झारखंड हॉकी: यौन उत्पीड़न के आरोपों से मचा विवाद

रांची में पूर्व भारतीय कप्तान असुंता लकड़ा ने लगाए गंभीर आरोप

Jharkhand News: झारखंड हॉकी एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। भारत की पूर्व महिला हॉकी कप्तान असुंता लकड़ा ने झारखंड के एक हॉकी कोच पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि खिलाड़ियों की शिकायतों को लंबे समय तक दबाया गया और राज्य हॉकी एसोसिएशन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उनके अनुसार, यदि समय रहते कार्रवाई होती तो कई महिला खिलाड़ियों को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना नहीं करना पड़ता। असुंता लकड़ा ने कहा कि यह मामला किसी एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि कई महिला खिलाड़ियों ने अलग-अलग समय पर आपबीती साझा की है। हालांकि डर और भविष्य खराब होने की आशंका के कारण अधिकांश खिलाड़ी खुलकर सामने नहीं आ सकीं। उनका कहना है कि अब सच्चाई सामने लाने का समय आ गया है ताकि आने वाली पीढ़ी की खिलाड़ी सुरक्षित माहौल में खेल सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की छवि खराब करना नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करना है। यदि खेल संस्थानों में सुरक्षित वातावरण नहीं होगा, तो प्रतिभाशाली खिलाड़ी आगे बढ़ने से हिचकेंगे।

कोच सुधीर गोला और स्टेट एसोसिएशन पर उठे सवाल


असुंता लकड़ा ने आरोप लगाया कि संबंधित कोच की पहचान सुधीर गोला के रूप में की जा सकती है, जिन्हें झारखंड में प्रशिक्षण केंद्र की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके अनुसार, पिछले एक-दो वर्षों से वह टीम के प्रबंधन और खिलाड़ियों के साथ लगातार जुड़े रहे। इसी दौरान कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनकी जानकारी खिलाड़ियों ने आपस में साझा की, लेकिन आधिकारिक स्तर पर उन पर ध्यान नहीं दिया गया। लकड़ा का कहना है कि कुछ लोगों ने पहले भी कोच के व्यवहार को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन उन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआती शिकायतों पर उचित जांच होती, तो मामला इतना आगे नहीं बढ़ता। पूर्व कप्तान ने यह भी आरोप लगाया कि एसोसिएशन ने खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय कोच का बचाव करने का प्रयास किया। इससे खिलाड़ियों का विश्वास खेल प्रशासन पर कमजोर हुआ और कई खिलाड़ी मानसिक तनाव में रहीं। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।

खिलाड़ियों ने साझा किए अनुभव, कई अब भी चुप


असुंता लकड़ा ने बताया कि जब आंतरिक जांच की प्रक्रिया शुरू हुई तो कुछ खिलाड़ियों ने साहस दिखाते हुए अपनी बात रखी, जबकि कई खिलाड़ी अब भी खुलकर सामने आने से डर रही हैं। उनका कहना है कि खेल जगत में करियर खत्म होने का डर, चयन से बाहर किए जाने की आशंका और सामाजिक दबाव के कारण कई पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज नहीं करा पातीं। उन्होंने दावा किया कि कुछ खिलाड़ियों ने हॉस्टल, प्रशिक्षण शिविर और टीम के साथ यात्रा के दौरान हुई घटनाओं की जानकारी दी। कई खिलाड़ियों ने यह भी कहा कि अनुचित व्यवहार लंबे समय तक चलता रहा, लेकिन शिकायत करने पर कार्रवाई होने की उम्मीद नहीं थी। पूर्व कप्तान ने कहा कि खिलाड़ियों की चुप्पी को उनकी सहमति नहीं माना जाना चाहिए। कई बार पीड़ित मानसिक दबाव और भय के कारण बोल नहीं पाते। इसलिए जांच एजेंसियों और खेल संगठनों को संवेदनशीलता के साथ पूरे मामले की पड़ताल करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि खिलाड़ियों को सुरक्षित और गोपनीय माहौल मिलेगा, तो अधिक से अधिक लोग सामने आकर सच बताएंगे।

ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य सबूत होने का दावा


असुंता लकड़ा ने कहा कि उनके पास आरोपों का समर्थन करने वाले कुछ साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित कई ऐसी जानकारियां हैं, जो जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत की जा सकती हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल सुनी-सुनाई बात नहीं है, बल्कि कई खिलाड़ियों से सीधे बातचीत के बाद उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक की है। उनका कहना है कि यदि संबंधित एजेंसियां निष्पक्ष जांच करेंगी तो सच्चाई सामने आ जाएगी। लकड़ा ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन खिलाड़ियों ने उनके साथ अपनी पीड़ा साझा की है, उनकी पहचान गोपनीय रखी जानी चाहिए ताकि उन पर किसी प्रकार का दबाव न बने। उन्होंने जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और खिलाड़ियों के बयान निष्पक्ष वातावरण में दर्ज करने की भी मांग की।

टीम यात्रा और प्रशिक्षण शिविर से जुड़े आरोप


पूर्व कप्तान के अनुसार, कथित अनुचित व्यवहार केवल एक-दो घटनाओं तक सीमित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि टीम के साथ यात्रा, टूर्नामेंट, हॉस्टल और प्रशिक्षण शिविर के दौरान भी कई बार खिलाड़ियों ने असहज परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने बताया कि एक खिलाड़ी ने आरोप लगाया था कि मैच के बाद यात्रा के दौरान उसे बार-बार फोन कर मिलने के लिए दबाव बनाया गया। वहीं कुछ खिलाड़ियों ने प्रशिक्षण केंद्र में भी अनुचित व्यवहार होने की जानकारी दी। लकड़ा ने कहा कि खेल संस्थानों में खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि प्रशिक्षक या अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का दुरुपयोग करते हैं तो यह पूरे खेल तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी प्रशिक्षण केंद्रों में महिला शिकायत प्रकोष्ठ, सीसीटीवी निगरानी, नियमित काउंसलिंग और स्वतंत्र शिकायत प्रणाली लागू की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

निष्पक्ष जांच और खिलाड़ियों की सुरक्षा की मांग


असुंता लकड़ा ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक देश का प्रतिनिधित्व किया है और उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि महिला खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी तो सच सामने आएगा और खिलाड़ियों का विश्वास भी बहाल होगा। उन्होंने राज्य सरकार, खेल विभाग और संबंधित संस्थाओं से आग्रह किया कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही खिलाड़ियों की पहचान और सम्मान की रक्षा करते हुए जांच प्रक्रिया पूरी की जाए। यह मामला झारखंड के खेल जगत के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित जांच एजेंसियां और खेल प्रशासन इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं। निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही खिलाड़ियों का भरोसा कायम रखने का सबसे प्रभावी तरीका होगा।

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