शिक्षा से सशक्त होगा आदिवासी समाज, परंपरा और संगठन को मजबूत करने का संकल्प

घोड़ाबांधा में आदिवासी मुंडा समाज केंद्रीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित

Jamshedpur News : जमशेदपुर के घोड़ाबांधा में रविवार को आदिवासी मुंडा समाज केंद्रीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय समिति के अध्यक्ष नंदलाल पातर ने की। इसमें शहर और आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। बैठक का उद्देश्य समाज की एकता को मजबूत करना, पारंपरिक व्यवस्था को संरक्षित रखना तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप समाज को संगठित करना था। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और पोटका विधानसभा क्षेत्र की पूर्व प्रत्याशी डॉ. मीरा मुंडा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बैठक का माहौल पूरी तरह सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक संरक्षण और समाज के विकास के संकल्प से ओत-प्रोत रहा।

शिक्षा ही आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत : अर्जुन मुंडा

बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी शिक्षा में निहित होती है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज तभी हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकेगा, जब प्रत्येक परिवार अपने बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक ज्ञान और पारंपरिक मूल्यों दोनों से जोड़कर रखें। अर्जुन मुंडा ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने स्वास्थ्य के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि स्वस्थ समाज ही मजबूत समाज बन सकता है। इसलिए शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर दिया गया विशेष जोर

बैठक में डॉ. मीरा मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और रीति-रिवाज हैं। यदि इन्हें सुरक्षित रखा जाएगा, तभी आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहेंगी। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाना आवश्यक है, लेकिन अपनी परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को छोड़ना उचित नहीं होगा। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे अपनी मातृभाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करें, पारंपरिक त्योहारों और सामाजिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा बच्चों को भी अपनी संस्कृति से परिचित कराएं। बैठक में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

संगठन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए होगा केंद्रीय समिति का पुनर्गठन

बैठक के दूसरे सत्र में आदिवासी मुंडा समाज केंद्रीय समिति के पुनर्गठन पर विस्तृत चर्चा की गई। समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने संगठन को अधिक सक्रिय, पारदर्शी और प्रभावशाली बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जल्द ही केंद्रीय समिति का पुनर्गठन किया जाएगा, ताकि समाज के प्रत्येक क्षेत्र और शाखा का बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। बैठक में यह भी तय किया गया कि नई समिति समाज के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करेगी। साथ ही युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया, जिससे संगठन भविष्य की चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सके।

विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने साझा किए अपने विचार

बैठक में पोटका, सीतारामडेरा, बारीडीह, बिरसानगर, मानगो, आदित्यपुर, सोपोडेरा, घोड़ाबांधा, बहरागोड़ा, बारीगोड़ा, कीताडीह और घाघीडीह सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्र की सामाजिक परिस्थितियों और चुनौतियों पर विचार रखे। सभी ने शिक्षा, सामाजिक एकता, युवाओं की भागीदारी, पारंपरिक व्यवस्था के संरक्षण तथा समाज के आर्थिक सशक्तिकरण जैसे विषयों पर अपने सुझाव दिए। बैठक का संचालन रामसिंह मुंडा और मनोज मुंडा ने किया। कार्यक्रम में एतवा मुंडा, बीएन पातर, प्रकाश सांडिल, धानसिंह मुंडा, कृष्णा सांडिल, अर्जुन सांडिल, अशोक कुमार सांडिल, प्रभुराम मुंडा, चमरू नाग, शंकर सांडिल, हरि सिंह सांडिल, लखन सांडिल, पार्वती, विकास मुंडा, महेश मुंडा, गणेश राम सांडिल, मधु मुंडा, करम सिंह मुंडा, जमुना नाग, गीता सिंह मुंडा, बसेना मुंडा, रमेश बासा, रामधन बासा, रजबरी बासा, विकास सामंत, संतोष सामंत, नंदकिशोर सिंह, शैलेंद्र सामंत, जगन्नाथ, घासीराम सामंत, अनूप सोलंकी सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

एकता, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का लिया गया संकल्प

बैठक का समापन समाज की एकता, संगठनात्मक मजबूती और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय में समाज को शिक्षा, तकनीक और आर्थिक प्रगति के साथ आगे बढ़ना होगा, लेकिन अपनी परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। सभी प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि शिक्षा के प्रसार, युवाओं के नेतृत्व विकास, महिलाओं की भागीदारी, स्वास्थ्य जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण को प्राथमिकता देकर ही आदिवासी मुंडा समाज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। बैठक ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब समाज संगठित रहेगा, अपनी संस्कृति पर गर्व करेगा और शिक्षा को प्राथमिकता देगा, तभी वह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से अधिक सशक्त बन सकेगा। यह आयोजन आदिवासी समाज के भविष्य को नई दिशा देने और सामुदायिक नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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