Jamshedpur News : ओलचिकी लिपि के ऐतिहासिक 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रविवार को संताली भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गयी. सोशियो इकोनॉमी एंड रिसर्च सेंटर, रामगढ़ के तत्वावधान में संताली टैलेंट सर्च परीक्षा 2026 का आयोजन किया गया. परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों में खासा उत्साह देखा गया. पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले में बनाये गये दो परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त वातावरण में परीक्षा संपन्न हुई. संस्था की ओर से बताया गया कि ओलचिकी लिपि की शताब्दी यात्रा को यादगार बनाने के उद्देश्य से संताली टैलेंट सर्च परीक्षा का आयोजन किया गया है. परीक्षा के माध्यम से संताली समाज की नयी पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और पहचान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. संस्था के संस्थापक डॉ. सत्यनारायण मुर्मू ने कहा कि यह परीक्षा अब प्रत्येक वर्ष आयोजित की जायेगी, ताकि विद्यार्थियों में संताली भाषा और ओलचिकी लिपि के प्रति रुचि बढ़े.
ओलचिकी लिपि की शताब्दी पर शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल
ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने को संताली समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है. इसी अवसर को केंद्र में रखते हुए आयोजित संताली टैलेंट सर्च परीक्षा को केवल एक प्रतियोगी परीक्षा के रूप में नहीं, बल्कि भाषा और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है. डॉ. सत्यनारायण मुर्मू ने बताया कि परीक्षा का मुख्य उद्देश्य संताल समाज के बच्चों और युवाओं को अपनी समृद्ध भाषा, संस्कृति और पारंपरिक व्यवस्था से जोड़ना है. उन्होंने कहा कि ओलचिकी लिपि को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और नयी पीढ़ी में इसके प्रति जागरूकता पैदा करने की जरूरत है. ऐसी शैक्षणिक गतिविधियों से विद्यार्थियों को अपनी भाषा के अध्ययन के लिए प्रेरणा मिलेगी. संस्था का प्रयास है कि आने वाले वर्षों में इस प्रतियोगिता को और व्यापक बनाया जाये, ताकि अधिक संख्या में विद्यार्थी इसमें भाग ले सकें और संताली भाषा के प्रति अपनी रुचि को आगे बढ़ा सकें.
दो परीक्षा केंद्रों पर 348 अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
संताली टैलेंट सर्च परीक्षा के लिए दो परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. पूर्वी सिंहभूम जिले में घाटशिला कॉलेज हॉल को परीक्षा केंद्र बनाया गया था, जबकि सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर स्थित आरसीएम पब्लिक स्कूल में दूसरा केंद्र बनाया गया था. परीक्षा नियंत्रक राजकुमार मार्डी ने बताया कि दोनों केंद्रों को मिलाकर कुल 355 परीक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया था. इनमें से 348 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. घाटशिला कॉलेज केंद्र पर सहायक परीक्षा नियंत्रक डॉ. रजनी कांत माण्डी ने बताया कि यहां 200 पंजीकृत परीक्षार्थियों में से 195 ने परीक्षा दी. वहीं, राजनगर स्थित आरसीएम पब्लिक स्कूल परीक्षा केंद्र पर सहायक परीक्षा नियंत्रक डॉ. फुदान चन्द्र सोरेन के अनुसार 155 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 153 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए. दोनों केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त माहौल में संपन्न हुई.
10 सितंबर को जारी होगा परिणाम, 13 को सम्मान समारोह
संताली टैलेंट सर्च परीक्षा का परिणाम 10 सितंबर 2026 को घोषित किया जायेगा. इसके बाद सफल विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए 13 सितंबर 2026 को राजनगर, सरायकेला-खरसावां में सम्मान व पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जायेगा.आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक पुरस्कार दिये जायेंगे. प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को साइकिल प्रदान की जायेगी. चौथे से 10वें स्थान तक रहने वाले विद्यार्थियों को स्टडी टेबल, 11वें से 15वें स्थान तक के सफल अभ्यर्थियों को स्कूल बैग तथा 16वें से 20वें स्थान तक रहने वाले विद्यार्थियों को लंच बॉक्स दिया जायेगा. इसके अलावा सभी सफल अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा. कार्यक्रम के दौरान शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों एवं बुद्धिजीवियों को भी सम्मानित किया जायेगा.
शैक्षणिक प्रतियोगिताओं से नयी पीढ़ी को मिलेगी दिशा : भुजंग टुडू
परीक्षा के सफल आयोजन में विभिन्न वीक्षकों और आयोजन से जुड़े लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. परीक्षा के दौरान भुजंग टुडू, सत्य रंजन सोरेन, माझिया बास्के, हाराधन माण्डी, हरेन्द्र टुडू, सुधीर चन्द्र मुर्मू, पीतांबर हांसदा, डुमका मुर्मू, विशान मार्डी, निहार प्रधान, चुनाराम सोरेन, चाम्पा मुर्मू और शाम्भु सोरेन ने वीक्षक की भूमिका निभायी. वीक्षक भुजंग टुडू ने कहा कि शिक्षा के अभाव के कारण लंबे समय तक समाज के सामने कई चुनौतियां रहीं, लेकिन अब इस तरह की शैक्षणिक प्रतियोगिताओं के माध्यम से नयी पीढ़ी को आगे बढ़ने की दिशा मिल रही है. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ते हुए आधुनिक शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है. उन्होंने ऐसी प्रतियोगिताओं को विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और प्रतिभा को निखारने का माध्यम बताया. अंत में संस्था के संस्थापक डॉ. सत्यनारायण मुर्मू ने समाज के लोगों से 13 सितंबर को राजनगर में आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की.
Social Plugin