Skill Based Higher Education से जमशेदपुर में बदल रही उच्च शिक्षा की तस्वीर
Jamshedpur Skill Based Higher Education: जमशेदपुर अब केवल उद्योग नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि कौशल आधारित उच्च शिक्षा (स्किल बेस्ड हायर एजुकेशन) के प्रमुख केंद्र के रूप में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। बदलते समय में रोजगार और उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए शहर के विश्वविद्यालयों और निजी शिक्षण संस्थानों ने पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ जॉब ओरिएंटेड और इंडस्ट्री ड्रिवन कोर्स शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार के लिए तैयार करना भी है। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत ऐसे कोर्स शुरू किए जा रहे हैं, जिनकी मांग स्वास्थ्य, तकनीक, फॉरेंसिक, डिजिटल मार्केटिंग और आधुनिक प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है। इसका लाभ केवल जमशेदपुर या झारखंड के छात्रों को ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों को भी मिल रहा है। यही कारण है कि शहर अब उच्च शिक्षा के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।
मेडिकल, फॉरेंसिक और हेल्थकेयर क्षेत्र के कोर्स बढ़ा रहे आकर्षण
शहर के कई शिक्षण संस्थानों ने मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी, बीएससी इन फॉरेंसिक साइंस, बीबीए इन हॉस्पिटैलिटी एंड होटल मैनेजमेंट जैसे आधुनिक और रोजगारपरक कोर्स शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं और जांच से जुड़े क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता पहले की तुलना में अधिक हो गई है। इसके साथ ही हेल्थकेयर और फॉरेंसिक साइंस में स्नातक स्तर के कोर्स भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक और व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इससे पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी मिलने की संभावनाएं पहले से अधिक मजबूत होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य और फॉरेंसिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। ऐसे में इन कोर्सों का महत्व भी लगातार बढ़ता जाएगा।
तकनीक और डिजिटल शिक्षा पर बढ़ रहा जोर
डिजिटल युग की जरूरतों को देखते हुए विश्वविद्यालयों ने तकनीक आधारित कई नए सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किए हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल मार्केटिंग, इवेंट मैनेजमेंट, डेटा से जुड़े विषय और फॉरेंसिक साइंस जैसे कोर्स शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को नई तकनीकों की जानकारी देने के साथ-साथ उद्योगों की वर्तमान जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित किया जा रहा है। डिजिटल क्षेत्र में रोजगार के बढ़ते अवसरों को देखते हुए इन कोर्सों में युवाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पारंपरिक डिग्री आज के समय में पर्याप्त नहीं है। यदि छात्र पढ़ाई के दौरान किसी विशेष कौशल में दक्षता हासिल कर लेते हैं, तो उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार दोनों के अवसर बढ़ जाते हैं।
स्वरोजगार और व्यावहारिक प्रशिक्षण को भी मिल रही प्राथमिकता
जमशेदपुर के कई शिक्षण संस्थानों में अब छात्रों को केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि स्वयं का रोजगार शुरू करने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से जूस एंड बेवरेज टेक्नोलॉजी, फैशन डिजाइनिंग, मशरूम उत्पादन, पर्ल कल्चर (मोती पालन) जैसे व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा कथक, गिटार, वेस्टर्न कल्चर और योग जैसे सर्टिफिकेट कोर्स भी उपलब्ध हैं, जिससे छात्र अपनी रुचि के अनुसार अतिरिक्त कौशल विकसित कर सकते हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, रचनात्मकता और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना भी है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ छोटे स्तर पर उद्यम शुरू करने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
दूसरे राज्यों के छात्र भी चुन रहे हैं जमशेदपुर
नई पीढ़ी के इन रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के कारण झारखंड के अलावा अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी जमशेदपुर का रुख कर रहे हैं। कई ऐसे कोर्स हैं, जो प्रदेश के अन्य हिस्सों में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। यही वजह है कि छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। शहर के विश्वविद्यालय और निजी संस्थान आधुनिक प्रयोगशालाएं, प्रशिक्षित शिक्षक और इंडस्ट्री से जुड़ी पढ़ाई उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप नए कोर्स शुरू होते रहे, तो आने वाले समय में जमशेदपुर पूर्वी भारत के प्रमुख स्किल एजुकेशन हब के रूप में स्थापित हो सकता है।
उद्योगों की जरूरत के अनुरूप तैयार हो रहे नए पाठ्यक्रम
कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता के अनुसार क्षेत्रीय उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में भी जल्द नए इंडस्ट्री ड्रिवन पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इससे छात्रों को स्थानीय उद्योगों में रोजगार पाने में सुविधा होगी और कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा। वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब केवल पारंपरिक विषयों पर निर्भर रहने के बजाय कौशल आधारित शिक्षा पर अधिक जोर दिया जा रहा है। मेडिकल, हेल्थकेयर, फॉरेंसिक साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मार्केटिंग, हॉस्पिटैलिटी और स्वरोजगार से जुड़े कोर्स युवाओं के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं। कुल मिलाकर, जमशेदपुर धीरे-धीरे पारंपरिक शिक्षा के दायरे से आगे बढ़ते हुए कौशल आधारित उच्च शिक्षा का मजबूत केंद्र बन रहा है। यदि विश्वविद्यालय और उद्योगों के बीच सहयोग इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह शहर आने वाले वर्षों में रोजगारपरक शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट का राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
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