मरांग बुरु मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग सख्त, पर्यावरण मंत्रालय से 15 दिन में जवाब तलब

जमशेदपुर: मरांग बुरु (पारसनाथ पहाड़) से जुड़े वन एवं पर्यावरण संबंधी मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग ने वन, जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण मंत्रालय से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है. मामला मंत्रालय के 5 जनवरी 2023 के आदेश (F.No. 11-584/2014-WL) से जुड़ा है. इस आदेश को लेकर मरांग बुरु फाउंडेशन, पीरटांड़ की ओर से आयोग में शिकायत की गयी थी. संस्था का कहना है कि आदेश के कुछ प्रावधानों से आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकार और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं.

5 जनवरी 2023 के आदेश को लेकर आपत्ति

मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा की ओर से मंगलवार को रांची के बूटी मोड़ स्थित कैंप कार्यालय में आपात बैठक कर आयोग की कार्रवाई की जानकारी दी गयी. मोर्चा के अनुसार, मंत्रालय के 5 जनवरी 2023 के आदेश में पारसनाथ पहाड़ पर मांस-मदिरा की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध सहित कई प्रावधान किये गये हैं. संगठन का आरोप है कि आदेश तैयार करने के दौरान आदिवासी समाज के पारंपरिक धार्मिक अधिकारों और पक्ष को पर्याप्त रूप से सामने नहीं रखा गया. मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में जैन समुदाय की ओर से राज्य सरकार, केंद्र सरकार और न्यायालय के समक्ष एकतरफा तथ्य प्रस्तुत किये गये। हालांकि, ये आरोप संगठन के हैं.

जवाब नहीं मिलने पर आयोग ने भेजा स्मरण पत्र

मरांग बुरु फाउंडेशन, पीरटांड़ की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 30 जनवरी 2025 को संबंधित मंत्रालय से मामले में तथ्य और जवाब मांगा था. संगठन के अनुसार, निर्धारित अवधि में मंत्रालय की ओर से जवाब नहीं मिलने के बाद आयोग ने 7 सितंबर 2026 को दूसरा स्मरण पत्र जारी किया. इसमें मंत्रालय को 15 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है. आयोग की इस कार्रवाई के बाद मरांग बुरु से जुड़े संगठनों ने मामले को लेकर अपनी गतिविधियां तेज करने की बात कही है.

4-5 नवंबर को मधुबन में धर्म महासम्मेलन

मरांग बुरु संस्थान और मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा ने 4 और 5 नवंबर 2026 को मधुबन में विशाल धर्म महासम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है. संगठन के अनुसार, सम्मेलन में झारखंड के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों के साथ बिहार, बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और असम से आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है. पड़ोसी देशों नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के आदिवासी प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करने की बात कही गयी है. संगठन का कहना है कि सम्मेलन में मरांग बुरु की धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यता, पारंपरिक अधिकार और 5 जनवरी 2023 के आदेश से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति तय की जायेगी.बैठक में मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा, महासचिव हिरालाल माझी, केंद्रीय प्रवक्ता दुर्गा चरन मुर्मू, कोषाध्यक्ष सोमय टुडू, केंद्रीय सदस्य सुरेंद्र टुडू समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे.