Jamshedpur News : परसुडीह क्षेत्र की गदड़ा पंचायत स्थित फुटबॉल मैदान में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। झारखंड आंदोलनकारी नेता जेना जामुदा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान खरसावां गोलीकांड के शहीदों की बेदी और वीर पोटो हो की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर तथा धूप दिखाकर श्रद्धांजलि दी गयी। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के अधिकार, संस्कृति, पहचान और सामाजिक विकास को लेकर चर्चा की गयी। वक्ताओं ने समाज के लोगों से एकजुट होकर शिक्षा और विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
खरसावां गोलीकांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत खरसावां गोलीकांड के शहीदों की बेदी पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने शहीदों को याद करते हुए पुष्प अर्पित किये और धूप दिखाकर नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड के इतिहास और आदिवासी समाज के संघर्ष में खरसावां के शहीदों का योगदान महत्वपूर्ण है। उनके बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी समाज की है।
उन्होंने कहा कि शहीदों के संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेकर समाज को अपने अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए संगठित होना चाहिए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने शहीदों के आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
वीर पोटो हो की प्रतिमा पर भी किया माल्यार्पण
कार्यक्रम के दौरान वीर पोटो हो की प्रतिमा पर भी पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी। उपस्थित लोगों ने उन्हें आदिवासी समाज के संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए याद किया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज के इतिहास में ऐसे अनेक वीरों का योगदान रहा है, जिन्होंने अपनी जमीन, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष किया। कार्यक्रम में युवाओं से इतिहास और समाज के महापुरुषों के संघर्ष को समझने तथा आने वाली पीढ़ियों तक उनके विचारों को पहुंचाने की अपील की गयी। वक्ताओं ने कहा कि समाज की नई पीढ़ी को अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना जरूरी है।
अधिकार, संस्कृति और पहचान की रक्षा का संकल्प
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सामाजिक सेवा संघ के अध्यक्ष सह झामुमो नेता राजेश सामंत ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि समाज के अधिकारों, संस्कृति और पहचान की रक्षा का संकल्प लेने का दिन भी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की विशिष्ट संस्कृति, परंपरा, भाषा और सामाजिक व्यवस्था को संरक्षित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में आदिवासी समाज के सामने कई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों का सामना जागरूकता और एकजुटता के साथ ही किया जा सकता है। उन्होंने समाज के लोगों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और सामाजिक हित के मुद्दों पर मिलकर आवाज उठाने का आह्वान किया।
शिक्षा को बताया समाज के विकास का आधार
राजेश सामंत ने कहा कि समाज को शिक्षित और विकसित बनाने के लिए शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना और युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ना समाज के विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने आदिवासी समाज के सभी लोगों से एक मंच पर एकजुट होने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक एकता के बिना समाज की समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं को लेकर सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है। युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर सामाजिक विकास की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकता है।
सामाजिक एकजुटता के साथ आगे बढ़ने का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और पहचान को मजबूत करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के सभी वर्गों को आपसी मतभेद भुलाकर साझा मुद्दों पर एकजुट होना होगा। शहीदों और वीर योद्धाओं के संघर्ष से प्रेरणा लेकर आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए काम करने की जरूरत है। मौके पर ग्राम प्रधान सुखलाल हेंब्रम, शिवलाल लोहरा, छोटे सरदार, नारायण बानरा, चरण पूर्ति, अनीता हेंब्रम, जीरा पूर्ति, जितेंद्र ठाकुर समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की एकजुटता, अधिकारों की रक्षा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
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