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संताल हूल दिवस 2026: जाहेर थान कमिटी ने वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि, इतिहास और संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प

Jamshedpur News: संताल समाज के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता संघर्ष और वीर शहीदों के अद्वितीय बलिदान को स्मरण करते हुए जाहेर थान कमिटी द्वारा संताल हूल दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और हूल आंदोलन के महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में लगभग 100 गणमान्य नागरिक, समिति के पदाधिकारी, सदस्य, महिला एवं युवा प्रतिनिधि तथा समाज के बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शहीदों को नमन करना नहीं था, बल्कि समाज के युवाओं को अपने इतिहास, संस्कृति, भाषा और परंपराओं से जोड़ने का संदेश देना भी था। पूरे आयोजन में सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया गया।

स्वागत संबोधन में समाज की अस्मिता और इतिहास संरक्षण पर जोर

कार्यक्रम का शुभारंभ जाहेर थान कमिटी के अध्यक्ष श्री गणेश टुडू की अध्यक्षता में हुआ। शुरुआत समिति के चेयरमैन श्री छुटाई सोरेन के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि संताल हूल केवल एक ऐतिहासिक आंदोलन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान, सम्मान और स्वतंत्रता के संघर्ष का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना आवश्यक है। ऐसे आयोजन समाज के इतिहास को जीवित रखने के साथ-साथ युवाओं में सामाजिक चेतना और सामुदायिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि भाषा, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं।

शिक्षा, एकता और सामाजिक उत्थान का आह्वान

अपने अध्यक्षीय संबोधन में जाहेर थान समिति के अध्यक्ष श्री गणेश टुडू ने कहा कि संताल हूल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि सिद्धू-कान्हू एवं अन्य वीर शहीदों का बलिदान आज भी समाज को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने समाज में शिक्षा को प्राथमिकता देने, सामाजिक समरसता को मजबूत करने और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर बल दिया। साथ ही युवाओं से समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने तथा नेतृत्व क्षमता विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब उसकी नई पीढ़ी अपनी पहचान और विरासत के साथ आधुनिक शिक्षा को भी अपनाए।

संताल हूल का इतिहास: अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की अमर गाथा

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जाहेर थान कमिटी के संस्थापक-सह-न्यासी सीआर. माझी का विस्तृत ऐतिहासिक व्याख्यान रहा। उन्होंने संताल हूल आंदोलन के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि 30 जून 1855 को भोगनाडीह से सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में ऐतिहासिक विद्रोह की शुरुआत हुई थी। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन में उनके भाइयों चाँद मुर्मू और भैरव मुर्मू के साथ वीरांगनाएं फूलो मुर्मू एवं झानो मुर्मू भी अग्रणी भूमिका में थीं। यह आंदोलन अंग्रेजी शासन, जमींदारों, महाजनों और साहूकारों द्वारा किए जा रहे आर्थिक एवं सामाजिक शोषण के विरुद्ध था। उन्होंने कहा कि उस समय भूमि हड़पने, अत्यधिक कर वसूली और ऋण के नाम पर किए जा रहे उत्पीड़न से संताल समाज परेशान था। इसी अन्याय के खिलाफ हजारों संताल वीरों ने संगठित होकर संघर्ष का मार्ग चुना।

युवाओं को संस्कृति और शिक्षा से जोड़ने का संदेश

कार्यक्रम के दौरान जाहेर थान कमिटी के सदस्य श्री सागेन हांसदा ने अपने विचार रखते हुए समाज में शिक्षा, संगठन और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संताल हूल के वीरों के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं और इन्हें अपनाकर समाज विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए आधुनिक शिक्षा और नेतृत्व क्षमता को विकसित करें। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक एकता, शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना ही समाज को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का आधार है।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन, शहीदों के आदर्शों को अपनाने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में जाहेर थान कमिटी के महासचिव डॉ. रवीन्द्र मुर्मू ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने अध्यक्ष, मुख्य वक्ताओं, अतिथियों, समिति के सभी सदस्यों, स्वयंसेवकों और उपस्थित सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लगभग 100 लोगों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि संताल समाज अपने गौरवशाली इतिहास और महान शहीदों की स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर सी. आर. माझी, छुटाई सोरेन, गणेश टुडू, डॉ. रवीन्द्र नाथ मुर्मू, राम चंद्र मुर्मू, सागेन हांसदा, राजू टुडू, मानसिंह माझी, डोमन टुडू, मिरजा मुर्मू, करण सोरेन, कुशा सोरेन, स्वर्णलता बाहा मुर्मू, सुशील हेम्ब्रोम सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।


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