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संताल हूल दिवस 2026: अन्याय के खिलाफ संघर्ष और स्वाभिमान की प्रेरणा है हूल: महाबीर मुर्मू

जमशेदपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों में संताल हूल दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित

Jamshedpur News: संताल हूल दिवस के अवसर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता महाबीर मुर्मू ने विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर जमशेदपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने संताल हूल आंदोलन के महानायक वीर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो तथा हूल आंदोलन के सभी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रमों का आयोजन भूइंयाडीह, झामुमो संपर्क कार्यालय बागबेड़ा रानीडीह, सुंदरनगर खुकड़ाडीह, परसुडीह बागान टोला तथा घाटशिला के खोरसौती गांव सहित कई स्थानों पर किया गया। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक और झामुमो समर्थक उपस्थित रहे।

संताल हूल केवल विद्रोह नहीं, स्वाभिमान और अधिकार की लड़ाई थी

श्रद्धांजलि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाबीर मुर्मू ने कहा कि 30 जून 1855 का दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन झारखंड के भोगनाडीह से सिदो-कान्हू के नेतृत्व में संताल हूल आंदोलन की शुरुआत हुई थी।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह नहीं था, बल्कि जमींदारी शोषण, अन्याय, सामाजिक असमानता और दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ स्वतंत्रता, सम्मान और अधिकारों की ऐतिहासिक लड़ाई थी। हूल आंदोलन ने आदिवासी समाज को आत्मसम्मान और अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी।

नई पीढ़ी को इतिहास से सीखने की जरूरत

महाबीर मुर्मू ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को अपने इतिहास और संघर्षों को याद रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संताल हूल दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं बल्कि सामाजिक चेतना और जागरूकता का संदेश देने वाला अवसर है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने इतिहास को जानें, अपने समाज की विरासत को समझें और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की परंपरा को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि सिद्धू-कान्हू ने समाज को यह संदेश दिया कि किसी भी परिस्थिति में अन्याय के सामने झुकना नहीं चाहिए।

विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में दिखी सामाजिक एकता

कार्यक्रमों के दौरान लोगों ने वीर शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उपस्थित लोगों ने हूल आंदोलन के इतिहास और उसके सामाजिक प्रभावों पर चर्चा की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि संताल हूल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रारंभिक जनआंदोलनों में से एक माना जाता है, जिसने सामाजिक न्याय और जनअधिकार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कार्यक्रमों में स्थानीय संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता की भावना भी देखने को मिली।

समाज के विभिन्न वर्गों की रही भागीदारी

इस आयोजन में अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। मुख्य रूप से रायसेन सोरेन, गोल्डी तिवारी, बहादुर किस्कू, पलटन मुर्मू, मनोज तांती, दुर्गा हांसदा, उज्ज्वल दास, कोला मुखी, राजन कैबरता, सुनील गुप्ता, संतोष लकड़ा, तन्मय सरकार, राहुल श्रीवास्तव, अक्षय शर्मा और झरना पॉल सहित कई लोग उपस्थित रहे। सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में हूल आंदोलन के शहीदों के योगदान को याद किया और उनके विचारों को समाज तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

हूल दिवस से मिला संघर्ष और सम्मान का संदेश

कार्यक्रम के अंत में महाबीर मुर्मू ने कहा कि संताल हूल दिवस हमें अन्याय, शोषण और असमानता के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि हूल केवल इतिहास नहीं बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी एक चेतना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शहीदों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और सामाजिक न्याय, समानता तथा सम्मानपूर्ण समाज निर्माण की दिशा में कार्य करें।

महाबीर मुर्मू ने संताल हूल दिवस पर वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता महाबीर मुर्मू ने संताल हूल दिवस के अवसर पर जमशेदपुर और घाटशिला क्षेत्र के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होकर वीर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो एवं हूल आंदोलन के सभी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि हूल आंदोलन केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह नहीं बल्कि स्वाभिमान, अधिकार और सामाजिक न्याय की लड़ाई थी। उन्होंने युवाओं से इतिहास को जानने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी रही।बहादुर किस्कू ने हूल दिवस पर सामाजिक एकता का संदेश दिया

संताल हूल दिवस के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि

कार्यक्रम में बहादुर किस्कू ने भाग लेकर वीर शहीदों को नमन किया। उन्होंने कहा कि हूल आंदोलन समाज को अन्याय और शोषण के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को अपने इतिहास और विरासत से जुड़ने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने शहीदों के योगदान को याद किया तथा सामाजिक एकजुटता और जनअधिकार की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।पलटन मुर्मू ने युवाओं से इतिहास जानने की अपील की

संताल हूल आंदोलन संघर्ष, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना का प्रतीक 
संताल हूल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पलटन मुर्मू ने वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संताल हूल आंदोलन संघर्ष, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से अपने इतिहास को समझने और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शहीदों के बलिदान को याद रखना समाज की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने हूल आंदोलन के आदर्शों को आगे बढ़ाने तथा सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया।


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