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झारखंड में आदिवासी उद्यमियों को बढ़ावा देने की पहल: जियाडा से ट्राइबल चेंबर की महत्वपूर्ण वार्ता, भूमि आवंटन नीति में संशोधन की मांग

Ranchi News: झारखंड में आदिवासी उद्यमियों को औद्योगिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से ट्राइबल इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (टिक्की), झारखंड चैप्टर के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को रांची में झारखंड इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जियाडा) के प्रबंध निदेशक के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में जमशेदपुर सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आदिवासी उद्यमियों ने भाग लिया और उद्योग स्थापना से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य आदिवासी उद्यमियों के लिए औद्योगिक भूमि आवंटन प्रक्रिया को सरल बनाना तथा नई औद्योगिक नीति में उनके हितों को सुनिश्चित करना था। प्रतिनिधिमंडल ने जियाडा के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे, जिन पर सकारात्मक चर्चा हुई।

औद्योगिक भूमि आवंटन नीति में संशोधन की मांग

बैठक के दौरान ट्राइबल चेंबर ने वर्तमान औद्योगिक भूमि आवंटन नीति में आवश्यक संशोधन करने की मांग की। प्रतिनिधियों का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में आदिवासी उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने में कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भूमि की उपलब्धता, आवंटन प्रक्रिया और वित्तीय बोझ जैसे मुद्दे नए उद्यमियों के लिए बाधा बनते हैं। ट्राइबल चेंबर ने सुझाव दिया कि नई औद्योगिक नीति में आदिवासी समुदाय के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं, ताकि वे भी उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि राज्य के आदिवासी युवाओं में उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

एसटी-एससी उद्यमियों के लिए विशेष आरक्षण पर विचार

बैठक में जियाडा के प्रबंध निदेशक ने ट्राइबल चेंबर की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि राज्य में विकसित किए जा रहे नए औद्योगिक क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) उद्यमियों के लिए कई विशेष सुविधाओं पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि नए औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आवंटन पर 50 प्रतिशत तक की छूट देने, कुछ भूखंडों को आरक्षित रखने तथा आदिवासी उद्यमियों की विभिन्न मांगों को नीति में शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके अलावा विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में छोटे भूखंडों को एसटी-एससी वर्ग के उद्यमियों के लिए आरक्षित करने के प्रस्ताव पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा। यह कदम राज्य में सामाजिक और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

औद्योगिक शुल्क में पांच वर्षों तक 50 प्रतिशत छूट की मांग

बैठक के दौरान ट्राइबल चेंबर ने केवल भूमि आवंटन तक ही अपनी मांग सीमित नहीं रखी, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के दौरान लगने वाले विभिन्न शुल्कों में भी राहत देने की मांग उठाई। चेंबर ने प्रस्ताव रखा कि आदिवासी एवं अनुसूचित जाति वर्ग के उद्यमियों को उद्योग स्थापना से जुड़े सभी प्रकार के शुल्कों में अगले पांच वर्षों तक 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाए। उनका तर्क था कि शुरुआती वर्षों में वित्तीय सहायता मिलने से अधिक से अधिक युवा उद्यमिता की ओर आकर्षित होंगे और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। जियाडा के प्रबंध निदेशक ने इस मांग पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रस्ताव का अध्ययन कर उचित निर्णय लिया जाएगा।

बैद्यनाथ मांडी ने जताई उम्मीद

ट्राइबल इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, झारखंड चैप्टर के प्रदेश अध्यक्ष बैद्यनाथ मांडी ने बैठक को सार्थक और सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि जियाडा के साथ हुई वार्ता में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति और सकारात्मक चर्चा हुई है। बैद्यनाथ मांडी ने कहा कि ट्राइबल चेंबर लंबे समय से आदिवासी उद्यमियों के लिए अलग और प्रभावी औद्योगिक नीति की मांग करता रहा है। राज्य सरकार और जियाडा यदि इन सुझावों को नई नीति में शामिल करती है, तो इससे आदिवासी समाज के युवाओं को उद्योग क्षेत्र में आगे बढ़ने का बड़ा अवसर मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जियाडा अपनी नई औद्योगिक नीति में ट्राइबल चेंबर द्वारा दिए गए अधिकांश सुझावों और मांगों को स्थान देगा।

कई प्रमुख उद्यमी रहे उपस्थित

इस महत्वपूर्ण बैठक में ट्राइबल चेंबर से जुड़े कई प्रमुख उद्यमी और पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनमें मनोज लकड़ा, बसंत तिर्की, राज मार्शल मार्डी, सौरभ बेसरा, रवि राज मुर्मू, अनमोल पिंगुवा, विजय गोंड, शेखर करवा और जोसेफ कांडिर सहित अन्य सदस्य शामिल थे।

बैठक के दौरान सभी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए और आदिवासी उद्यमियों को उद्योग स्थापना में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं से जियाडा प्रबंधन को अवगत कराया। सामूहिक रूप से प्रस्तुत किए गए सुझावों को जियाडा ने गंभीरता से सुना और भविष्य की नीति निर्माण प्रक्रिया में शामिल करने का आश्वासन दिया।

इस वार्ता को झारखंड में आदिवासी उद्यमिता को नई दिशा देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि प्रस्तावित रियायतें और आरक्षण संबंधी मांगें नई औद्योगिक नीति में शामिल होती हैं, तो इससे राज्य के हजारों आदिवासी युवाओं और उद्यमियों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।

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