गुवा गोलीकांड के शहीदों को टीएसी सदस्य जोसाई मार्डी ने दी श्रद्धांजलि

Guwa golikand : गुवा गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में टीएसी सदस्य जोसाई मार्डी भी पहुंचे. उन्होंने शहीदों की स्मृति में श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि गुवा गोलीकांड झारखंड के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और पीड़ादायक अध्याय है. शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा संघर्ष, अधिकार और अपने समाज के प्रति जिम्मेदारी की प्रेरणा देता रहेगा.शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए कोल्हान समेत झारखंड और उड़ीसा के विभिन्न जिलों से सैकड़ों को संख्या में जनप्रतिनिधि, नेता, महिला-पुरुष व ग्रामीण पहुंचे थे।

शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित कर किया नमन

कार्यक्रम में पहुंचने के बाद जोसाई मार्डी ने गुवा गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने अधिकारों और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए अपना जीवन बलिदान किया, उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता. शहीदों की स्मृति को जीवित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.उन्होंने कहा कि शहीदों के बलिदान को केवल एक स्मृति दिवस तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनके संघर्ष और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है. इससे युवा अपने इतिहास और सामाजिक अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे.

झारखंड के इतिहास में गुवा गोलीकांड की अहम जगह

गुवा गोलीकांड को झारखंड के आंदोलनकारी इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में माना जाता है. इस घटना ने आदिवासी समाज के बीच अपने अधिकारों, पहचान और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को लेकर संघर्ष की भावना को और मजबूत किया। हर वर्ष शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर उनके योगदान को याद किया जाता है.जोसाई मार्डी ने कहा कि इतिहास में दर्ज ऐसे संघर्ष समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं. उन्होंने कहा कि शहीदों की कुर्बानी ने समाज को यह संदेश दिया कि अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाना जरूरी है.

नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ना जरूरी

टीएसी सदस्य ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को झारखंड के आंदोलन और शहीदों के संघर्ष की जानकारी मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल किताबों में इतिहास पढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर शहीदों की स्मृति और उनके संघर्ष से युवाओं को जोड़ना भी जरूरी है.उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन झारखंड की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. इन संसाधनों और परंपराओं के संरक्षण के लिए समाज को जागरूक रहना होगा. शहीदों के संघर्ष से प्रेरणा लेकर सामाजिक एकजुटता को मजबूत किया जा सकता है.

शहीदों की स्मृति हमेशा रहेगी अमर

आदिवासी छात्र नेता इंदर हेंब्रम ने कहा कि गुवा गोलीकांड के शहीदों को समाज हमेशा याद करेगा. उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा. उन्होंने शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सपनों और संघर्षों को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी.श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शहीदों की स्मृति को नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया गया. लोगों ने कहा कि झारखंड के इतिहास में गुवा के शहीदों का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा. कार्यक्रम ने एक बार फिर समाज को अपने इतिहास, अधिकार और सांस्कृतिक पहचान के प्रति सजग रहने का संदेश दिया.