जमशेदपुर में भारत आदिवासी पार्टी राष्ट्रपति के नाम डीसी को सौंपा ज्ञापन, विधायक चैतर वसावा की रिहाई की मांग की

 Jamshedpur News : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले की औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) की पूर्वी सिंहभूम जिला इकाई की ओर से देश के आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और जनप्रतिनिधियों पर हो रहे कथित अत्याचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पार्टी के जिला अध्यक्ष मदन मोहन सोरेन के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल साकची स्थित उपायुक्त (डीसी) कार्यालय पहुंचा। यहाँ उन्होंने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नाम एक विस्तृत और गंभीर ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से गुजरात के डेडियापाड़ा से विधायक चैतर भाई वसावा के मामले में तत्काल राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई गई है।




विधायक चैतर भाई वसावा के मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

भारत आदिवासी पार्टी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से गुजरात के डेडियापाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय आदिवासी विधायक चैतर भाई वसावा का मुद्दा उठाया गया है। पार्टी का आरोप है कि विधायक वसावा को एक राजनीतिक साजिश के तहत झूठे मामलों में फंसाया गया है ताकि वे आदिवासियों की आवाज न उठा सकें।
ज्ञापन में भारत के संविधान के अनुच्छेद 72 (Article 72) का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय समीक्षा करने का आग्रह किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि महामहिम राष्ट्रपति स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं और वे इस वर्ग की पीड़ा और संघर्ष को भली-भांति समझती हैं। इसलिए, उन्हें इस मामले में अपनी संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि एक जनप्रतिनिधि को न्याय मिल सके।

पांचवीं अनुसूची और वन अधिकारों पर राज्यपालों की बैठक बुलाने का अनुरोध

प्रतिनिधिमंडल ने देश के भीतर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की शासन व्यवस्था को लेकर भी चिंता जाहिर की। ज्ञापन में राष्ट्रपति से यह विशेष अनुरोध किया गया है कि वे देश के उन सभी राज्यों के राज्यपालों की एक उच्च स्तरीय और आपातकालीन बैठक बुलाएं, जहां पांचवीं अनुसूची लागू है। पार्टी का मानना है कि पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के पारंपरिक और कानूनी अधिकार सुरक्षित होने चाहिए। लेकिन वर्तमान में वन कानूनों की आड़ में स्थानीय मूलनिवासियों को उनकी ही जमीन से बेदखल करने की कोशिशें की जा रही हैं। राज्यपालों की बैठक के माध्यम से इन क्षेत्रों में वन अधिकार कानून के कड़ाई से पालन और आदिवासियों के संरक्षण की रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए।

आदिवासी आंदोलनकारियों पर फर्जी मुकदमों के खिलाफ आक्रोश

डीसी कार्यालय के समक्ष मीडिया और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भारत आदिवासी पार्टी के जिला अध्यक्ष मदन मोहन सोरेन ने केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश भर में एक खतरनाक ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जो भी आदिवासी समाज का व्यक्ति या जनप्रतिनिधि अपने हक-अधिकार, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन करता है, उसे अपराधी की तरह पेश किया जाता है। मदन मोहन सोरेन ने कहा कि देश भर में जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने वाले आदिवासी आंदोलनकारियों व जनप्रतिनिधियों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है और भारतीय लोकतंत्र के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक है।

देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाने का बड़ा ऐलान

इस दौरान भारत आदिवासी पार्टी ने यह साफ कर दिया कि वे इस लड़ाई को केवल ज्ञापनों तक सीमित नहीं रखेंगे। यदि सरकार और संबंधित संस्थान आदिवासियों के दमन को तुरंत नहीं रोकते हैं, तो पार्टी सड़कों पर उतरकर एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी। इसके तहत आने वाले दिनों में आदिवासियों के संवैधानिक, सामाजिक और भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए पूरे देश में एक व्यापक देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य सुदूर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है ताकि वे संगठित होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ सकें।

संगठन के कई सदस्य थे मौजूद

इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में भारत आदिवासी पार्टी की एकजुटता और सांगठनिक ताकत साफ तौर पर देखने को मिली। जिला मुख्यालय पर बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता और स्थानीय आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक नारों के साथ एकत्रित हुए थे। इस महत्वपूर्ण अवसर पर जिला अध्यक्ष मदन मोहन सोरेन के साथ मुख्य रूप से पार्टी के प्रदेश महासचिव कृष्णा हांसदा, दामू प्रमाणिक, सुनील रजक और नवीन हांसदा सहित दर्जनों सक्रिय कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने एक सुर में कहा कि जब तक विधायक चैतर भाई वसावा को न्याय नहीं मिल जाता और पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में आदिवासियों के अधिकारों की बहाली सुनिश्चित नहीं होती, तब तक उनका यह वैधानिक संघर्ष जारी रहेगा।

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