टाटा स्टील वेस्ट बोकारो ने डीजीएमएस के 125 वर्ष पूरे होने पर चलाया वृक्षारोपण अभियान, हाइड्रोसीडिंग तकनीक की हुई शुरुआत

TATA STEEL: टाटा स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन में पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के 125वें स्थापना वर्ष के ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत न केवल बड़े पैमाने पर पौधे लगाए गए, बल्कि खनन क्षेत्रों में हरियाली को तेजी से बढ़ाने के लिए एक आधुनिक तकनीक की शुरुआत भी की गई। टाटा स्टील हमेशा से ही अपने खनन क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रही है और यह आयोजन उसी कड़ी का एक हिस्सा है।

सर दोराबजी टाटा पार्क में 120 से ज्यादा फलदार पौधे रोपे गए
इस विशेष अभियान के तहत वेस्ट बोकारो में स्थित सर दोराबजी टाटा पार्क को वृक्षारोपण के लिए चुना गया। कार्यक्रम के दौरान पार्क परिसर में 120 से अधिक फलदार पौधे लगाए गए। पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए इस अभियान में मुख्य रूप से आम, अमरूद और बेल जैसे पारंपरिक और छायादार पौधों का चयन किया गया। इन पौधों के बड़े होने से न सिर्फ पार्क की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय जैव विविधता (Biodiversity) को भी बढ़ावा मिलेगा।

डीजीएमएस और टाटा स्टील के शीर्ष अधिकारी थे मौजूद  
इस गौरवशाली अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के उप महानिदेशक श्री श्याम सुंदर प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ टाटा स्टील के जनरल मैनेजर (कोल) संजय राजोरिया और वेस्ट बोकारो के जनरल मैनेजर (डेज़िग्नेट) मुकेश रंजन भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इन शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि खनन सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा को भी उद्योग जगत में कितनी प्राथमिकता दी जा रही है।

खान सुरक्षा महानिदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बढ़ाया हौसला
कार्यक्रम की महत्ता को देखते हुए डीजीएमएस के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अभियान का हिस्सा बने। इनमें निदेशक (माइनिंग) श्री अजीत कुमार, निदेशक (मैकेनिकल) श्री नरेश गोविंद फुले, उप निदेशक (माइनिंग) श्री परवेज आलम, उप निदेशक (इलेक्ट्रिकल) श्री शेख मिन्हाजुद्दीन और उप निदेशक (मैकेनिकल) श्री द्यामप्पा अडनूर शामिल थे। इन सभी अधिकारियों ने खुद पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और टाटा स्टील के इस प्रयास की सराहना की।

आधुनिक हाइड्रोसीडिंग मशीन का हुआ उद्घाटन
इस कार्यक्रम का एक सबसे तकनीकी और महत्वपूर्ण पक्ष हाइड्रोसीडिंग मशीन का उद्घाटन रहा। मुख्य अतिथि श्री श्याम सुंदर प्रसाद ने सभी गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में इस आधुनिक मशीन की शुरुआत की। इस उद्घाटन के साथ ही टाटा स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन ने अपनी पर्यावरण पुनर्स्थापन (Ecological Restoration) परियोजनाओं में पहली बार इस उन्नत और आधुनिक तकनीक को शामिल किया है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा कदम है।

क्या है हाइड्रोसीडिंग तकनीक और यह कैसे काम करती है?
हाइड्रोसीडिंग वास्तव में उन पथरीले या कठिन क्षेत्रों में घास और पौधे उगाने की एक आधुनिक वैज्ञानिक विधि है, जहां सामान्य रूप से खेती या पौधारोपण करना बहुत मुश्किल होता है। इस प्रक्रिया में बीजों, पानी, मल्च (लकड़ी का बुरादा या भूसा), जैविक उर्वरकों और पौधों के लिए जरूरी अन्य पोषक तत्वों का एक विशेष गाढ़ा मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को हाइड्रोसीडिंग मशीन के जरिए प्रभावित भूमि, विशेषकर खड़ी ढलानों और अस्थिर खदान डंपों पर तेजी से छिड़का जाता है।

सतत खनन व पर्यावरण को इस तकनीक से होने वाले लाभ
खनन के बाद प्रभावित हुए क्षेत्रों को दोबारा हरा-भरा बनाने में हाइड्रोसीडिंग तकनीक बेहद असरदार साबित होती है। इसके मुख्य लाभों में बीजों का बहुत तेजी से अंकुरित होना, मिट्टी के कटाव (Soil Erosion) पर तुरंत काबू पाना और दुर्गम व ऊंचे पहाड़ी ढलानों पर आसानी से हरियाली विकसित करना शामिल है। यह तकनीक पारंपरिक तरीकों के मुकाबले समय और लागत दोनों की बचत करती है। इसके उपयोग से टाटा स्टील को अपने सतत खनन के लक्ष्यों को हासिल करने और पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचाने में बड़ी मदद मिलेगी।

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