सविता महतो ने चांडिल डैम विस्थापितों के पुनर्वास व सिंचाई के मुद्दे को विस में उठाया

 Jamshedpur: विधानसभा के सत्र के दौरान ईचागढ़ की विधायक सबिता महतो ने चांडिल डैम से प्रभावित हजारों विस्थापितों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने 84 मौजा और 116 गांवों के विस्थापित परिवारों के हक-हकूक, पुनर्वास, लंबित मुआवजा और क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं की कमी को लेकर सरकार को घेरा। विधायक ने सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि सालों बीत जाने के बाद भी विस्थापित बुनियादी सुविधाओं और अपने जायज अधिकारों के लिए भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने इन जटिल मुद्दों का शीघ्र और स्थायी समाधान निकालने की पुरजोर मांग की।



विस्थापित गांवों और प्रभावित परिवारों के आधिकारिक आंकड़े 

विधायक द्वारा उठाए गए सवाल के लिखित जवाब में सरकार की ओर से विस्तृत आंकड़े पेश किए गए। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, चांडिल डैम परियोजना के निर्माण से कुल 116 गांव प्रभावित हुए हैं। इनमें से 38 गांव पूर्ण रूप से जलमग्न हो चुके हैं, जबकि 78 गांव आंशिक रूप से प्रभावित हैं। परियोजना के कारण कुल 19,177 परिवारों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा है। प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक इनमें से 15,221 विस्थापित परिवारों की आधिकारिक 'विकास पुस्तिका' तैयार की जा चुकी है, जिसके आधार पर उन्हें सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिया जाना है। 

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मुआवजा और आवास अनुदान भुगतान की वर्तमान स्थिति 

पुनर्वास और वित्तीय सहायता के मुद्दे पर सरकार ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि आवास निर्माण अनुदान के लिए कुल 13,965 पात्र विस्थापित परिवारों का चयन किया गया था। इनमें से 12,852 परिवारों को अनुदान राशि का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, विभागीय प्रक्रियाओं और अन्य कमियों के कारण 1,113 पात्र परिवारों का भुगतान आज भी अधर में लटका हुआ है। विधायक ने इस बात पर चिंता जताई कि कई वर्षों बाद भी सैकड़ों परिवार अपने न्यायसंगत हक और आवास अनुदान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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पुनर्वास स्थलों का अधूरा विकास और बुनियादी सुविधाओं का अभाव 

विस्थापितों को बसाने के लिए चिन्हित किए गए पुनर्वास स्थलों की जमीनी हकीकत पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। सरकार ने स्वीकार किया कि विस्थापितों के लिए कुल 22 पुनर्वास स्थल चिन्हित किए गए थे, लेकिन इनमें से केवल 13 स्थलों पर ही आंशिक रूप से विकास कार्य हो पाए हैं। शेष 9 पुनर्वास स्थल आज भी पूरी तरह अविकसित हैं और वहां सड़क, बिजली, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। इस अधूरे विकास के कारण विस्थापित परिवारों को नए स्थानों पर बसने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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सिंचाई योजनाओं की स्थिति और शिविर लगाकर समाधान की मांग 

क्षेत्र में लिफ्ट सिंचाई की स्थिति पर सरकार ने बताया कि सुवर्णरेखा डैम से 15 किलोमीटर के दायरे में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना से लगभग 50 गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त नीमडीह और कुकड़ू प्रखंड की 14 पंचायतों की 9,336 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करने का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। विधायक सबिता महतो ने सरकार के इन जवाबों पर कड़ा असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग की ढुलमुल नीति के कारण जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में विशेष शिविर (कैंप) आयोजित कर विस्थापितों के लंबित मुआवजा, पुनर्वास और विकास कार्यों को अविलंब पूरा किया जाए।

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