Jamshedpur News : सीतारामडेरा स्थित उरांव समाज भवन प्रांगण में प्रकृति पर्व करम के अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रांची से पहुंचे नागपुरी लोक कलाकारों ने पारंपरिक गीत-संगीत की प्रस्तुति दी। मांदर की थाप और नागपुरी गीतों की गूंज से पूरा परिसर देर रात तक गुलजार रहा। कलाकारों की प्रस्तुति पर युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी झूमते नजर आये। कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में उत्सव और सांस्कृतिक उल्लास का माहौल बना रहा।
नागपुरी गीत-संगीत ने बांधा समां
सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण रांची से आये लोक कलाकारों की टोली रही। कलाकारों ने पारंपरिक और आधुनिक नागपुरी गीतों की प्रस्तुति से लोगों का मनोरंजन किया। करम पर्व की परंपरा और प्रकृति से जुड़े लोकगीतों के साथ ढोल-मांदर की ताल ने माहौल को खास बना दिया। जैसे-जैसे रात बढ़ती गयी, संगीत का उत्साह भी बढ़ता गया। दर्शक कलाकारों के साथ गीतों की धुन पर थिरकते रहे।
पारंपरिक संस्कृति के रंग में रंगा परिसर
करम पर्व की सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़े गीतों और लोकनृत्य ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया। एक ही मंच पर परंपरा और आधुनिक नागपुरी संगीत की झलक देखने को मिली। समाज के अलग-अलग आयु वर्ग के लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। युवाओं ने जहां उत्साह के साथ नृत्य में हिस्सा लिया, वहीं बुजुर्गों ने पारंपरिक गीत-संगीत का आनंद लिया। आयोजन के माध्यम से उरांव समाज की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का संदेश भी दिया गया।
खेल प्रतियोगिताओं के विजेता हुए सम्मानित
सांस्कृतिक कार्यक्रम से पहले करम पर्व के अवसर पर आयोजित विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथियों ने विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार और मेडल प्रदान किये। सम्मान मिलने पर बच्चों और युवाओं में उत्साह देखने को मिला। राकेश हेंब्रम ने कहा कि इस तरह के आयोजन पारंपरिक संस्कृति और लोक कला को बढ़ावा देने के साथ युवाओं में आपसी भाईचारा और खेल भावना विकसित करने में भी सहायक होते हैं।
अतिथियों ने दी करम पर्व की शुभकामनाएं
कार्यक्रम में समाजसेवी कृष्ण मुरारी गुप्ता, सीतारामडेरा थाना प्रभारी आनंद कुमार मिश्रा, गणेश राव, राकेश उरांव, बुधराम खलखो, शिवा राम, मनीष राम, प्रकाश कोया, सावना लकड़ा, सोमा कोया, जगत कुजूर और बुधु खलखो समेत अन्य अतिथि उपस्थित रहे। अतिथियों ने उरांव समाज के लोगों को करम पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक लोककला को आगे बढ़ाने के प्रयास की सराहना की। आयोजन देर रात तक चला और लोगों ने उत्साह के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
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