टीएमएच ने नवजात शिशुओं के लिए शुरू की अत्याधुनिक iNO थेरेपी
Jamshedpur News: जमशेदपुर के टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) ने नवजात शिशुओं की गंभीर चिकित्सा सेवाओं में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड (iNO) थेरेपी की शुरुआत की है। यह सुविधा विशेष रूप से उन नवजात शिशुओं के लिए शुरू की गई है, जो जन्म के बाद गंभीर श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझते हैं। इस नई सेवा का शुभारंभ टीएमएच की जीएम (मेडिकल सर्विसेज) डॉ. विनीता सिंह ने किया। इस अत्याधुनिक तकनीक के शुरू होने से अब जमशेदपुर और आसपास के जिलों के गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को महानगरों में रेफर किए बिना स्थानीय स्तर पर ही उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा। यह पहल क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
जमशेदपुर का पहला और झारखंड का दूसरा अस्पताल बना टीएमएच
टीएमएच अब जमशेदपुर का पहला और झारखंड का दूसरा अस्पताल बन गया है, जहां iNO थेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अब तक इस तरह की अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा राज्य में बेहद सीमित थी, जिसके कारण गंभीर स्थिति में नवजात शिशुओं को रांची, कोलकाता, दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में भेजना पड़ता था। ऐसी परिस्थितियों में उपचार में देरी होने का खतरा बना रहता था। साथ ही मरीजों के परिजनों को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता था। अब इस सुविधा के स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से समय पर इलाज संभव होगा और नवजात शिशुओं के जीवन बचाने की संभावना भी बढ़ेगी।
टीएमएच की 35 बेड वाली अत्याधुनिक नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) पहले से ही क्षेत्र में नवजात शिशुओं के उपचार का प्रमुख केंद्र रही है। iNO थेरेपी के जुड़ने से इसकी क्षमता और मजबूत हुई है।
क्या है iNO थेरेपी और किन शिशुओं के लिए है जरूरी?
इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड (iNO) थेरेपी मुख्य रूप से पर्सिस्टेंट पल्मोनरी हाइपरटेंशन ऑफ न्यूबॉर्न (PPHN) से पीड़ित नवजात शिशुओं के उपचार में उपयोग की जाती है। यह एक गंभीर स्थिति होती है, जिसमें जन्म के बाद शिशु के फेफड़ों की रक्त वाहिकाएं सामान्य रूप से नहीं खुल पातीं।
परिणामस्वरूप शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और इसका सीधा प्रभाव हृदय, मस्तिष्क तथा अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। यदि समय रहते उचित इलाज न मिले तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। iNO थेरेपी के माध्यम से नाइट्रिक ऑक्साइड गैस को शिशु के फेफड़ों तक पहुंचाया जाता है, जिससे फेफड़ों की रक्त वाहिकाएं शिथिल होती हैं। इससे रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। यह उपचार गंभीर स्थिति में नवजात शिशु के स्वास्थ्य को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हर वर्ष 40 से 45 नवजात शिशुओं को मिलेगा सीधा लाभ
टीएमएच के विशेषज्ञों के अनुसार इस नई सुविधा से हर वर्ष लगभग 40 से 45 गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। अस्पताल का मानना है कि समय पर iNO थेरेपी मिलने से शिशुओं के स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। साथ ही कई मामलों में वेंटिलेटर पर निर्भरता कम करने और जटिलताओं को नियंत्रित करने में भी यह तकनीक प्रभावी साबित होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात शिशुओं के उपचार में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह सुविधा उपलब्ध होना चिकित्सा व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि है।
परिजनों को मिलेगा राहत, रेफरल की आवश्यकता होगी कम
अब तक गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को अत्याधुनिक उपचार के लिए दूसरे राज्यों या बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था। इससे उपचार में विलंब होने के साथ-साथ मरीज के परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक बोझ भी पड़ता था। टीएमएच में iNO थेरेपी उपलब्ध होने से अब जमशेदपुर, पूर्वी सिंहभूम तथा कोल्हान क्षेत्र के अन्य जिलों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही यह सुविधा मिल सकेगी। इससे इमरजेंसी रेफरल की आवश्यकता में उल्लेखनीय कमी आएगी और शिशुओं को समय रहते जीवनरक्षक उपचार प्राप्त हो सकेगा। यह सुविधा न केवल मरीजों के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि क्षेत्र की संपूर्ण नवजात चिकित्सा व्यवस्था को भी नई दिशा देने का कार्य करेगी।
झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया आयाम
टीएमएच द्वारा शुरू की गई iNO थेरेपी झारखंड में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह पहल अस्पताल की मरीज-केंद्रित और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। अस्पताल प्रबंधन का उद्देश्य गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को उनके घर के निकट ही विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि समय पर इलाज मिलने से उनके जीवन की रक्षा की जा सके। आने वाले समय में यह सुविधा न केवल मृत्यु दर कम करने में मददगार साबित होगी, बल्कि झारखंड में नवजात शिशुओं की विशेष चिकित्सा सेवाओं के स्तर को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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