Sports News: पूर्व भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान असुंता लकड़ा ने राष्ट्रीय महिला आयोग को पत्र लिखकर हॉकी इंडिया और उससे जुड़ी संस्थाओं में महिला खिलाड़ियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आयोग से आग्रह किया है कि शिकायतों के निपटारे की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर यह पता लगाया जाए कि कहीं शिकायतों को दबाने या कार्रवाई में देरी करने जैसी संस्थागत कमियां तो नहीं रहीं। असुंता लकड़ा का कहना है कि महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है। उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि खिलाड़ियों का विश्वास तभी कायम रहेगा जब जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। उनका मानना है कि यदि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती है तो इससे खेल संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
झारखंड की महिला खिलाड़ियों से जुड़े मामलों पर भी उठाए सवाल
असुंता लकड़ा ने अपने पत्र में विशेष रूप से झारखंड की महिला हॉकी खिलाड़ियों से जुड़े मामलों का उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला खिलाड़ियों ने यौन उत्पीड़न, धमकी, पद के दुरुपयोग और जातीय टिप्पणियों जैसी गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन इन मामलों में अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग से अनुरोध किया कि इन शिकायतों की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायतों के निपटारे में कहीं किसी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात तो नहीं हुआ। उनका कहना है कि यदि किसी खिलाड़ी ने साहस जुटाकर शिकायत दर्ज कराई है तो उसे न्याय मिलना चाहिए और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। असुंता ने यह भी कहा कि महिला खिलाड़ियों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए जहां वे बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें और उन्हें शिकायत दर्ज कराने के कारण किसी प्रकार की प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
जनवरी 2025 से लंबित शिकायतों का किया उल्लेख
पत्र में असुंता लकड़ा ने दावा किया है कि जनवरी 2025 से यौन उत्पीड़न से संबंधित पांच गंभीर शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन अब तक उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील मामलों में देरी न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करती है और इससे पीड़ित खिलाड़ियों का भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि इन सभी मामलों की समयबद्ध समीक्षा कर यह पता लगाया जाए कि कार्रवाई में देरी क्यों हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो संबंधित लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। असुंता ने यह भी मांग की कि भविष्य में ऐसी शिकायतों के निपटारे के लिए स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए ताकि खिलाड़ियों को न्याय पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
हॉकी इंडिया और हॉकी झारखंड के पदाधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
पूर्व कप्तान ने अपने पत्र में हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह सहित हॉकी झारखंड के अन्य पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया में कहीं किसी स्तर पर संस्थागत विफलता तो नहीं रही। उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि यदि शिकायतों को दबाने, जांच को प्रभावित करने या खिलाड़ियों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देने जैसी कोई बात सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। असुंता लकड़ा का कहना है कि खेल संस्थाओं की जिम्मेदारी केवल खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। यदि किसी संस्था में शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया कमजोर है तो उसे मजबूत बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
साक्ष्य सुरक्षित रखने और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग
अपने पत्र में असुंता लकड़ा ने राष्ट्रीय महिला आयोग से यह भी अनुरोध किया कि जांच पूरी होने तक सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, हॉकी अकादमी और हॉकी इंडिया से जुड़े दस्तावेजों सहित अन्य आवश्यक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है ताकि जांच के दौरान किसी भी प्रकार के साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके। इसके अलावा उन्होंने शिकायत करने वाली महिला खिलाड़ियों और उनके समर्थन में आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी शिकायतकर्ता को प्रताड़ना, दबाव या धमकी का सामना नहीं करना चाहिए। निष्पक्ष जांच और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा ही ऐसे मामलों में न्याय की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माने जाते हैं। यह मामला अब राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष पहुंच चुका है। आयोग द्वारा आगे क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर खिलाड़ियों, खेल संगठनों और खेल प्रेमियों की नजर बनी हुई है। मामले की जांच और आयोग के निर्णय के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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