Marangburu News: बोकारो के जेना मोड़ स्थित होटल आर्यन इंटरनेशनल में मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मोर्चा के केंद्रीय पदाधिकारियों एवं विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान मरांग बुरु को आदिवासी समाज, विशेषकर संताल धर्मावलंबियों का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल बताते हुए उसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गरिमा की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन चलाने का संकल्प लिया गया। बैठक में स्पष्ट कहा गया कि मरांग बुरु की धार्मिक आस्था और पहचान पर किसी भी प्रकार का प्रहार समाज स्वीकार नहीं करेगा।
मरांग बुरु की आस्था और पहचान की रक्षा का लिया संकल्प
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि मरांग बुरु केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक जीवन का प्रमुख केंद्र है। यह पीढ़ियों से संताल समाज की आस्था का प्रतीक रहा है। उपस्थित सदस्यों ने कहा कि मरांग बुरु से जुड़े धार्मिक अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए समाज को एकजुट करना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाने और लोगों को संगठित करने पर सहमति बनी।
राज्यभर में बनेगी समिति, गांव-गांव चलेगा जनजागरूकता अभियान
बैठक में निर्णय लिया गया कि मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा जिला, प्रखंड, पंचायत और ग्राम स्तर तक अपनी समितियों का गठन करेगा। इन समितियों के माध्यम से झारखंड के विभिन्न हिस्सों में व्यापक जनसंपर्क और जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि अभियान के दौरान लोगों को मरांग बुरु के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी जाएगी तथा समाज को अपनी विरासत की रक्षा के लिए संगठित किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न जिलों में बैठकें, संवाद कार्यक्रम और प्रचार-प्रसार अभियान भी चलाने का निर्णय लिया गया।
4 और 5 नवंबर को होगा मरांग बुरु धोरोमगढ़ महासम्मेलन
बैठक में केंद्रीय समिति ने आगामी 4 एवं 5 नवंबर 2026 को मरांग बुरु धोरोमगढ़ महासम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की। महासम्मेलन में झारखंड के बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, रामगढ़, हजारीबाग, कोल्हान प्रमंडल तथा संथाल परगना के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में संताल धर्मावलंबियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सांस्कृतिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना जताई गई। इसके अलावा असम, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम सहित नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से भी सैकड़ों प्रतिनिधियों के सम्मेलन में भाग लेने की जानकारी दी गई। मोर्चा का मानना है कि यह महासम्मेलन आदिवासी धार्मिक और सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
केंद्रीय महासचिव ने किया संचालन, कई प्रतिनिधि रहे मौजूद
बैठक का संचालन मोर्चा के केंद्रीय महासचिव हीरालाल मांझी ने किया। उन्होंने सभी जिलों में संगठन को मजबूत बनाने और महासम्मेलन की सफलता के लिए अभी से तैयारी शुरू करने का आह्वान किया। बैठक में सुरेंद्र टुडू, बिंदा सोरेन, रतन लाल माझी, अशोक मुर्मू, रामा मांझी, अमित सोरेन, अंबिका देवी, बबीता कुमारी, रविंद्र हांसदा, अजय हेंब्रम, सोहराय हांसदा, धुनु हांसदा, अजित मुर्मू, जगदीश मरांडी, सहदेव हेंब्रम, के.सी. टुडू, संतोष सोरेन, कृष्ण हांसदा, पंकज मरांडी, रमेश टुडू, मोहन मुर्मू, जगदीश हेंब्रम, रितेश हेंब्रम सहित बड़ी संख्या में केंद्रीय समिति के सदस्य एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में समाज की धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए संगठित होकर कार्य करने का संकल्प दोहराया।
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