टाटा लीज नवीनीकरण से पहले 18 मौजा का सर्वे हो, विस्थापितों ने डीसी को सौंपा ज्ञापन

Jamshedpur News : टाटा लीज नवीनीकरण को लेकर एक बार फिर विस्थापितों और मूल रैयतों के अधिकारों का मुद्दा तेज हो गया है। झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को उपायुक्त राजीव रंजन और अपर उपायुक्त अनुराग कुमार तिवारी से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि टाटा लीज के नवीनीकरण से पहले 18 मौजा के खतियानधारियों, मूल रैयतों, आदिवासियों और विस्थापित परिवारों का सर्वे कराया जाए, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। प्रशासन ने इस संबंध में जिला स्तर से राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया है।

18 मौजा के खतियानधारियों का सर्वे कराने की उठी मांग

झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि वर्ष 2005 में हुए टाटा लीज नवीनीकरण के दौरान बड़ी संख्या में विस्थापितों और मूल रैयतों को न्याय नहीं मिल पाया था। कई परिवार आज भी अपने अधिकारों और पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में इस बार लीज नवीनीकरण से पहले 18 मौजा के खतियानधारियों और प्रभावित परिवारों का व्यापक सर्वे कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सर्वे के माध्यम से वास्तविक विस्थापितों, भूमि मालिकों और पारंपरिक अधिकारधारियों की पहचान होगी, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद कम होगा और प्रभावित लोगों को उनका उचित अधिकार मिल सकेगा।

डीसी और एडीसी ने दिया प्रस्ताव भेजने का आश्वासन

प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त राजीव रंजन और अपर उपायुक्त अनुराग कुमार तिवारी को ज्ञापन सौंपते हुए आग्रह किया कि जिला प्रशासन इस मामले में सकारात्मक पहल करे। अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि जिला स्तर से सरकार के समक्ष सर्वे कराने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद मंच के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगी। उनका कहना है कि लीज नवीनीकरण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में स्थानीय लोगों और विस्थापित परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक और न्यायसंगत कदम होगा।

सीएनटी एक्ट, ग्रामसभा और भूमि अधिकारों को लेकर रखी गई प्रमुख मांगें

ज्ञापन में मंच ने कई महत्वपूर्ण मांगें प्रशासन के समक्ष रखीं। उन्होंने कहा कि सीएनटी एक्ट के तहत अवैध भूमि कब्जों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही ग्रामसभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का भूमि संबंधी निर्णय नहीं लिया जाए। इसके अलावा मंच ने मांग की कि टाटा लीज नवीनीकरण प्रक्रिया में विस्थापितों और मूल रैयतों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। भूमि उपयोग से जुड़े सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं ताकि पारदर्शिता बनी रहे। मंच का मानना है कि पारदर्शी प्रक्रिया से लोगों का विश्वास बढ़ेगा और भविष्य में विवाद की संभावनाएं कम होंगी।

स्थायी पुनर्वास, रोजगार और निगरानी समिति गठन की मांग

झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने कहा कि केवल भूमि का मुद्दा ही नहीं, बल्कि विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और आजीविका की भी ठोस व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी पात्र विस्थापितों को स्थायी पुनर्वास, रोजगार के अवसर और आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जाएं। मंच ने जिला स्तर पर एक निगरानी समिति गठित करने की भी मांग की, जो लीज नवीनीकरण और विस्थापितों से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी करे। इसके साथ ही पात्र लोगों को विस्थापित प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को भी तेज करने का आग्रह किया गया, ताकि वे सरकारी योजनाओं और अधिकारों का लाभ प्राप्त कर सकें।

इन लोगों की रही प्रतिनिधिमंडल में मौजूदगी

ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने किया। उनके साथ सानंद प्रधान, मनोज बोदरा, राम सिंह भुमिज, गणेश गोप, रीता रजक, वीर सिंह हेंब्रम, अनिता रजक, समाय हो, कुसन सुंडी, गया हो, मिथिलेश गोप सहित कई सदस्य मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि टाटा लीज नवीनीकरण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हजारों मूल रैयतों, आदिवासियों और विस्थापित परिवारों के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार को सभी संबंधित पक्षों की राय लेकर पारदर्शी और न्यायपूर्ण निर्णय लेना चाहिए। यदि प्रभावित लोगों के अधिकारों की अनदेखी की गई तो भविष्य में व्यापक जनआंदोलन भी खड़ा हो सकता है। मंच ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनके सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा और लीज नवीनीकरण से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराई जाएंगी।

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