सोरा पेंटिंग से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: सुंदरनगर की 40 महिलाओं को मिला प्रमाणपत्र, अब रोजगार की राह होगी आसान

Jamshedpur News: जमशेदपुर के सुंदरनगर क्षेत्र स्थित केरुआडुंगरी पंचायत में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल सफलतापूर्वक पूरी हुई। एक माह तक चले सोरा पेंटिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के साथ 40 ग्रामीण महिलाओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन महिलाओं के लिए नए जीवन की शुरुआत है, जो अब अपनी कला के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। पंचायत के मुखिया कान्हू मुर्मू और अबीरा संस्था के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं को उनकी पारंपरिक कला से जोड़ते हुए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने का रास्ता खोला है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने सोरा पेंटिंग की बारीकियां सीखीं और अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

एक माह के प्रशिक्षण में निखरी महिलाओं की कला

प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल 40 महिलाओं ने पूरे समर्पण और उत्साह के साथ सोरा पेंटिंग की विभिन्न तकनीकों को सीखा। प्रशिक्षक सोनाराम सोरेन ने उन्हें पारंपरिक डिजाइन, रंगों के संतुलन और आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया। समापन समारोह में महिलाओं द्वारा तैयार किए गए सोरा पेंटिंग के आकर्षक उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में मौजूद सभी लोगों ने महिलाओं की मेहनत और रचनात्मकता की सराहना की। प्रशिक्षण के दौरान तैयार उत्पादों का मूल्यांकन भी किया गया, जिससे महिलाओं को अपनी कला में और सुधार करने की प्रेरणा मिली। प्रमाणपत्र मिलने के बाद महिलाओं के चेहरों पर आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था। कई प्रतिभागियों ने कहा कि अब वे इस कला को अपने परिवार की आय का स्थायी स्रोत बनाना चाहती हैं।

प्रशिक्षण के बाद भी मिलेगा रोजगार और मार्केटिंग का सहयोग

अबीरा संस्था की अध्यक्ष श्वेता ने बताया कि संस्था केवल प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं रहेगी। आने वाले दो महीनों के भीतर महिलाओं के लिए लेवल-2 और लेवल-3 का उन्नत प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाएगा, ताकि उनकी कला और अधिक विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित महिलाओं को उत्पादन कार्य के लिए नियमित ऑर्डर उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। साथ ही उनके द्वारा तैयार किए गए सोरा पेंटिंग उत्पादों की मार्केटिंग में भी संस्था पूरा सहयोग करेगी। इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि महिलाओं को केवल कौशल नहीं सिखाया जा रहा, बल्कि उन्हें बाजार से जोड़कर स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

मुखिया कान्हू मुर्मू की सोच बनी बदलाव की प्रेरणा

केरुआडुंगरी पंचायत के मुखिया कान्हू मुर्मू ने कहा कि पंचायत का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देकर औपचारिकता पूरी करना नहीं है, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है। उन्होंने बताया कि पंचायत भविष्य में भी विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम संचालित करेगी, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर मिल सकें। उनका मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी तो पूरे परिवार और समाज का विकास स्वतः होगा। मुखिया ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को सही मंच और मार्गदर्शन मिले तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकती हैं। पंचायत इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम

समारोह को संबोधित करते हुए माझी बाबा दुर्गाचरण मुर्मू ने कहा कि पंचायत लगातार महिलाओं के स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएं। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल नौकरी ही रोजगार का विकल्प नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के पास कौशल है तो वह स्वयं भी रोजगार पैदा कर सकता है और दूसरों को भी रोजगार दे सकता है। सोरा पेंटिंग जैसी पारंपरिक कला ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का प्रभावी माध्यम बन सकती है। इस कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि पारंपरिक जनजातीय कला को आधुनिक बाजार से जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

परंपरा, कला और आत्मनिर्भर भारत का सुंदर संगम

केरुआडुंगरी पंचायत का यह प्रयास केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण का प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है। सोरा पेंटिंग जैसी पारंपरिक कला को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे रोजगार का माध्यम बनाना वास्तव में आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूत करता है। समापन समारोह में अबीरा संस्था की अध्यक्ष श्वेता, जमशेदपुर वीमेंस क्लब की अध्यक्ष रीना वेदागिरी, माझी बाबा दुर्गाचरण मुर्मू, पंचायत के मुखिया कान्हू मुर्मू, वार्ड सदस्य सरोती हेंब्रम, लक्ष्मी हेंब्रम, पानोसोती मार्डी, नायके बाबा हबीराम मुर्मू, प्रशिक्षक सोनाराम सोरेन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह पहल उन हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपनी पारंपरिक कला और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं। यदि ऐसे प्रयास लगातार जारी रहे तो न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि झारखंड की समृद्ध जनजातीय कला को भी राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

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