Jamshedpur News: जमशेदपुर के परसुडीह क्षेत्र में बढ़ते मलेरिया, डेंगू और ब्रेन मलेरिया के खतरे को देखते हुए रविवार को नामोटोला से व्यापक एंटी लार्वा छिड़काव एवं फॉगिंग अभियान की शुरुआत की गई। इस जनस्वास्थ्य अभियान का शुभारंभ पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने अपनी निजी पहल और निजी खर्च से किया। अभियान के तहत नामोटोला की गलियों, बस्तियों और जलजमाव वाले स्थानों पर एंटी लार्वा का छिड़काव, फॉगिंग मशीन के माध्यम से मच्छरों का नियंत्रण तथा गंदगी वाले स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया गया। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया।
नामोटोला से शुरू हुआ मच्छर नियंत्रण अभियान
रविवार सुबह नामोटोला में अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई। इस दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर विशेष रूप से एंटी लार्वा का छिड़काव किया गया। साथ ही फॉगिंग मशीन के जरिए पूरे इलाके में धुआं छोड़कर वयस्क मच्छरों को नष्ट करने का प्रयास किया गया। इसके अलावा जहां-जहां कूड़े-कचरे के ढेर, नालियों में गंदगी और जलजमाव की स्थिति थी, वहां ब्लीचिंग पाउडर का भी छिड़काव कराया गया। अभियान के दौरान लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने तथा मच्छरों से बचाव के उपायों की भी जानकारी दी गई।
राजकुमार सिंह अपनी निजी पहल से हर साल चलाते हैं अभियान
पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि यह अभियान किसी सरकारी योजना का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत सामाजिक पहल है। वे पिछले कई वर्षों से अपने निजी खर्च पर इस तरह का अभियान चलाते आ रहे हैं ताकि क्षेत्र के लोगों को मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि समाज का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते लोगों के सुख-दुख में साथ खड़ा रहना उनका दायित्व है। बरसात के मौसम में मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में रोकथाम के उपाय करना बेहद जरूरी है।
परसुडीह थाना क्षेत्र की 21 पंचायतों में चलेगा अभियान
राजकुमार सिंह ने जानकारी दी कि नामोटोला से शुरू हुआ यह अभियान अब चरणबद्ध तरीके से पyरसुडीह थाना क्षेत्र की करीब 21 पंचायतों तक पहुंचेगा। उनके प्रतिनिधि प्रतिदिन अलग-अलग पंचायतों और बस्तियों में जाकर एंटी लार्वा का छिड़काव, फॉगिंग और ब्लीचिंग का कार्य करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य केवल मच्छरों का नियंत्रण करना ही नहीं, बल्कि लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना भी है। जिन क्षेत्रों में जलजमाव या गंदगी अधिक होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर अभियान चलाया जाएगा ताकि बीमारी फैलने की संभावना को कम किया जा सके।
मलेरिया और ब्रेन मलेरिया के बढ़ते खतरे के बीच राहत की पहल
इन दिनों पूर्वी सिंहभूम जिले के कई हिस्सों में मलेरिया और ब्रेन मलेरिया के मामले सामने आ रहे हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा हो रहा है, जो मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। इसी स्थिति को देखते हुए यह अभियान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि समय पर एंटी लार्वा छिड़काव, नियमित फॉगिंग और स्वच्छता अभियान से मच्छरों की संख्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के प्रसार पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
लोगों से साफ-सफाई बनाए रखने की अपील
अभियान के दौरान राजकुमार सिंह ने क्षेत्रवासियों से अपील करते हुए कहा कि केवल फॉगिंग और दवा का छिड़काव ही पर्याप्त नहीं है। यदि लोग अपने घरों और आसपास साफ-सफाई नहीं रखेंगे तो मच्छरों का प्रकोप पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि घरों की छतों, गमलों, पुराने टायरों, कूलरों, ड्रमों तथा अन्य बर्तनों में पानी जमा न होने दें। नालियों की नियमित सफाई करें और आसपास कूड़ा-कचरा इकट्ठा न होने दें। यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर थोड़ी सावधानी बरते तो मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।
जनभागीदारी से ही सफल होगा स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान
स्थानीय लोगों ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि बरसात के मौसम में इस तरह की पहल बेहद आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक मिलकर स्वच्छता एवं मच्छर नियंत्रण के लिए कार्य करें तो क्षेत्र में बीमारियों के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है। परसुडीह के नामोटोला से शुरू हुआ यह एंटी लार्वा और फॉगिंग अभियान केवल दवा छिड़काव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि यह अभियान निर्धारित योजना के अनुसार सभी 21 पंचायतों तक प्रभावी ढंग से पहुंचता है, तो निश्चित रूप से मलेरिया और ब्रेन मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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