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झारखंड में मलेरिया से मौत के बाद सरकार अलर्ट: सभी उपायुक्तों को स्वास्थ्य विभाग के सख्त निर्देश

Jamshedpur News: झारखंड में मलेरिया से हुई मौतों और लगातार बढ़ते संक्रमण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र जारी कर मलेरिया की रोकथाम, नियंत्रण और निगरानी को लेकर तत्काल प्रभाव से व्यापक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। विशेष रूप से पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका क्षेत्र में सामने आए मामलों के बाद प्रशासनिक और स्वास्थ्य तंत्र को सक्रिय किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मलेरिया मामलों में वृद्धि के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में

स्वास्थ्य विभाग ने जिले में मलेरिया से हुई मौतों और बढ़ते संक्रमण को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती माना है। इसी को देखते हुए विभाग ने सभी जिलों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों को निर्देशित किया है कि मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। इसके तहत प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, मरीजों की शीघ्र जांच और समय पर इलाज सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है ताकि स्थिति गंभीर न हो।

तीन स्तरीय निगरानी व्यवस्था लागू करने का फैसला

मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने त्रिस्तरीय समीक्षा और निगरानी प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत नियमित अंतराल पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और जिलेवार रिपोर्ट राज्य स्तर पर भेजी जाएगी। निर्देश के अनुसार सिविल सर्जन प्रत्येक 15 दिनों पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों के साथ समीक्षा करेंगे। इन बैठकों में मरीजों की संख्या, जांच की स्थिति, दवा वितरण और रोकथाम संबंधी गतिविधियों का आकलन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी क्षेत्र में संक्रमण फैलने की स्थिति बनने से पहले कार्रवाई हो सके।

प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान और जवाबदेही तय

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन क्षेत्रों में लगातार मलेरिया के मामले सामने आ रहे हैं, वहां युद्धस्तर पर अभियान चलाया जाए। स्थानीय प्रशासन को कार्ययोजना तैयार कर निगरानी बढ़ाने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा गया है। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक स्तर पर कार्यों की नियमित समीक्षा हो और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त स्वास्थ्य संसाधनों की व्यवस्था भी की जाए। इससे प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया और नियंत्रण की क्षमता मजबूत होगी।

एमपीडब्ल्यू और सहियाओं के माध्यम से होगा एक्टिव सर्वे

जिन इलाकों में बुखार के मरीज अधिक मिल रहे हैं, वहां बहुद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एमपीडब्ल्यू) और सहियाओं के माध्यम से सक्रिय सर्वेक्षण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इस अभियान के दौरान घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी ली जाएगी और बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान कर उनकी जांच कराई जाएगी। विभाग का मानना है कि एक्टिव सर्वे के जरिए संक्रमण की शुरुआती पहचान संभव होगी और समय रहते उपचार शुरू किया जा सकेगा।

मलेरिया की आशंका वाले मरीजों की तत्काल जांच और इलाज

स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि जिन मरीजों में मलेरिया के लक्षण दिखाई दें, उनकी बिना देरी जांच की जाए। यदि जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो तत्काल मलेरिया रोधी दवाओं से उपचार शुरू किया जाए। इसके साथ ही गंभीर मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों को पर्याप्त दवाएं, जांच संसाधन और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रखने को कहा गया है।

उपचार, फॉलोअप और अस्पतालों में विशेष तैयारी

सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि मरीजों के इलाज के साथ उनका फॉलोअप भी सुनिश्चित किया जाए। जिन मरीजों की स्थिति गंभीर हो, उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि मलेरिया नियंत्रण केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि लगातार निगरानी, सामुदायिक जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप से ही संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस अभियान की नियमित समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम भी उठाए जाएंगे।

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