Jamshedpur News: जमशेदपुर के साकची स्थित बिरसा चौक में बुधवार 28 मई 2026 को समस्त आदिवासी समाज के बैनर तले बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, अर्जुन मुंडा एवं बाबूलाल मरांडी का पुतला दहन कर आदिवासी समाज ने अपना आक्रोश व्यक्त किया। बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और संस्कृति के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान पूरे क्षेत्र में “हम आदिवासी हैं, वनवासी नहीं” और “सरना धर्म का सम्मान करो” जैसे नारों की गूंज सुनाई देती रही।

“वनवासी” शब्द को लेकर भड़का आक्रोश

आदिवासी समाज के लोगों ने बताया कि 24 मई 2026 को दिल्ली में आयोजित जनजाति संस्कृति समागम कार्यक्रम में आदिवासियों को “हिन्दू” एवं “वनवासी” कहकर संबोधित किया गया था। इसी बयान के बाद पूरे झारखंड सहित देशभर के विभिन्न आदिवासी संगठनों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी समुदाय की अपनी अलग धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक पहचान है, जिसे किसी अन्य पहचान में समाहित करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज की मूल पहचान को कमजोर करने की कोशिश लगातार की जा रही है।


सरना धर्म कोड की मांग को लेकर उठी आवाज

विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने सरना धर्म कोड की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। आदिवासी समाज के लोगों ने कहा कि लंबे समय से सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग की जा रही है, लेकिन केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है और उनकी धार्मिक परंपराएं सदियों पुरानी हैं। ऐसे में उन्हें किसी अन्य धर्म की श्रेणी में रखना उनके अस्तित्व और अस्मिता पर हमला है। समाज के युवाओं ने कहा कि जब तक सरना धर्म कोड लागू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

आदिवासी समाज को मिटाने का प्रयास बरदाश्त नहीं होगा : दुर्गाचरण मुर्मू 

मांझी परगाना महाल के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गा चरण मुर्मू ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान बचाने के लिए हमेशा संघर्ष करता आया है। उन्होंने कहा कि “वनवासी” शब्द आदिवासी समाज की असली पहचान को मिटाने का प्रयास है। आदिवासी केवल जंगल में रहने वाला समुदाय नहीं बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति, भाषा और परंपरा वाला मूल निवासी समाज है। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि सरना धर्म कोड लागू कराने और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए गांव-गांव तक आंदोलन को मजबूत करना होगा। उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा और संस्कृति बचाने का भी आह्वान किया।


आदिवासी को वनवासी बताना गलत: दिनकर कच्छप 

आदिवासी समाज के सक्रिय कार्यकर्ता दिनकर कच्छप ने कहा कि आदिवासी समाज को हिन्दू या वनवासी बताना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की पहचान संविधान और इतिहास दोनों में अलग रूप से दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें आदिवासी समाज को भ्रमित कर उनकी एकता तोड़ना चाहती हैं। दिनकर कच्छप ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पूरे राज्य में बड़े स्तर पर आंदोलन चलाया जाएगा और सरना धर्म कोड की मांग को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाएगा।

अस्मिता पर किसी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं:उपेंद्र बानरा 

सभा को संबोधित करते हुए उपेंद्र बानरा ने कहा कि आदिवासी समाज को बार-बार अपनी पहचान साबित करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है और उनकी संस्कृति प्रकृति से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि “वनवासी” शब्द का इस्तेमाल आदिवासी समाज की वास्तविक पहचान को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। उपेंद्र बानरा ने कहा कि समाज अब जागरूक हो चुका है और अपनी अस्मिता पर किसी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने युवाओं से सामाजिक एकता बनाए रखने और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की।


सरना धर्म कोड अविलंब लागू करो:सन्नी सामद 

युवा सामाजिक कार्यकर्ता सन्नी समाद ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज के युवाओं को अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल शब्दों की नहीं बल्कि अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को उसकी संस्कृति, परंपरा और धर्म से अलग करने की कोशिश लगातार हो रही है, जिसका संगठित विरोध जरूरी है। सन्नी समाद ने कहा कि सरना धर्म कोड लागू होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया और जनजागरण के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की अपील की।

बड़ी संख्या में मौजूद रहे समाज के लोग

इस विरोध प्रदर्शन में मांझी परगाना महाल से दुर्गा चरण मुर्मू, दिनकर कच्छप, उपेंद्र बानरा, सन्नी समाद, बाबू कुजूर, दुर्गी समाद, हिताई सुंडी, अखिल कच्छप, सुनील मुर्मू, पीठों सैंडिल, महाबीर कर्मकार, कृष्णा सोरेन, गोरा समद, स्माइल हांसदा, चुन्नू कुटिया, साहिल नाग, साहिल सैंडिल, कुंदन बांद्रा, ऋषिव कुटिया, अमन पात्रों, सूरज बेसरा, परवीन पूर्ति, अनमोल पात्रों, अमन कुमार, अमर स्वयंन, अजय जमुदा, विशाल बास्के समेत बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी लोगों ने आदिवासी समाज की पहचान और सरना धर्म कोड की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।