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बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना पर फूटा जनाक्रोश: दुखनी सोरेन ने दी रांची विधानसभा तक पदयात्रा और जनआंदोलन की चेतावनी

जनसमर्थन जुटाने के लिए ‘एक मुट्ठी चावल’ अभियान की तैयारी

Jamshedpur News: वर्षों से अधूरी पड़ी बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना को धरातल पर उतारने की मांग को लेकर अब जनआंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। बागबेड़ा महानगर विकास समिति की संरक्षक दुखनी सोरेन ने घोषणा की है कि यदि जल्द योजना को शुरू नहीं किया गया तो जनता के सहयोग से व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। इसके लिए “हर घर एक मुट्ठी चावल” अभियान के माध्यम से लोगों को जोड़ने का निर्णय लिया गया है। दुखनी सोरेन ने कहा कि यह केवल जलापूर्ति योजना का मुद्दा नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के मूलभूत अधिकार और सम्मान का प्रश्न है। जनता के सहयोग और सहभागिता से इस आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा, ताकि सरकार तक लोगों की आवाज मजबूती से पहुंच सके।

आंदोलनकारियों ने किया योजना क्षेत्र का निरीक्षण


बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना से जुड़े आंदोलनकारी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण बागबेड़ा महानगर विकास समिति के अध्यक्ष सुबोध झा के नेतृत्व में किया गया। निरीक्षण दल में दुखनी सोरेन सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान योजना के अंतर्गत किए गए कार्यों और वर्तमान स्थिति का जायजा लिया गया। आंदोलनकारियों ने पाया कि कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने का कार्य तो पूरा हो चुका है, लेकिन जलापूर्ति शुरू होने की कोई स्पष्ट संभावना नजर नहीं आ रही है। इससे क्षेत्र के लोगों में भारी निराशा और आक्रोश है। निरीक्षण के बाद आंदोलनकारियों ने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि योजना को तत्काल शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

11 वर्षों बाद भी अधूरी है महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजना


बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना का शिलान्यास 18 अप्रैल 2015 को किया गया था। योजना को 27 जुलाई 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी यह परियोजना पूरी नहीं हो सकी। लगभग 11 वर्षों से यह योजना अधूरी पड़ी हुई है। इस महत्वाकांक्षी योजना से 21 पंचायतों के 113 गांवों, रेलवे क्षेत्र की 33 बस्तियों तथा लगभग ढाई लाख लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य था। लेकिन आज भी इन क्षेत्रों के लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। पाइपलाइन बिछ जाने के बावजूद लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच सका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें वर्षों से केवल आश्वासन और नई-नई समयसीमाएं दी जा रही हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम दिखाई नहीं दे रहा।

जल संकट से परेशान जनता, जल्द समाधान की मांग


निरीक्षण के दौरान दुखनी सोरेन ने कहा कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से पेयजल संकट का सामना कर रही है। गर्मी के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। कई गांवों और बस्तियों में लोगों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ता है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित विभागों को जनता की इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए। यदि समय पर योजना शुरू नहीं होती है तो लोगों का धैर्य जवाब दे सकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब जनता को उनके अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता और पानी के मुद्दे पर किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

धरना, भूख हड़ताल, विधानसभा घेराव और हाईकोर्ट में याचिका की तैयारी


आंदोलनकारियों के साथ हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय किया गया कि यदि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग निर्धारित समय के भीतर योजना को पूरा नहीं करता है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। इसके तहत धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल, विधानसभा घेराव और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही योजना में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में एक और जनहित याचिका दायर करने की भी तैयारी की जा रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इतने वर्षों तक योजना अधूरी रहने के कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों तथा एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

जमशेदपुर से रांची तक पदयात्रा कर विधानसभा घेराव की चेतावनी


दुखनी सोरेन ने कहा कि यदि विभाग द्वारा दिए गए आश्वासन फिर झूठे साबित हुए तो आंदोलन का अगला चरण और अधिक प्रभावशाली होगा। उन्होंने घोषणा की कि बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के अंतर्गत आने वाले गांवों और बस्तियों के सैकड़ों लोग जमशेदपुर से रांची तक पदयात्रा करेंगे और विधानसभा का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा जनता के अधिकार और सम्मान की लड़ाई होगी। आंदोलन का उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ से नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता को उनका बुनियादी अधिकार दिलाना है। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेने की अपील की।इस अवसर पर दुखनी सोरेन, सुबोध झा, कृष्णा पात्रो, छोटेराय मुर्मू, प्रभा हांसदा, पवित्रा पांडे, संतोष जायसवाल, महेश सिंह, रामेश्वर प्रसाद, कन्हैया पांडे, सौरभ कुमार, अखिलेश कुमार सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि जनता के सहयोग और एकजुटता से जल्द ही बड़े जनआंदोलन की रूपरेखा तैयार कर बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना को पूरा कराने के लिए निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।

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