जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में गैर-शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन की मांग तेज

चार साल बाद भी पुरानी पद संरचना पर चल रहा विश्वविद्यालय

Jamshedpur News: जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की स्थापना को चार वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन आज भी इसका प्रशासनिक संचालन पुराने जमशेदपुर विमेंस कॉलेज की पद संरचना के आधार पर किया जा रहा है। विश्वविद्यालय बनने के बाद जहां शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में कई गुना वृद्धि हुई है, वहीं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के पदों का पुनर्गठन अब तक नहीं हो सका है। इस स्थिति को लेकर झारखंड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ ने गंभीर चिंता जताई है। महासंघ का कहना है कि विश्वविद्यालय की वर्तमान व्यवस्था उच्च शिक्षा संस्थान की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है और इससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। महासंघ ने इस मुद्दे को लेकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. इला कुमार को ई-मेल के माध्यम से विस्तृत मांग-पत्र भेजा है। इसमें गैर-शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन के साथ-साथ स्थायी व्यवस्था लागू होने तक अंतरिम प्रशासनिक समाधान लागू करने का आग्रह किया गया है।

महासंघ ने कुलपति को भेजा विस्तृत मांग-पत्र


महासंघ ने अपने ज्ञापन में कहा है कि झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा अप्रैल 2026 में जारी संकल्प तथा झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन का स्पष्ट कानूनी प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। महासंघ का कहना है कि विश्वविद्यालय बनने के बाद संस्थान की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल चुकी है। परीक्षा संचालन, वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय, छात्र सेवा, स्थापना शाखा और अन्य विभागों का कार्यभार पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। ऐसे में पुराने कॉलेज स्तर की पद संरचना पर विश्वविद्यालय का संचालन व्यावहारिक नहीं माना जा सकता। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि समय रहते पदों का पुनर्गठन नहीं किया गया तो भविष्य में प्रशासनिक जटिलताएं और अधिक बढ़ सकती हैं।

कार्यभार बढ़ने से कर्मचारियों पर बढ़ा दबाव


महिला विश्वविद्यालय बनने के बाद कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में कई गुना वृद्धि हुई है। पहले जहां सीमित स्तर पर प्रशासनिक कार्य होते थे, वहीं अब विश्वविद्यालय स्तर की सभी प्रक्रियाओं का संचालन किया जा रहा है। इसके बावजूद कर्मचारियों की संख्या और पद संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। महासंघ के अनुसार, सीमित कर्मचारियों के भरोसे विश्वविद्यालय का संचालन होने से कर्मचारियों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ रहा है। कई विभागों में एक ही कर्मचारी को अनेक जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। इससे कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता भी प्रभावित हो रही है। संगठन का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत किए बिना विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्थागत विकास की अपेक्षा करना कठिन होगा। इसलिए कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के बेहतर संचालन के लिए भी पदों का पुनर्गठन आवश्यक है।

अंतरिम प्रभारी व्यवस्था लागू करने का सुझाव


महासंघ ने केवल पदों के पुनर्गठन की मांग ही नहीं की है, बल्कि स्थायी नियुक्ति और पुनर्गठन होने तक अंतरिम व्यवस्था लागू करने का भी सुझाव दिया है। संगठन ने कहा है कि वर्तमान में कार्यरत योग्य एवं वरिष्ठ कर्मचारियों को विभिन्न शाखाओं का अंतरिम प्रभारी बनाया जाए। इससे प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी और विभिन्न विभागों की जवाबदेही भी तय होगी। संगठन का मानना है कि यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रह सकती है, जब तक सरकार द्वारा नए पदों का सृजन और नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के सुचारु संचालन और संस्थागत हित को ध्यान में रखकर की गई है।

सरकारी नियमों के अनुरूप कार्रवाई की मांग


महासंघ के प्रांतीय महासचिव विश्वेश्वर यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय बनने के बाद भी पुराने कॉलेज स्तर की व्यवस्था पर काम करना न केवल प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित है, बल्कि यह सरकारी दिशा-निर्देशों की भावना के भी विपरीत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन का स्पष्ट प्रावधान किया है, इसलिए इसका पालन किया जाना चाहिए। वहीं महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार राय ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस विषय पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो भविष्य में प्रशासनिक समस्याएं और अधिक गंभीर हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि कुलपति इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार के समक्ष आवश्यक प्रस्ताव भेजेंगी और पुनर्गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।

विश्वविद्यालय के विकास के लिए पुनर्गठन को बताया आवश्यक


शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विश्वविद्यालय की सफलता केवल शैक्षणिक गतिविधियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि कर्मचारियों की पद संरचना संस्थान की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होगी, तो इसका सीधा असर विश्वविद्यालय के विकास, पारदर्शिता और सेवा गुणवत्ता पर पड़ेगा। जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय झारखंड के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल है और यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्राएं प्रवेश लेती हैं। ऐसे में बढ़ते कार्यभार के अनुरूप गैर-शैक्षणिक पदों का पुनर्गठन समय की आवश्यकता माना जा रहा है। महासंघ का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार पदों का पुनर्गठन, नई नियुक्तियां और प्रशासनिक ढांचे का सुदृढ़ीकरण होने से विश्वविद्यालय की कार्यक्षमता बढ़ेगी। साथ ही कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव कम होगा और छात्राओं को भी बेहतर एवं समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी। अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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