दिशोम गुरु के नाम पर सड़क और प्रतिमा की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने सबसे प्रमुख मांग के रूप में साकची स्थित दिशोम गुरु मेमोरियल लाइब्रेरी तक जाने वाले मार्ग का नाम “स्ट्रेट माइल रोड” से बदलकर “दिशोम गुरु लाइब्रेरी पथ” करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही, साकची समाहरणालय के पास एवं जुबली पार्क गेट के सामने गोलचक्कर पर पद्म भूषण से सम्मानित शिबू सोरेन (दिशोम गुरु) की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग की गई। नेताओं का मानना है कि इससे क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और आदिवासी गौरव को सम्मान मिलेगा।
सरकारी कर्मचारियों व आम जनता को सुविधाएं देने की मांग
ज्ञापन में समाहरणालय परिसर या उसके आसपास एक सरकारी पब्लिक स्टाफ कैंटीन खोलने की भी मांग रखी गई। इससे कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों को भी सस्ती और स्वच्छ भोजन सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा, सभी प्रखंड कार्यालयों, सरकारी दफ्तरों और बाजारों में मुख्यमंत्री दाल-भात योजना के अंतर्गत कैंटीन और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई
दिव्यांगों के लिए विशेष पहल की जरूरत
प्रतिनिधिमंडल ने विकलांग एवं शारीरिक रूप से अक्षम नागरिकों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उपायुक्त कार्यालय में लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा गया कि इससे दिव्यांग व्यक्तियों को सरकारी सेवाओं तक पहुंचने में बड़ी राहत मिलेगी। यह पहल समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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झारखंड आंदोलनकारियों के सम्मान का प्रस्ताव
झारखंड आंदोलन में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों के सम्मान को लेकर भी एक अहम सुझाव दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि आंदोलनकारी प्रमाण पत्रों का वितरण प्रखंड स्तर पर न होकर जिला मुख्यालय स्तर पर किया जाए। इसके लिए एक सम्मान समारोह आयोजित किया जाए, जिसमें उपायुक्त या अन्य वरिष्ठ अधिकारी अपने हाथों से प्रमाण पत्र प्रदान करें। इससे आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ेगा और उन्हें उचित सम्मान मिलेगा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे कई प्रमुख नेता
इस ज्ञापन को सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में झामुमो के कई वरिष्ठ और सक्रिय सदस्य शामिल थे। इनमें प्रमोद लाल, शेख बदरुद्दीन, खुद्दु उरांव, लालटू महतो, उमानाथ झा, सागेन पूर्ति, अभय पाण्डेय, प्रभात कुमार, सरोज महापात्र, गुरमीत सिंह गिल, फैयाज खान, प्रकाश चंद्र झा, उमेश गिरी, चंदन महतो, चंदन लाल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में इन मांगों को जनहित में आवश्यक बताया।
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