रशासन का यह निर्णय उसी सोच के विपरीत दिखाई देता है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब स्टेशन का विकास यात्रियों की सुविधा के लिए किया गया है, तो फिर ट्रेनों का ठहराव बंद करने का औचित्य क्या है। क्षेत्र के सामाजिक संगठनों का मानना है कि रेलवे को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और यात्रियों की संख्या तथा स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ट्रेन सेवाएं बहाल करनी चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी, जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो होगा जनआंदोलन
संयुक्त Gram समन्वय समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सालगाझुरी रेलवे स्टेशन पर जल्द लोकल ट्रेनों का ठहराव पुनः शुरू नहीं किया गया तो स्थानीय जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी। समिति का कहना है कि लोगों का धैर्य अब टूटता जा रहा है और लगातार अनदेखी से जनआक्रोश बढ़ रहा है। राम सिंह मुंडा ने कहा कि रेलवे प्रशासन यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेता है तो धरना-प्रदर्शन, जनसभा और रेल चक्का जाम जैसे लोकतांत्रिक आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल ट्रेन ठहराव का मुद्दा नहीं बल्कि हजारों लोगों की आजीविका और सुविधा से जुड़ा मामला है। यदि प्रशासन जनता की समस्याओं को नहीं सुनेगा तो आंदोलन स्वाभाविक होगा। स्थानीय लोगों ने रेलवे मंत्रालय और चक्रधरपुर रेल मंडल से अपील की है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए सालगाझुरी रेलवे स्टेशन पर सभी लोकल ट्रेनों का ठहराव तत्काल पुनः प्रारंभ किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके और यात्रियों की वर्षों पुरानी सुविधा बहाल हो सके।
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