Jamshedpur News : विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को आदिवासी एकता मंच के तत्वावधान में जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी अधिकारों की मांग को लेकर भव्य मोटरसाइकिल सह पैदल रैली निकाली गयी। रैली में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के युवा, महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, नारों और उत्साह के साथ निकली रैली के दौरान आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाये गये। चांदनी चौक (गुरमा) से शुरू हुई रैली विभिन्न मार्गों से होते हुए साकची पहुंची, जहां भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गयी। इसके बाद रैली मानगो होते हुए बालीगुमा पहुंची, जहां विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।
चांदनी चौक से शुरू हुई अधिकार यात्रा, साकची में बिरसा मुंडा को नमन
अधिकार यात्रा के रूप में रैली की शुरुआत चांदनी चौक (गुरमा) से हुई। रैली फूलो-झानो चौक, सिरीघुटू, बाबा तिलका मांझी चौक (डिमना) और मानगो होते हुए साकची स्थित भगवान बिरसा चौक पहुंची। रैली में शामिल लोग पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ चल रहे थे। इस दौरान आदिवासी एकता, अधिकार और जल-जंगल-जमीन की रक्षा से जुड़े नारे लगाये गये। साकची पहुंचने पर रैली में शामिल लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद रैली पुन: मानगो होते हुए बालीगुमा पहुंची। यहां रैली एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गयी।
जल-जंगल-जमीन पर पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग
बालीगुमा में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मंच के नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज का अस्तित्व उसकी जमीन, जंगल, जलस्रोत और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इन संसाधनों पर आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है। आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री और गैरकानूनी हस्तांतरण पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की गयी। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नाम पर विस्थापन और जमीन से बेदखली की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। ग्रामसभा की सहमति और अधिकारों को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में स्वशासन की व्यवस्था को मजबूत करने तथा ग्रामसभा को अधिक अधिकार देने की भी मांग रखी।
पांचवीं-छठी अनुसूची और पेसा कानून पूरी तरह लागू करने की मांग
जनसभा में संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के प्रावधानों का पूर्ण पालन करने की मांग उठी। वक्ताओं ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामसभा को अपने क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों, विकास योजनाओं और स्थानीय मामलों में निर्णय लेने का अधिकार मिल सके। इसके साथ ही आदिवासी युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रवृत्ति और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की मांग की गयी। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़कर ही समाज को मजबूत बनाया जा सकता है। आदिवासी महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा उनके संवैधानिक अधिकारों की गारंटी की मांग भी जनसभा में प्रमुखता से उठायी गयी।
भाषा-संस्कृति और सरना धर्म कोड को मान्यता देने की मांग
जनसभा में आदिवासी भाषाओं, संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है। इनके संरक्षण के लिए ठोस पहल जरूरी है। मंच की ओर से सरना धर्म अथवा आदिवासी धार्मिक पहचान को अलग से संवैधानिक मान्यता देने की मांग भी रखी गयी। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान मिलना चाहिए।
एकजुटता के साथ अधिकारों के लिए आंदोलन जारी रखने का संकल्प
रैली और जनसभा का नेतृत्व आदिवासी एकता मंच के अध्यक्ष दीनबंधु सिंह सहित संगठन के पदाधिकारियों ने किया। मौके पर छोटू सोरेन, मंगल टुडू, राजाराम मुर्मू, जर्मन मार्डी, शिवानी मार्डी, सुनीता मुर्मू, पर्वत किस्कु, मुन्ना सबर, विजय सोय, शशि सिंह सरदार, धनंजय सिंह सरदार, राकेश मुर्मू, दीपक मुर्मू, सारजू बास्के, गुरूपदो हेंब्रम, घासी राम सिंह, धनंजय सिंह, जैकब किस्कू, डेमका सोय समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग और कार्यकर्ता उपस्थित थे। सभा के अंत में आदिवासी समाज की एकजुटता कायम रखने और अधिकारों की प्राप्ति तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया गया। आयोजकों ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, शिक्षा, रोजगार, संस्कृति और ग्रामसभा के अधिकारों को लेकर समाज को संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
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