चांडिल डैम विस्थापितों के पुनर्वास की मांग तेज, विधायक सविता महतो ने सौंपा 19 सूत्री मांग पत्र

जमशेदपुर/आदित्यपुर: सुवर्णरेखा परियोजना से प्रभावित परिवारों के लंबे समय से लंबित पुनर्वास और भू-अर्जन संबंधी मामलों को लेकर शुक्रवार को आदित्यपुर स्थित सुवर्णरेखा परियोजना कार्यालय में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता परियोजना के प्रशासक राजीव रंजन और ईचागढ़ विधायक सविता महतो ने की। बैठक में चांडिल डैम से प्रभावित गांवों के लोगों की समस्याओं, पुनर्वास की स्थिति तथा लंबित मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि विस्थापित परिवारों से जुड़े सभी मामलों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को राहत मिल सके।

विधायक ने सौंपा 19 सूत्री मांग पत्र


बैठक के दौरान ईचागढ़ विधायक सविता महतो ने परियोजना प्रभावितों की ओर से प्रशासन और विभागीय अधिकारियों को 19 सूत्री मांग पत्र सौंपा। उन्होंने कहा कि चांडिल डैम परियोजना से प्रभावित 84 मौजा के 116 गांवों के लोगों का संपूर्ण पुनर्वास सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने विकास पुस्तिका, पुनर्वास अनुदान और अन्य लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने की मांग की। विधायक ने यह भी कहा कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों का पूर्ण पुनर्वास नहीं हो जाता, तब तक डैम का जलस्तर आरएल-180 मीटर से नीचे रखा जाए, ताकि प्रभावित गांवों के लोगों को किसी प्रकार की अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।


स्थानीय युवाओं को रोजगार देने पर दिया जोर


सविता महतो ने परियोजना में स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सुवर्णरेखा परियोजना के रिक्त पदों पर सबसे पहले परियोजना प्रभावित शिक्षित बेरोजगार युवाओं को नियुक्त किया जाए। इसके अलावा इंडो-डेनिश टूल रूम से प्रशिक्षण प्राप्त लगभग 400 स्थानीय युवाओं को भी उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाए। विधायक ने कहा कि जिन परिवारों ने अपनी जमीन और आजीविका परियोजना के लिए खोई है, उन्हें रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इससे विस्थापित परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे और पुनर्वास की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी होगी।

पुनर्वास स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं की मांग


बैठक में विधायक ने सभी 22 पुनर्वास स्थलों को आधुनिक बुनियादी सुविधाओं से विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पुनर्वास केवल जमीन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वहां सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके साथ ही आंशिक रूप से प्रभावित गांवों में युवाओं के लिए खेल मैदान विकसित करने की मांग भी रखी गई। विधायक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाएं उपलब्ध होने से युवाओं को सकारात्मक दिशा मिलेगी और ग्रामीण विकास को भी गति मिलेगी।


पर्यटन विकास और अवैध कब्जा हटाने की मांग


चांडिल डैम क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। विधायक सविता महतो ने डैम क्षेत्र में रिसॉर्ट, मार्केट कॉम्प्लेक्स तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं का विकास करने की मांग की। उनका कहना था कि इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने पुनर्वास स्थलों पर अवैध कब्जों को तत्काल हटाने और वास्तविक विस्थापित परिवारों को भू-खंड आवंटित करने की भी मांग की। उनका कहना था कि जिन लोगों ने परियोजना के लिए अपनी जमीन दी है, उन्हें उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।


अधिकारियों को दिए गए आवश्यक निर्देश


समीक्षा बैठक के अंत में प्रशासक राजीव रंजन ने संबंधित अधिकारियों को पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी पुनर्वास स्थलों का व्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जाए और परियोजना प्रभावित परिवारों के आय, जाति एवं आवासीय प्रमाणपत्र प्राथमिकता के आधार पर जारी किए जाएं, ताकि वे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें। बैठक में चांडिल के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), भू-अर्जन पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंताओं सहित झामुमो के केंद्रीय सदस्य काबलू महतो, राखहरि सिंह मुंडा, मुखिया प्रतिनिधि सैनिक मांझी, अभय यादव, गुणाधर महतो, पशुपति बागची, सुकदेव महतो, विष्णु महतो, गोपाल महतो, कालाचांद धीवर समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे। बैठक में यह भरोसा दिलाया गया कि परियोजना प्रभावित परिवारों की समस्याओं का चरणबद्ध तरीके से समाधान किया जाएगा और पुनर्वास कार्य को गति देकर विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।