Delhi News: केंद्र सरकार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उन्होंने रविवार को औपचारिक रूप से शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार लगभग पांच घंटे तक बैठक कर विभाग के कामकाज, योजनाओं और वर्तमान चुनौतियों की विस्तृत समीक्षा की। यह बैठक सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक चली, जिसमें शिक्षा मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं, परीक्षा प्रणाली, नई शिक्षा नीति तथा प्रशासनिक व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर विश्वास जताते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। वे इस विश्वास पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे और शिक्षा मंत्रालय के कार्यों को समझने के बाद आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का जताया आभार, जिम्मेदारी को बताया महत्वपूर्ण
कार्यभार संभालने के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह उनके लिए सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर भरोसा जताया है, जिसके लिए वे उनके आभारी हैं। उन्होंने कहा कि वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्य भावना के साथ इस नई भूमिका का निर्वहन करेंगे। उन्होंने बताया कि शनिवार रात वे कर्नाटक से दिल्ली पहुंचे और रविवार सुबह सीधे शिक्षा मंत्रालय पहुंचकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक शुरू की। उनका कहना था कि शिक्षा मंत्रालय का कार्यक्षेत्र बेहद व्यापक है, इसलिए पहले मंत्रालय की कार्यप्रणाली को पूरी तरह समझना आवश्यक है। इसके बाद ही भविष्य की योजनाओं और सुधारों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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पांच घंटे चली समीक्षा बैठक, मंत्रालय के कामकाज को समझा
प्रह्लाद जोशी ने मंत्रालय के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी बैठक कर विभिन्न विभागों की जानकारी ली। बैठक में शिक्षा मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं, उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, डिजिटल शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), परीक्षा प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर भी जानकारी साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है और मंत्रालय के सभी पहलुओं को समझने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा देश के भविष्य की नींव है और इसे और मजबूत बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ बदलाव
प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार ऐसे समय में मिला है, जब पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। हालांकि वे पहले की तरह केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय का कार्य भी संभालते रहेंगे। सरकार का मानना है कि अनुभवी मंत्री होने के कारण वे दोनों मंत्रालयों की जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभा सकेंगे।
शिक्षा मंत्रालय के सामने कई बड़ी चुनौतियां
प्रह्लाद जोशी ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब देश में शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल के महीनों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर सरकार विपक्ष और छात्रों के निशाने पर रही है। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर कई राज्यों में प्रदर्शन भी किए। ऐसे माहौल में नए शिक्षा मंत्री के सामने परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देना तथा उच्च एवं स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता सुधार सुनिश्चित करना बड़ी प्राथमिकता मानी जा रही है।
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शिक्षा सुधारों पर रहेगी सबकी नजर
प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को केंद्र सरकार का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में शिक्षा मंत्रालय की प्राथमिकताओं, परीक्षा सुधार, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर कई अहम फैसले सामने आ सकते हैं।फिलहाल जोशी ने स्पष्ट किया है कि उनका पहला लक्ष्य मंत्रालय की कार्यप्रणाली को गहराई से समझना है। इसके बाद शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और छात्र हितैषी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। ऐसे में देशभर के छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा जगत की निगाहें अब नए शिक्षा मंत्री के आगामी निर्णयों पर टिकी हुई हैं।
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