करनडीह ग्रामसभा का स्पष्ट ऐलान, खेतों में नहीं आने देंगे दूषित पानी
Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर स्थित करनडीह क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को करनडीह मौजा के 10 गांवों के ग्रामीणों ने एक महत्वपूर्ण ग्रामसभा आयोजित कर यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी कीमत पर बहुमंजिला मकानों से निकलने वाले गंदे पानी को गांव और कृषि भूमि में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से अपने पुराने निर्णय को बरकरार रखते हुए जिला प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने प्रभावी कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामसभा ने साफ शब्दों में कहा कि यह केवल जल निकासी का मामला नहीं बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
30 जून को बंद की गई थी नालियां, चार दिन बाद भी समाधान नहीं
गौरतलब है कि करनडीह ग्रामसभा ने 30 जून को विरोध स्वरूप क्षेत्र की नालियों को जाम कर दिया था, ताकि बहुमंजिला इमारतों से निकलने वाला गंदा पानी खेतों तक न पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कार्रवाई के चार दिन बाद भी जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। शनिवार को आयोजित ग्रामसभा में ग्रामीणों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने और आंदोलन करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि वह तत्काल सर्वे कराकर जल निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे।
20 वर्षों से बर्बाद हो रही 40 से 50 एकड़ कृषि भूमि
ग्रामसभा के अनुसार परसुडीह और प्रमथनगर क्षेत्र के अनगिनत बहुमंजिला मकानों का गंदा पानी लाइनटोला, धरमटोला और दुखूटोला के खेतों में छोड़ा जा रहा है। इससे पिछले करीब 20 वर्षों में लगभग 40 से 50 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार गंदा पानी जमा रहने के कारण खेतों की उपजाऊ क्षमता समाप्त होती जा रही है। जिन खेतों में कभी धान और अन्य फसलें लहलहाती थीं, वहां अब जलभराव और गंदगी का स्थायी रूप से कब्जा हो गया है। इससे किसानों की आजीविका भी प्रभावित हुई है और आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ रहा है। ग्रामसभा का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले वर्षों में और अधिक कृषि भूमि बर्बाद हो सकती है।
गंदे पानी से बीमारी फैलने का खतरा, बच्चों को भी हो रही परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में जमा दूषित पानी अब स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है। लगातार जलभराव के कारण मच्छरों और अन्य संक्रमण फैलाने वाले जीवों की संख्या बढ़ रही है, जिससे विभिन्न बीमारियों की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा करनडीह फाटक से एसएस स्कूल होते हुए सुंदरनगर जाने वाली सड़क पर पूरे वर्ष गंदा पानी बहता रहता है। इस रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, ग्रामीण और राहगीर गुजरते हैं। गंदगी और जलभराव के कारण लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे दुर्घटना और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल गांव की समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और यातायात से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
जिला प्रशासन से सर्वे और वैकल्पिक जल निकासी की मांग
ग्रामसभा ने जिला प्रशासन से मांग की कि परसुडीह शीतला चौक से करनडीह फाटक तक बने सभी बहुमंजिला मकानों का सर्वे कराया जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि इन इमारतों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी किस प्रकार की जा रही है। ग्रामीणों का सुझाव है कि प्रशासन वैज्ञानिक तरीके से नई जल निकासी व्यवस्था विकसित करे, ताकि दूषित पानी गांवों और कृषि भूमि तक न पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्थायी ड्रेनेज सिस्टम बनने से न केवल किसानों की जमीन बचेगी बल्कि क्षेत्र में स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी समाधान होगा। ग्रामसभा ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने की अपील करते हुए कहा कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।
ग्रामसभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल
शनिवार को आयोजित ग्रामसभा में क्षेत्र के विभिन्न गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। बैठक में मधु सोरेन, शंकर हेंब्रम, तुराम हेंब्रम, शांखो हांसदा, सत्यनारायण टुडू, महेश मुर्मू, लखन मार्डी, मझिया मुर्मू, बंगाल मार्डी, सिंगराई मुर्मू, चुनू हांसदा, सावना मुर्मू, रघुनाथ हांसदा, जीएस मुर्मू, लेचा मुर्मू और भोगान सोरेन सहित अनेक ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गांव, खेत और पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी ग्रामीण एकजुट रहेंगे। ग्रामसभा ने स्पष्ट किया कि दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और किसी भी कीमत पर गंदे पानी को गांव और कृषि भूमि में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
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