जमशेदपुर में दिल्ली युवा संसद मार्च के समर्थन में नागरिक सभा, पेपर लीक के खिलाफ बुलंद हुई आवाज

Jamshedpur News: जमशेदपुर में रविवार को साझा नागरिक मंच की ओर से दिल्ली में आयोजित युवा संसद मार्च के समर्थन में एक नागरिक सभा और धरना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साकची गोलचक्कर स्थित बिरसा चौक पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, छात्रों, युवाओं और नागरिकों ने भाग लिया। सभा के दौरान वक्ताओं ने देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। साथ ही दिल्ली में आंदोलन कर रहे युवाओं और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना भी की गई।


बिरसा चौक पर जुटे सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक

साकची स्थित बिरसा चौक पर आयोजित इस नागरिक सभा में शहर के कई सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक, छात्र और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम को सियाशरण शर्मा, सुजय राय, सुमित राय, रामकवीन्द्र सिंह, मंथन, अशोक शुभदर्शी, सुखचन्द्र झा, काशीनाथ प्रजापति, देवाशीष मुखर्जी, जगनारायण जगत, वरुण प्रभात, तौहीद्दुल हसन, मोहम्मद शाहिद, जसवंत सिंह, हीरा सिंह, निधि, राजश्री, चिन्मयी मंडल, उषा देवगम, गौतम बोस, अनिमा बोस, शीला, रिम्सा मित्रा, केशोवती नायक, पुरुषोत्तम विश्वनाथ, उदय प्रकाश हयात, चन्दना बनर्जी सहित अनेक लोगों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा लोकतंत्र की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

दिल्ली युवा संसद मार्च के साथ एकजुटता का संदेश

सभा में वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली में आयोजित युवा संसद मार्च केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों और युवाओं की भावनाओं का प्रतीक बन चुका है। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बेरोजगारी के कारण युवाओं में गहरा असंतोष है। जमशेदपुर से आयोजित यह सभा उसी राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त करने और युवाओं की आवाज को मजबूत करने का प्रयास है। वक्ताओं ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में उठ रही आवाजें इस बात का संकेत हैं कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं।

पुलिस कार्रवाई और आंदोलन को लेकर जताई चिंता

सभा के दौरान वक्ताओं ने दिल्ली में आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को रोकने और आंदोलन को दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। वक्ताओं ने कहा कि यदि छात्र और युवा अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने आंदोलनकारियों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पेपर लीक और बेरोजगारी को बताया गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा

सभा में कहा गया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक के मामलों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसका सबसे अधिक नुकसान उन छात्रों को उठाना पड़ता है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद वर्षों तक कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समयबद्ध परीक्षा, निष्पक्ष परिणाम और शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी युवाओं में निराशा और असंतोष को बढ़ा रही है, जिसे गंभीरता से संबोधित किया जाना चाहिए।

आंदोलन जारी रखने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की अपील

सभा के अंत में साझा नागरिक मंच, जमशेदपुर की ओर से आंदोलन की मांगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया गया। मंच के प्रतिनिधियों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए सरकार से छात्रों और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनने की अपील की। साथ ही देशभर के छात्रों, युवाओं और जागरूक नागरिकों से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी आवाज बुलंद रखने का आह्वान किया गया। मंच का कहना था कि शिक्षा, रोजगार और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था जैसे मुद्दे केवल छात्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज और देश के भविष्य से जुड़े विषय हैं। सभा के समापन पर वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनभागीदारी और शांतिपूर्ण संवाद ही समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है तथा शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए ठोस और पारदर्शी कदम उठाए जाने चाहिए।

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