कंपनियों की बस्तियों की उपेक्षा पर झामुमो का आक्रोश, 15 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

Jamshedpur news: बारीडीह स्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) कार्यालय में रविवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में स्थानीय कंपनियों द्वारा आसपास की बस्तियों की कथित उपेक्षा को लेकर पार्टी ने कड़ा आक्रोश जताया। झामुमो के पूर्व नगर अध्यक्ष दलगोविंद लोहरा ने कहा कि कंपनियों को अपने आसपास के क्षेत्रों के विकास और स्थानीय लोगों के हित में कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत प्रभावी कार्य करना चाहिए, लेकिन कई कंपनियां इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं कर रही हैं। इससे बस्तियों के लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

CSR के तहत बस्तियों के विकास की उठी hai मांग

दलगोविंद लोहरा ने कहा कि कंपनियों को अपने आसपास की बस्तियों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में प्राथमिकता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाली आबादी का कंपनियों की गतिविधियों से सीधा संबंध है। ऐसे में स्थानीय लोगों की बुनियादी जरूरतों और समस्याओं के समाधान के लिए कंपनियों को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि आसपास की कई बस्तियों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। कंपनियों के सीएसआर कार्यों का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच रहा है। झामुमो ने मांग की कि कंपनियां स्थानीय बस्तियों की समस्याओं का सर्वे कराकर प्राथमिकता के आधार पर विकास योजनाएं तैयार करें।

स्कूलों, स्वास्थ्य और बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता की मांग

झामुमो ने कंपनियों से बस्तियों के स्कूलों में पठन-पाठन सामग्री उपलब्ध कराने और जर्जर स्कूल भवनों का जीर्णोद्धार कराने की मांग की। दलगोविंद लोहरा ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने में कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।उन्होंने बस्तियों में नियमित नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की मांग भी रखी। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के इलाज और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करने की बात कही गयी। इसके अलावा बारिश और बाढ़ से प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गयी। झामुमो नेताओं ने कहा कि सीएसआर के तहत केवल औपचारिक गतिविधियां करने के बजाय कंपनिi kiयों को ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनका सीधा और स्थायी लाभ स्थानीय लोगों को मिले।

स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार में प्राथमिकता

दलगोविंद लोहरा ने टीएसडीपीएल के एनएस ग्रुप के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी उठाये। उन्होंने मांग की कि एनएस ग्रुप को टाटा की अन्य कंपनियों की तर्ज पर समान भत्ता दिया जाए। साथ ही स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कंपनियों की बहाली प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की मांग करते हुए कहा कि 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक इकाइयों से सबसे पहले आसपास के युवाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिलना चाहिए।kझामुमो ने कहा कि स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और रोजगार से जोड़ने के लिए कंपनियों को विशेष योजना बनानी चाहिए। इससे क्षेत्र में बेरोजगारी कम करने में भी मदद मिलेगी।

15 दिन का अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन

दलगोविंद लोहरा ने बताया कि सोमवार को झामुमो और स्थानीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल संबंधित कंपनी प्रबंधन को मांग-पत्र सौंपेगा। प्रबंधन के समक्ष बस्तियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को रखा जाएगा और मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिनों का समय दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा में यदि कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो झामुमो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन शुरू करेगा। इसके तहत धरना-प्रदर्शन सहित अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।उन्होंने कहा कि झामुमो स्थानीय लोगों के अधिकारों और बस्तियों के विकास के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा। संवाददाता सम्मेलन में दलगोविंद लोहरा के अलावा संदीप चक्रवर्ती, सोमनाथ विश्वास, बिष्णु प्रधान, राजू राम, शंकर ठाकुर, देवाशीष, शक्ति प्रसाद, विदेशी स्वांसी समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।