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टाटानगर-बादामपहाड़ रेलखंड दोहरीकरण पर ब्रेक: रेलवे ने फिलहाल रोकी योजना, यात्रियों और जनप्रतिनिधियों को झटका

Jamshedpur News: जमशेदपुर और ओडिशा के कई इलाकों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण टाटानगर-बादामपहाड़ रेलखंड के दोहरीकरण (डबल लाइन) को लेकर लंबे समय से उठ रही मांग पर फिलहाल विराम लग गया है। दक्षिण पूर्व रेलवे जोन सलाहकार समिति की कोलकाता में आयोजित बैठक में इस मुद्दे पर रेलवे ने अपना स्पष्ट पक्ष रखा। समिति सदस्य अरुण जोशी द्वारा इस विषय को उठाए जाने के बाद रेलवे अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में इस रेलखंड पर डबल लाइन परियोजना को प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं किया गया है। रेलवे के इस फैसले से क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, यात्रियों और स्थानीय लोगों को निराशा हाथ लगी है, क्योंकि लंबे समय से इस परियोजना को क्षेत्रीय विकास और बेहतर यातायात सुविधा से जोड़कर देखा जा रहा था।

रेलवे ने क्यों रोका दोहरीकरण का प्रस्ताव


बैठक में रेलवे अधिकारियों ने बताया कि टाटानगर–बादामपहाड़ रेलखंड की मौजूदा लाइन क्षमता का उपयोग अभी लगभग 58 प्रतिशत ही हो रहा है। रेलवे के अनुसार किसी भी रेलखंड के दोहरीकरण का निर्णय आमतौर पर तब लिया जाता है जब मौजूदा लाइन अपनी क्षमता के करीब पहुंच जाए और ट्रेनों के संचालन में दबाव बढ़ने लगे।अधिकारियों का कहना है कि अभी इस रूट पर उपलब्ध ट्रैक वर्तमान ट्रेनों के संचालन के लिए पर्याप्त है। इसी वजह से रेलवे को तत्काल डबल लाइन की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है। रेलवे के अनुसार सीमित संसाधनों और प्राथमिकताओं को देखते हुए उन परियोजनाओं को पहले आगे बढ़ाया जा रहा है जहां यातायात का दबाव अधिक है।

वर्षों से उठती रही है दोहरीकरण की मांग


हालांकि इस परियोजना की मांग नई नहीं है। पिछले कई वर्षों से जनप्रतिनिधि और क्षेत्रीय संगठन लगातार टाटानगर–बादामपहाड़ रेलखंड के दोहरीकरण की मांग करते रहे हैं। जानकारी के अनुसार रेलवे ने पहले इस परियोजना के लिए सर्वे भी कराया था। वर्ष 2019 में झारखंड की तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने भी इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के समक्ष रखा था। वहीं जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो वर्ष 2017 से लगातार संसद और अन्य मंचों पर इस परियोजना को उठाते रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का मानना रहा है कि इस परियोजना के लागू होने से आने वाले समय में रेल यातायात और औद्योगिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

स्थानीय लोगों को दोहरीकरण से क्या उम्मीद थी


ओडिशा के मयूरभंज, बड़ामपहाड़, ब्योरंग तथा रायरंगपुर क्षेत्र के यात्रियों और व्यापारिक वर्ग का मानना है कि यदि इस रेलखंड का दोहरीकरण होता तो ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का रास्ता खुलता। स्थानीय लोगों का तर्क है कि इससे यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का संचालन भी अधिक सुगम हो सकता था। क्षेत्र में उद्योग, रोजगार और व्यापार को गति मिलने की संभावना भी जताई जा रही थी। इसके अलावा रेल नेटवर्क मजबूत होने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को बड़े शहरों से बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद थी, जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आ सकती थी।

मौजूदा समय में किन ट्रेनों का हो रहा संचालन


वर्तमान में टाटानगर और राउरकेला के बीच बादामपहाड़ होकर प्रतिदिन चार जोड़ी मेमू ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा शालीमार–बादामपहाड़ तथा बादामपहाड़–राउरकेला के बीच साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेनों की सुविधा भी उपलब्ध है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान ट्रेनों के संचालन में किसी तरह की क्षमता संबंधी बड़ी चुनौती नहीं है। इसी कारण अभी इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रैक निर्माण को आवश्यक नहीं माना गया। हालांकि यात्रियों का मानना है कि भविष्य की मांग को देखते हुए इस परियोजना पर पुनर्विचार होना चाहिए।

भविष्य में फिर खुल सकता है परियोजना का रास्ता


रेलवे ने भले ही अभी दोहरीकरण को प्राथमिकता में शामिल नहीं किया है, लेकिन भविष्य में यात्री संख्या, माल परिवहन और औद्योगिक विकास बढ़ने की स्थिति में इस परियोजना पर फिर से विचार किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वी भारत में बढ़ती कनेक्टिविटी और औद्योगिक विस्तार को देखते हुए आने वाले वर्षों में इस रेलखंड की उपयोगिता और बढ़ सकती है। ऐसे में यदि लाइन क्षमता में वृद्धि होती है तो दोहरीकरण का प्रस्ताव दोबारा चर्चा में आ सकता है।फिलहाल रेलवे के फैसले ने क्षेत्र की उम्मीदों को झटका जरूर दिया है, लेकिन इस परियोजना की मांग आने वाले समय में फिर जोर पकड़ सकती है।

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