Jamshedpur News: पोटका प्रखंड मुख्यालय परिसर में सोमवार को झारखंड आंदोलनकारियों के सम्मान में समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में अलग झारखंड राज्य के गठन के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रखंड क्षेत्र के चयनित दर्जनों आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया। पोटका विधायक संजीव सरदार ने आंदोलनकारियों को प्रशस्ति पत्र और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। सम्मान समारोह के दौरान आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान को याद किया गया तथा नई पीढ़ी को झारखंड आंदोलन के इतिहास से परिचित कराने पर जोर दिया गया।
झारखंड आंदोलनकारियों के संघर्ष से बना अलग राज्य
समारोह को संबोधित करते हुए विधायक संजीव सरदार ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के निर्माण के पीछे आंदोलनकारियों का लंबा संघर्ष और त्याग रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने अपने अधिकार, पहचान और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए वर्षों तक संघर्ष किया। कई आंदोलनकारियों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया और अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय झारखंड आंदोलन को समर्पित किया। उनके संघर्ष और बलिदान के कारण ही अलग झारखंड राज्य का सपना साकार हो पाया।
विधायक ने कहा कि झारखंड आज जिस पहचान के साथ देश के मानचित्र पर मौजूद है, उसमें आंदोलनकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके योगदान को केवल एक समारोह तक सीमित नहीं रखा जा सकता। समाज और सरकार की जिम्मेदारी है कि आंदोलनकारियों के संघर्ष की कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचायी जाए।
आंदोलनकारियों का त्याग और योगदान अविस्मरणीय
संजीव सरदार ने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने अनेक चुनौतियों का सामना किया। अलग राज्य की मांग को लेकर गांव-गांव में लोगों को जागरूक किया गया और आंदोलन को मजबूत बनाया गया। आंदोलनकारियों के संघर्ष में आदिवासी-मूलवासी समाज के साथ बड़ी संख्या में आम लोगों की भागीदारी रही। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों का योगदान राज्य की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है। उनके संघर्ष को सम्मान देना केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सम्मान समारोह के माध्यम से आंदोलनकारियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ-साथ युवाओं को झारखंड के निर्माण की संघर्ष गाथा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
हेमंत सोरेन सरकार ने आंदोलनकारियों के सम्मान पर दिया जोर
विधायक संजीव सरदार ने कहा कि झारखंड गठन के 26 वर्ष बीत चुके हैं। इस दौरान राज्य में कई बार अलग-अलग सरकारें बनीं, लेकिन आंदोलनकारियों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन के अगुआ दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पुत्र और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों के सम्मान और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों की पहचान और उनके अधिकारों से जुड़े मामलों को सरकार गंभीरता से ले रही है। सरकार का प्रयास है कि झारखंड निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को उचित सम्मान मिले। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों का सम्मान करना उनके संघर्ष को मान्यता देने के साथ-साथ झारखंड की अस्मिता और इतिहास का सम्मान करना भी है।
सम्मान पाकर भावुक हुए झारखंड आंदोलनकारी
सम्मान समारोह में प्रशस्ति पत्र और अंगवस्त्र प्राप्त करने के बाद कई आंदोलनकारी भावुक नजर आए। उन्होंने झारखंड आंदोलन के दौरान बिताए संघर्ष के दिनों को याद किया। आंदोलनकारियों ने कहा कि लंबे समय बाद उनके संघर्ष और योगदान को सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि अलग राज्य बनने के बाद भी झारखंड आंदोलन की मूल भावना और उद्देश्यों को याद रखना जरूरी है। आंदोलनकारियों ने उम्मीद जतायी कि आने वाली पीढ़ी झारखंड के इतिहास को समझेगी और राज्य के विकास में अपनी जिम्मेदारी निभायेगी। समारोह में आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष के अनुभव भी साझा किए।
जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की रही मौजूदगी
सम्मान समारोह में पोटका प्रखंड के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और झामुमो कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी अरुण कुमार मुंडा, पंचायत राज पदाधिकारी मनोज सिन्हा, पूर्व पार्षद चंद्रावती महतो, हीरामनी मुर्मू, झामुमो नेता सुनील महतो, सुधीर सोरेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने झारखंड आंदोलनकारियों के संघर्ष को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान प्रकट किया। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड के निर्माण की नींव आंदोलनकारियों के संघर्ष से मजबूत हुई है। इसलिए उनके इतिहास, योगदान और विचारों को संरक्षित करना जरूरी है। समारोह ने एक बार फिर झारखंड आंदोलन के संघर्षपूर्ण इतिहास और आंदोलनकारियों के योगदान को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया।
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