खान एवं खनिज विधेयक 2026 के खिलाफ झामुमो का जनजागरण अभियान शुरू, आंदोलन का लिया संकल्प

Jamshedpur News : बागबेड़ा के रानीडीह कोकेटोला अखड़ा में रविवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से खान एवं खनिज विधेयक 2026 के खिलाफ जनजागरण अभियान की शुरुआत की गयी। पारंपरिक ग्रामप्रधान हातु मुंडा गुलाब हेंब्रम की अध्यक्षता में आयोजित परिचर्चा में स्थानीय लोगों को विधेयक के संभावित प्रभावों और इसके विरोध में एकजुट होने की अपील की गयी। कार्यक्रम में जमशेदपुर प्रखंड के पूर्व अध्यक्ष बहादुर किस्कू ने ग्रामीणों को विधेयक के प्रावधानों और झारखंड के हितों पर पड़ने वाले संभावित असर की जानकारी दी।

झामुमो ने विधेयक के खिलाफ शुरू किया जनजागरण अभियान

परिचर्चा को संबोधित करते हुए बहादुर किस्कू ने कहा कि केंद्र सरकार खान एवं खनिज विधेयक 2026 के माध्यम से झारखंड के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां की अर्थव्यवस्था तथा बड़ी आबादी का जीवन प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने ग्रामीणों से विधेयक के संभावित प्रभावों को समझने और अपने अधिकारों के लिए जागरूक होने की अपील की। किस्कू ने कहा कि यदि खनिज संसाधनों से जुड़े निर्णयों में स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी होती है, तो इसका सीधा असर आदिवासी और मूलवासी समाज पर पड़ेगा। इसी कारण गांव-गांव में जनजागरण अभियान चलाने की जरूरत है।

विस्थापन और पलायन को लेकर जतायी चिंता

बहादुर किस्कू ने कहा कि विधेयक लागू होने की स्थिति में झारखंड के लोगों को विस्थापन और पलायन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे राज्य के राजस्व हित भी प्रभावित होंगे और खनिज संसाधनों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा केंद्र के खाते में जाने का खतरा है। उन्होंने इसे झारखंडी जनमानस के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों पर यहां के लोगों का भी अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य आर्थिक रूप से कमजोर होता है, तो इसका असर विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि अब चुप रहने का समय खत्म हो चुका है। अपने हक और अधिकारों की रक्षा के लिए लोगों को एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने कहा कि जनजागरण के माध्यम से लोगों को कानून के संभावित प्रभावों की जानकारी दी जाएगी और व्यापक जनसमर्थन जुटाया जाएगा।

रानीडीह कोकेटोला की स्थानीय समस्याओं पर भी हुई चर्चा

कार्यक्रम में खान एवं खनिज विधेयक के अलावा रानीडीह कोकेटोला क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गयी। बस्तीवासियों ने अखड़ा परिसर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग उठायी। ग्रामीणों ने अखड़ा परिसर में पेबर्स ब्लॉक लगाने की मांग की, ताकि बारिश के दौरान लोगों को आवागमन में परेशानी न हो। इसके अलावा क्षेत्र में पुराने और जर्जर बिजली पोलों को बदलने की भी मांग की गयी। ग्रामीणों ने नये बिजली पोल लगाने के साथ-साथ बस्ती में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करने की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना था कि जनहित से जुड़े इन मुद्दों के समाधान के लिए संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए। अखड़ा जैसे सामुदायिक स्थलों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

विधेयक के खिलाफ जनआंदोलन का संकल्प

परिचर्चा के अंत में उपस्थित लोगों ने खान एवं खनिज विधेयक 2026 के खिलाफ जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय अधिकारों से जुड़े विषयों पर ग्रामीणों को लगातार जागरूक करने की जरूरत है। बैठक में मुन्ना सिंकू, बबलू सुंडी, सुनाराम हो, बोयो हो, गौतम लोहार और रंजीत गोप समेत बड़ी संख्या में आदिवासी एवं मूलवासी समाज के लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों ने अपनी समस्याओं और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर विचार रखे। परिचर्चा के माध्यम से झामुमो ने क्षेत्र में खान एवं खनिज विधेयक 2026 के खिलाफ जनजागरण अभियान को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।