Jamshedpur News : पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलधार बारिश और तूफानी हवाएं गरीबों के लिए काल बनकर आयी हैं. जिनके लिए एक-एक पाई जोड़कर घर बनाना ही जिंदगी का सबसे बड़ा सपना होता है, उनके सपनों पर कुदरत ने पानी फेर दिया है. न घर के अंदर सुकून है और न बाहर कोई काम-काज. लगातार बरसते पानी ने दिहाड़ी मजदूरों के हाथों से उनका रोजी-रोजगार भी छीन लिया है. बागबेड़ा के सोमायझोपड़ी कोचाटोला की रहने वाली जानकी पूर्ति के लिए गुरुवार की रात जिंदगी की सबसे डरावनी रात बन गयी. गुरुवार की देर रात करीब 2:30 बजे, जब पूरा इलाका बारिश की बूंदों की थपकी के बीच सोया हुआ था, तब जानकी पूर्ति के कच्चे मकान पर कुदरत का कहर टूटा. लगातार बारिश के कारण नम हो चुकी मिट्टी की दीवारें तेज हवा का थपेड़ा सहन न कर सकीं और देखते ही देखते पूरा घर ताश के पत्तों की तरह ढह गया. अचानक हुए इस हादसे से चीख-पुकार मच गई. गनीमत यह रही कि जानकी पूर्ति और उनका परिवार किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल आया और कोई अनहोनी होने से बच गई.
मलबे में दबा सालों का पसीना, बिखर गये जिंदगी के अरमान
जान-माल का बड़ा नुकसान भले ही टल गया, लेकिन बरसों की खून-पसीने की कमाई पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील हो गई. मेहनत-मजदूरी करके एक-एक रुपया जोड़कर खरीदे गए घर के कीमती सामान-टीवी, फ्रिज, पंखा और रसोई के बर्तन-सब उस गिरे हुए घर के मलबे में दबकर चकनाचूर हो गये. जिस घर को सजाने और बनाने में सालों बीत गए थे, उसे हवा और पानी की बेदर्दी ने चंद सेकंड में तबाह कर दिया. जानकी पूर्ति अपनी बिखरी हुई गृहस्थी को देखकर सिर्फ फफक कर रो ही पा रही हैं.
दूसरों की छत बनी सहारा, बेबस निगाहों से आसमान की ओर ताकती जानकी
इस मूसलधार बारिश में सिर से छत छिन जाने के बाद अब जानकी पूर्ति का परिवार बेघर हो चुका है. अपनों के आंसुओं और बच्चों की बेबसी के बीच अब वे पड़ोसियों की छत के नीचे शरण लेने को विवश हैं. जिन हाथों में कभी अपनी गृहस्थी संभालने का गर्व था, आज वही हाथ दूसरों के रहमोकरम की उम्मीद में हैं. भारी बारिश के बीच अपनी छिन चुकी छत और भविष्य की चिंता में डूबी जानकी की आंखें बस आसमान और मलबे को टटोल रही हैं.
मदद का मिला आश्वासन, सरकारी सहयोग की बंधी आस
घटना की जानकारी मिलते ही दक्षिण घाघीडीह पंचायत के मुखिया भरत जोरा और झामुमो नेता नरेश सोय पीड़ित परिवार के घर पहुंचे. उन्होंने मौके पर जाकर बारिश और तेज हवा से हुए नुकसान का जायजा लिया. जानकी पूर्ति की दुखद स्थिति को देखते हुए उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन को तुरंत पत्राचार कर हर संभव सरकारी मुआवजा और सहयोग दिलाया जाएगा, ताकि इस गरीब परिवार का उजड़ा हुआ आशियाना फिर से बस सके.
रोजी-रोजी ठप, कुदरत की मार से भविष्य पर मंडराया संकट
जानकी पूर्ति रोज-कुआं खोदकर पानी पीने वाली दैनिक मजदूर हैं. वे रोज कमाती हैं, तब जाकर उनके परिवार का चूल्हा जलता है. लेकिन लगातार हो रही तबाही की बारिश ने उनका रोजगार पूरी तरह ठप कर दिया है. एक तरफ पेट भरने की चुनौती और दूसरी तरफ उजड़े घर को फिर से खड़ा करने की बड़ी जिम्मेदारी-इस बारिश ने उनके सामने दुखों का पहाड़ खड़ा कर दिया है.
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