जमशेदपुर: गदड़ा पंचायत की महिलाओं ने नशा मुक्त समाज के लिए छेड़ी निर्णायक लड़ाई
Jamshedpur News: जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत गदड़ा पंचायत की महिलाओं ने क्षेत्र में तेजी से फैल रहे नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एकजुट होकर बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। पंचायत में अफीम, गांजा, शराब और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री से चिंतित महिलाओं ने अब इसे सामाजिक आंदोलन का रूप देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि नशे के कारण क्षेत्र के युवा अपराध, हिंसा और सामाजिक बुराइयों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे परिवार और समाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इसी चिंता को लेकर शुक्रवार को पंचायत की महिलाओं का एक प्रतिनिधिमंडल साकची स्थित उपायुक्त कार्यालय पहुंचा और उपायुक्त को मांग पत्र सौंपकर अवैध नशा कारोबार पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। महिलाओं का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ी का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
उपायुक्त को सौंपा मांग पत्र, अवैध कारोबार पर कार्रवाई की मांग
लक्ष्मी बारदा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को सौंपे गए मांग पत्र में बताया कि गदड़ा पंचायत में लंबे समय से शराब, गांजा, अफीम और ब्राउन शुगर का अवैध कारोबार चल रहा है। इससे गांव का सामाजिक वातावरण लगातार बिगड़ रहा है और युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि अवैध शराब भट्ठियों, ड्रग्स तस्करों और नशा माफियाओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन समय पर प्रभावी कदम उठाता है तो क्षेत्र में अपराध और सामाजिक अव्यवस्था पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। महिलाओं ने प्रशासन से नियमित पुलिस गश्ती बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने और नशा कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग की। उनका कहना है कि नशा मुक्त पंचायत बनाने के लिए प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा।
लक्ष्मी बारदा बोलीं- नशा कारोबारी युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं लक्ष्मी बारदा ने कहा कि नशा कारोबारियों का नेटवर्क केवल मादक पदार्थों की बिक्री तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार ये लोग युवाओं को नशे की लत लगाकर उन्हें गलत गतिविधियों में धकेल रहे हैं। साथ ही गरीब और सरकारी जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री जैसे मामलों में भी उनकी संलिप्तता सामने आ रही है। लक्ष्मी बारदा ने कहा कि नशा माफिया क्षेत्र में डर और भय का माहौल बनाकर लोगों की आवाज दबाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अब गांव की महिलाएं पीछे हटने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समाज की सुरक्षा और बच्चों के भविष्य के लिए यह संघर्ष हर हाल में जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के हित में लड़ी जा रही है।
कारगिल वीर के परिवार से जुड़ी लक्ष्मी ने कहा- धमकियों से नहीं डरेंगे
लक्ष्मी बारदा ने बताया कि वह कारगिल युद्ध में देश की सेवा कर चुके जवान मानिक बारदा की बहन हैं। उन्होंने कहा कि उनका परिवार हमेशा देश और समाज की रक्षा के लिए खड़ा रहा है। इसलिए अपराधियों और नशा माफियाओं की धमकियों से डरने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि यदि समाज की महिलाएं एकजुट हो जाएं तो किसी भी सामाजिक बुराई को समाप्त किया जा सकता है। पंचायत की महिलाएं अब केवल शिकायत करने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को भी इस लड़ाई से जोड़ेंगी। उनका विश्वास है कि सामूहिक प्रयास से गदड़ा पंचायत को नशा मुक्त बनाया जा सकता है।
नशाबंदी रैली निकालने और अवैध भट्ठियों की तालाबंदी की चेतावनी
महिलाओं ने नशा कारोबारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि वे जल्द ही पूरे पंचायत क्षेत्र में व्यापक नशाबंदी रैली निकालेंगी। इस रैली के माध्यम से ग्रामीणों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा और लोगों से अवैध कारोबार का विरोध करने की अपील की जाएगी। महिलाओं ने यह भी चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी अवैध शराब और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री बंद नहीं हुई तो वे शांतिपूर्ण तरीके से अवैध शराब भट्ठियों और नशा बेचने वाले ठिकानों की तालाबंदी करेंगी। उनका कहना है कि पंचायत की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। महिलाओं का यह आंदोलन अब सामाजिक जनभागीदारी का रूप लेता जा रहा है।
महिला शक्ति की एकजुटता बनी बदलाव की उम्मीद
गदड़ा पंचायत में शुरू हुआ यह अभियान अब केवल कुछ महिलाओं तक सीमित नहीं रह गया है। इस आंदोलन में सुमी पूर्ति, सोमबारी बारदा, ज्योति बारदा, सुमित्रा, अनिता सामद, सावित्री हेंब्रम, सोना हेंब्रम और सोनारानी हेंब्रम सहित बड़ी संख्या में महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सभी का एक ही उद्देश्य है-अपने गांव और आने वाली पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाना। ग्रामीणों का मानना है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाएं तो गदड़ा पंचायत नशा मुक्त पंचायत बनने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है। महिलाओं की यह पहल न केवल सामाजिक जागरूकता का संदेश देती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि जब समाज की मातृशक्ति किसी मुद्दे पर एकजुट होती है, तो बड़े से बड़ा बदलाव संभव हो जाता है। अब सबकी निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे क्षेत्र में अवैध नशा कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
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