शहीद निर्मल महतो को पटमदा-बोड़ाम में श्रद्धांजलि दी गयी

Jamshedpur News : झारखंड आंदोलन के महानायक और वीर शहीद निर्मल महतो के शहादत दिवस के अवसर पर शनिवार को पटमदा और बोड़ाम प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में शहीद स्मारक समिति की ओर से श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने विभिन्न स्थानों पर स्थापित शहीद निर्मल महतो की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके संघर्ष, त्याग, बलिदान और झारखंड के प्रति समर्पण को याद किया गया। कार्यक्रम के दौरान शहीद निर्मल महतो की हत्या की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने और उन्हें आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा देने की मांग भी उठाई गई।

पटमदा-बोड़ाम के कई स्थानों पर प्रतिमाओं पर माल्यार्पण

शहीद स्मारक समिति के सदस्यों ने पटमदा-बोड़ाम क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर वीर शहीद निर्मल महतो की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। पटमदा प्रखंड के पश्चिम बंगाल सीमावर्ती ओड़िया पंचायत के वनडीह मोड़, कमलपुर पंचायत के चड़कपाथर, बोड़ाम के गागीबुरु तथा पटमदा के रंगाटांड़ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने भी कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लोगों ने शहीद निर्मल महतो के चित्र और प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान झारखंड आंदोलन और शहीद निर्मल महतो के योगदान को याद किया गया।

जल-जंगल-जमीन और झारखंड की अस्मिता के लिए किया संघर्ष

मौके पर विश्वनाथ महतो ने कहा कि वीर शहीद निर्मल महतो ने झारखंड के अधिकार, अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और शोषित-वंचित लोगों की आवाज को बुलंद करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि निर्मल महतो की शहादत झारखंड के इतिहास की महत्वपूर्ण विरासत है। उनके संघर्ष ने राज्य के सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन को नई दिशा देने का काम किया। विश्वनाथ महतो ने कहा कि निर्मल महतो का जीवन संघर्ष और त्याग की मिसाल है। उन्होंने जिन मुद्दों को लेकर आवाज उठाई, वे आज भी झारखंड के सामाजिक और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं।

NIA जांच और शहीद का दर्जा देने की मांग

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान समिति की ओर से सरकार से शहीद निर्मल महतो की हत्या की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की मांग की गई। साथ ही उन्हें आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा देने की मांग भी उठाई गई। विश्वनाथ महतो ने कहा कि शहीद निर्मल महतो के योगदान और बलिदान को उचित सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी हत्या से जुड़े तमाम पहलुओं की निष्पक्ष और प्रभावी जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने सरकार से इस दिशा में गंभीर पहल करने की अपील की।

युवाओं से शहीद के विचारों को आगे बढ़ाने का आह्वान

विश्वनाथ महतो ने कहा कि शहीद निर्मल महतो के सपनों का झारखंड बनाने के लिए हर चुनौती का मजबूती से सामना करना होगा। उनके विचार, आदर्श, साहस, संघर्ष और मूल्यों को जीवित रखना प्रत्येक झारखंडी का कर्तव्य है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से शहीद निर्मल महतो के संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेने तथा समाज और राज्य के हित में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शहादत दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि शहीदों के अधूरे सपनों और उनके संघर्षों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन भी है।

उन्होंने कहा कि निर्मल महतो की विचारधारा और झारखंड के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय लोगों ने भी शहीद निर्मल महतो के आदर्शों को आत्मसात करने और उनके सपनों के झारखंड के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में विश्वनाथ महतो, ईशान चंद्र मुर्मू, मणिक चंद्र बेसरा, शिवशंकर महतो, उत्तम महतो, असित महतो, गोपाल गोराई, तपन महतो, जितेंद्र मुर्मू, छुटू महतो, अजय मुर्मू, हरिपद सबर, स्वपन कर्मकार, सुभाष महतो, दीपक महतो, सर्वेश्वर महतो, बंकिम महतो, उदय महतो, सुसीना महतो सहित शहीद स्मारक समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।