महाराष्ट्र में आदिवासी राष्ट्रीय महासम्मेलन संपन्न, सूर्यसिंह बेसरा बने आदिवासी धर्मगुरू

Jamshedpur News : महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के चिमूर में आयोजित आदिवासी राष्ट्रीय महासम्मेलन में झारखंड के पूर्व विधायक और ‘दरबार’ के संस्थापक सूर्यसिंह बेसरा को सर्वसम्मति से ‘आदिवासी धर्मगुरू’ घोषित किया गया। विश्वनाथ वाकड़े की अध्यक्षता में आयोजित इस महासम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक अधिकार, राजनीतिक भागीदारी और राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गयी।

विभिन्न राज्यों से पहुंचे एक हजार से अधिक प्रतिनिधि

महासम्मेलन में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और झारखंड समेत कई राज्यों से एक हजार से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्य अतिथि के रूप में सूर्यसिंह बेसरा मौजूद रहे, जबकि प्रेम शाही मुंडा और भुवन सिंह कोर्राम विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की भाषाओं, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्थाओं में विविधता है, लेकिन उनके कई सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकार समान हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर संवाद और समन्वय को मजबूत करने की जरूरत है।

पांच संगठनों को राष्ट्रीय पुनर्जागरण की जिम्मेदारी

सम्मेलन में आदिवासी समाज की विविधता में एकता को मजबूत करने और राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्जागरण अभियान को आगे बढ़ाने के लिए पांच प्रमुख संगठनों को जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया गया। इनमें ‘दरबार’, ‘को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ आदिवासी पॉलिटिकल पार्टीज’, ‘नेशनल ट्राइबल यूथ एंड स्टूडेंट्स फेडरेशन’, ‘नेशनल ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल’ और ‘नेशनल ट्राइबल विमेंस ऑर्गनाइजेशन’ शामिल हैं।

इन संगठनों के माध्यम से देशभर के आदिवासी समाज को एक मंच पर लाने, पारंपरिक संस्कृति और पहचान को संरक्षित करने तथा सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर समन्वित तरीके से काम करने की योजना है। सम्मेलन में संगठनात्मक विस्तार और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई।

दिसंबर में दिल्ली में राष्ट्रीय आदिवासी अधिवेशन

महासम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि सम्मेलन में पारित प्रस्तावों के प्रारूप और संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप देने के लिए दिसंबर में नई दिल्ली में राष्ट्रीय आदिवासी अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। प्रस्तावित अधिवेशन में देश के सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों से प्रतिनिधियों की संयोजित मंडली के मनोनयन की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जाएगी।

दिल्ली में होने वाले अधिवेशन के माध्यम से आदिवासी समाज से जुड़े प्रमुख मुद्दों और मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर रखने की तैयारी की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों के आदिवासी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाना और सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक विषयों पर साझा रणनीति तैयार करना है। महाराष्ट्र में संपन्न महासम्मेलन को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।