अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस : टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में वन महोत्सव का समापन, छात्रों को मिला वन्यजीव संरक्षण का संदेश

बाघ संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के साथ मनाया गया अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस


Jamshedpur News: जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क (टीएसजेडपी) में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पूरे उत्साह और जागरूकता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर माहभर चले वन महोत्सव कार्यक्रम का भी औपचारिक समापन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों में बाघ संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। समारोह के दौरान वृक्षारोपण अभियान, जागरूकता व्याख्यान, कीपर टॉक और संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों और चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा केवल सरकारी संस्थाओं की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

डीएफओ ने बाघ संरक्षण और जैव विविधता पर दिया प्रेरक संदेश

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जमशेदपुर वन प्रमंडल के प्रभागीय वन पदाधिकारी (डीएफओ) श्री सबा आलम अंसारी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में बाघों के संरक्षण को भारत की प्राकृतिक धरोहर की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि स्वस्थ वन और सुरक्षित वन्यजीव एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र की पहचान हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि पूरे जंगल के स्वास्थ्य के प्रतीक हैं। यदि बाघ सुरक्षित रहेंगे तो जंगल, जल स्रोत और जैव विविधता भी सुरक्षित रहेगी। उन्होंने छात्रों से प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।


पौधारोपण के साथ वन महोत्सव का समापन, संरक्षण का दिया संदेश

कार्यक्रम की शुरुआत टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क परिसर में पौधारोपण अभियान से हुई। यह अभियान प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन और हरित वातावरण को बढ़ावा देने की दिशा में पार्क की प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा। इसी पौधारोपण के साथ महीनेभर तक चलने वाले वन महोत्सव कार्यक्रम का भी समापन हुआ। वन महोत्सव के दौरान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। पार्क प्रबंधन ने बताया कि ऐसे अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन्हें जनआंदोलन का रूप देना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सके।


विशेषज्ञों ने बताया पारिस्थितिकी तंत्र में बाघों का महत्व

टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क के क्यूरेटर डॉ. एस. के. महतो ने “पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता में बाघों की भूमिका” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि बाघ जंगलों के शीर्ष शिकारी (एपेक्स प्रीडेटर) हैं और उनकी मौजूदगी पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बाघों के सामने मौजूद चुनौतियों, जैसे प्राकृतिक आवासों का सिकुड़ना, अवैध शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भी विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा आयोजित कीपर टॉक में चिड़ियाघर के अनुभवी कीपर्स ने बाघों की जीवविज्ञान, व्यवहार, भोजन, देखभाल और संरक्षण से जुड़ी रोचक जानकारियां साझा कीं। इस संवादात्मक सत्र ने प्रतिभागियों को वन्यजीवों के संरक्षण के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर प्रदान किया।


150 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया संरक्षण का संकल्प

कार्यक्रम में करीम सिटी कॉलेज और जमशेदपुर विमेंस यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों सहित लगभग 150 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क की बायोलॉजिस्ट-सह-एजुकेशन ऑफिसर डॉ. सीमा रानी ने पूरे कार्यक्रम का सफल समन्वयन किया। वहीं पार्क के निदेशक डॉ. नईम अख्तर ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण की सफलता युवाओं की जागरूकता और सहभागिता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि यदि युवा प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करेंगे तो बाघों सहित अन्य वन्यजीवों का भविष्य अधिक सुरक्षित होगा। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि प्रकृति की अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है और इसके लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण आधार है।